नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका, जिसे कभी सपनों का देश कहा जाता था, अब वहां रहने वाले भारतीयों के लिए एक डरावने सपने में बदलता जा रहा है। H1B वीजा की लटकती तलवार और सड़कों पर बढ़ती हिंसा के बीच, एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है जिसने पूरे भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। क्या अमेरिका में भारतीय सुरक्षित हैं? यह सवाल अब हर माता-पिता के मन में है।
🇺🇸 द अमेरिकन ड्रीम बनाम हकीकत: NRI की वापसी की सोच और जान का खतरा
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर एक दिल्ली निवासी एनआरआई (NRI) की पोस्ट वायरल हुई, जिसने एक नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका में H1B वीजा की अनिश्चितताओं और आव्रजन (Immigration) प्रक्रिया के मानसिक तनाव से तंग आकर, इस एनआरआई ने भारत लौटने की इच्छा जताई।
उसने लिखा कि उसके पास लगभग 800,000 डॉलर (करीब 6 करोड़ रुपये) की बचत है। उसका प्लान भारत के किसी शांत शहर में रिटायरमेंट का है। हालांकि, उसे चिंता इस बात की थी कि अगर वह दक्षिण भारत (South India) में बसता है, तो क्या उसे ‘भाषा’ (Language Barrier) की समस्या होगी?
लेकिन विडंबना देखिए, जिस समय यह एनआरआई भारत में ‘भाषा’ की समस्या से डर रहा है, ठीक उसी समय अमेरिका में दक्षिण भारतीयों को अपनी ‘जान’ के लाले पड़े हैं। भाषा की चिंता बहुत छोटी है, जब सामने मौत खड़ी हो। आंकड़े गवाह हैं कि अमेरिका में भारतीयों, विशेषकर दक्षिण भारतीयों के खिलाफ हिंसा का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है।
📊 खूनी आंकड़े: 2024-2025 में भारतीयों पर हुए हमलों का सच
अमेरिका में पिछले दो वर्षों में जो हुआ, वह किसी संयोग से कम नहीं लगता, लेकिन जब आप गहराई में जाते हैं, तो यह एक पैटर्न नजर आता है। फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) और भारतीय दूतावास के आंकड़ों के विश्लेषण से एक भयावह तस्वीर उभरती है।
- कुल मामले: 2024 और 2025 की शुरुआत के बीच 25 से अधिक भारतीयों की हत्याएं दर्ज की गई हैं।
- साउथ इंडियन कनेक्शन: इन हत्याओं में 70% से अधिक पीड़ित दक्षिण भारतीय (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु) हैं।
- साल 2023 का रिकॉर्ड: 2023 से 2025 के बीच कुल 86 भारतीयों पर विदेशों में हमले हुए, जिनमें सबसे ज्यादा मामले अमेरिका से थे।
- छात्र निशाने पर: मरने वालों में बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो सुनहरे भविष्य का सपना लेकर वहां गए थे, लेकिन उन्हें गोलियों या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मिली।
नोट: ज्यादातर मामलों में स्थानीय पुलिस की प्रतिक्रिया (Response) बेहद लचर पाई गई है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
🎯 दक्षिण भारतीय ही क्यों हैं निशाने पर? एक गहरा विश्लेषण 🔍
यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर अमेरिका में नस्लीय हिंसा या अपराध का शिकार दक्षिण भारतीय ही ज्यादा क्यों हो रहे हैं? इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण छिपे हैं।
- प्रोफेशनल डेमोग्राफिक्स: अमेरिका में IT, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर सेक्टर में दक्षिण भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।
- छोटे शहरों में निवास: कमाई बचाने और सस्ती पढ़ाई के चक्कर में कई छात्र ओहियो (Ohio), जॉर्जिया (Georgia), और विस्कॉन्सिन (Wisconsin) जैसे राज्यों के छोटे शहरों या कस्बों में रहते हैं।
- कमजोर सुरक्षा तंत्र: इन छोटे शहरों में मेट्रो सिटीज के मुकाबले पुलिसिंग कमजोर होती है और सर्विलांस की कमी होती है।
- पार्ट-टाइम जॉब्स का खतरा: महंगी फीस भरने के लिए छात्र अक्सर गैस स्टेशनों, कन्वीनियंस स्टोर्स या मोटल्स में नाइट शिफ्ट करते हैं। ये स्थान लूटपाट और गन वायलेंस (Gun Violence) के हॉटस्पॉट होते हैं।
💀 हत्याओं की डरावनी लिस्ट: जब सपनों का अंत कफन में हुआ
यहां उन प्रमुख मामलों की विस्तृत सूची दी गई है, जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में भारतीय समुदाय को दहला दिया। यह महज नाम नहीं, बल्कि उजड़े हुए परिवारों की दास्तां है।
1. साई तेजा नुकरापु (22 वर्ष) – विस्कॉन्सिन
नवंबर 2024 में, आंध्र प्रदेश के रहने वाले एमबीए छात्र साई तेजा की एक कन्वीनियंस स्टोर पर बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस को आशंका है कि यह लूटपाट का मामला था, लेकिन एक होनहार छात्र की जान चंद डॉलर्स के लिए ले ली गई।
2. कोय्याडा रवि तेजा (26 वर्ष) – वॉशिंगटन DC
जनवरी 2025 में, आंध्र प्रदेश के रवि तेजा, जो अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी कर चुके थे, फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। डिलीवरी के दौरान ही उन पर गोलीबारी हुई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
3. वीरा साईएश (24 वर्ष) – ओहियो
जुलाई 2023 में (जो 2024 के आंकड़ों में गिना गया), आंध्र प्रदेश के वीरा को एक फ्यूल स्टेशन पर गोली मार दी गई। वह वहां क्लर्क के रूप में काम कर रहे थे। यह घटना दर्शाती है कि नाइट शिफ्ट कितनी जानलेवा हो सकती है।
4. मोहम्मद अब्दुल अर्फाथ (25 वर्ष) – ओहियो
हैदराबाद (तेलंगाना) के रहने वाले मोहम्मद अब्दुल अप्रैल 2024 में अचानक लापता हो गए। हफ्तों की तलाश के बाद उनकी बॉडी मिली। पुलिस को किडनैपिंग और हत्या का गहरा शक है, लेकिन गुत्थी अब भी पूरी तरह सुलझी नहीं है।
5. उमा सत्य साई गड्डे – ओहियो
आंध्र प्रदेश के एक और छात्र, उमा सत्य साई की अप्रैल 2024 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बाद में पुलिस जांच ने इसे हत्या (Homicide) की श्रेणी में रखा।
6. पारुचुरी अभिजीत (20 वर्ष) – बोस्टन
मार्च 2024 में गुंटूर (आंध्र प्रदेश) के इस 20 वर्षीय छात्र का शव एक जंगल में कार के अंदर मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साथी छात्रों के साथ विवाद के बाद उनकी हत्या की गई थी। एक प्रतिभाशाली छात्र का अंत इतना दर्दनाक होगा, किसी ने सोचा न था।
7. जी दिनेश और निकेश (22 & 21 वर्ष) – कनेक्टिकट
जनवरी 2024 में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के इन दो छात्रों की मौत कार्बन मोनोऑक्साइड पॉइजनिंग से बताई गई, लेकिन परिजनों और समुदाय ने इसे संदिग्ध हत्या माना है। मामले की परतें अभी खुलनी बाकी हैं।
8. चंद्रशेखर पोल (28 वर्ष) – टेक्सास
अक्टूबर 2025 में, डेटा एनालिटिक्स के छात्र चंद्रशेखर को एक अज्ञात हमलावर ने गोली मार दी। रंगा रेड्डी जिले (तेलंगाना) का यह छात्र अपने करियर की उड़ान भरने ही वाला था कि उसे मौत ने गले लगा लिया।
9. राकेश पटेल और प्रदीपभाई पटेल – गन वायलेंस का शिकार
सिर्फ छात्र ही नहीं, पुराने बसे एनआरआई भी सुरक्षित नहीं हैं। अक्टूबर 2025 में पिट्सबर्ग में मोटल मालिक राकेश पटेल और मार्च 2025 में वर्जीनिया में दुकानदार प्रदीपभाई पटेल (56) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रदीपभाई की बेटी उर्मी (26) भी इस हमले में मारी गईं।
⚠️ अमेरिका में बढ़ता ‘गन कल्चर’ और ‘हेट क्राइम’ 🔫
अमेरिका में हिंसा की जड़ वहां का अनियंत्रित गन कल्चर (Gun Culture) है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीयों की 48% हत्याओं में बंदूक का इस्तेमाल हुआ है।
- FBI डेटा: अमेरिका में हेट क्राइम (Hate Crime) के मामलों में 30% की बढ़ोतरी देखी गई है।
- मानसिक स्वास्थ्य और नशा: FIIDS का कहना है कि कई हमलों के पीछे हमलावरों की मानसिक अस्थिरता और ड्रग्स का सेवन भी जिम्मेदार है।
- नस्लवाद (Racism): ‘ब्राउन स्किन’ के प्रति बढ़ती नफरत, खासकर उन इलाकों में जहां विविधता (Diversity) कम है, भारतीयों के लिए खतरा पैदा कर रही है।
🛡️ एक्सपर्ट्स की राय: अब क्या करें भारतीय?
हालात चिंताजनक जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया है। भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा विशेषज्ञों और TANA (Telugu Association of North America) जैसे संगठनों ने कुछ महत्वपूर्ण सलाह जारी की हैं:
- लोकल लॉ और कल्चर समझें: जिस शहर में जा रहे हैं, वहां के सुरक्षित और असुरक्षित इलाकों (Red Zones) की जानकारी पहले ही ले लें।
- समूह में रहें: अकेले सुनसान रास्तों पर जाने से बचें, खासकर रात के समय। ग्रुप में रहना हमेशा सुरक्षित होता है।
- हेट क्राइम रिपोर्ट करें: अगर आपको किसी भी तरह की नस्लीय टिप्पणी या धमकी मिले, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत 911 पर रिपोर्ट करें।
- प्लान B तैयार रखें: जैसा कि दिल्ली के एनआरआई ने सोचा, भारत में निवेश करना और वापस लौटना अब एक समझदारी भरा विकल्प (Plan B) माना जा रहा है।
🇮🇳 निष्कर्ष: वतन वापसी या अमेरिकी सपना?
अमेरिका में 2024-2025 के दौरान दक्षिण भारतीयों पर हुए हमले महज आंकड़े नहीं हैं, ये एक चेतावनी हैं। 6 करोड़ रुपये की बचत के साथ भारत लौटने की सोच रहे एनआरआई का डर ‘भाषा’ हो सकता है, लेकिन अमेरिका में रह रहे छात्रों का डर ‘बुलेट’ है।
सपना देखना गलत नहीं है, लेकिन उस सपने की कीमत जान देकर चुकाना किसी भी तरह से जायज नहीं है। यह समय है कि भारतीय छात्र और प्रोफेशनल्स अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और सरकार भी कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकन प्रशासन से जवाब तलब करे।
❓ पूछे जाने वाले प्रश्न.
Q1: अमेरिका में भारतीयों की हत्याएं क्यों बढ़ रही हैं?
A: इसके मुख्य कारण अमेरिका का गन कल्चर, बढ़ते हेट क्राइम (नस्लीय हिंसा), और कुछ मामलों में लूटपाट की घटनाएं हैं। छोटे शहरों में पुलिस की कमजोर पकड़ भी एक बड़ी वजह है।
Q2: क्या अमेरिका में भारतीय छात्रों के लिए जाना सुरक्षित है?
A: पूरी तरह असुरक्षित नहीं है, लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे सुरक्षित यूनिवर्सिटी चुनें, देर रात अकेले न घूमें और स्थानीय कानूनों का पालन करें।
Q3: 2024-25 में कितने भारतीयों की हत्या हुई?
A: रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 से 2025 की शुरुआत तक 25 से ज्यादा भारतीयों की हत्याएं या संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं।
Q4: सबसे ज्यादा किस राज्य के छात्र निशाने पर हैं
A: आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों में 70% से अधिक दक्षिण भारतीय (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) हैं।
Q5: अमेरिका में मुसीबत आने पर किससे संपर्क करें?
A: किसी भी आपात स्थिति में 911 पर कॉल करें। इसके अलावा, निकटतम भारतीय वाणिज्य दूतावास (Indian Consulate) या ‘मदद’ (MADAD) पोर्टल के जरिए संपर्क करें।
External Source: Patrika Report
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