आसाराम को मिली 6 महीने की राहत, गुजरात हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में सजा निलंबित की!

🧭 परिचय: आसाराम को मिली राहत पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

गुजरात हाईकोर्ट ने 2013 के चर्चित बलात्कार मामले में दोषी आसाराम को छह महीने की सजा निलंबन की राहत दी है। अदालत ने यह निर्णय उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया।

⚖️ गुजरात हाईकोर्ट का फैसला: क्या है सजा निलंबन का आधार?

गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी शामिल थे, ने गुरुवार को यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि यह राहत राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की तर्ज पर दी जा रही है, जिसमें पहले ही आसाराम को स्वास्थ्य कारणों से अंतरिम जमानत दी गई थी।

📌 मुख्य बिंदु:

  • फैसला 6 नवंबर 2025 को सुनाया गया।
  • आसाराम वर्तमान में गांधीनगर की सत्र अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
  • अदालत ने राज्य सरकार से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी।
  • वकील देवदत्त कामत ने उम्र और स्वास्थ्य को आधार बनाकर राहत की मांग की।

🕵️‍♂️ 2013 का मामला: क्या था आरोप और सजा का विवरण?

आसाराम पर आरोप था कि उन्होंने 2013 में एक महिला शिष्या के साथ बलात्कार किया। इस मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए गांधीनगर की सत्र अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इससे पहले, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अक्टूबर 2025 में उन्हें छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी।

📚 पृष्ठभूमि:

  • अप्रैल 2018 में जोधपुर सत्र अदालत ने भी आसाराम को एक अन्य बलात्कार मामले में दोषी ठहराया था।
  • पीड़िता की उम्र उस समय नाबालिग थी।
  • आसाराम पर देशभर में कई यौन शोषण के मामले दर्ज हैं।

🏥 स्वास्थ्य स्थिति: क्या सच में बिगड़ रही है तबीयत?

आसाराम के वकील ने अदालत को बताया कि उनकी हालत “बेहोशी जैसी” है और जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आसाराम को दिल की बीमारी है और उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है।

🩺 चिकित्सा तर्क:

  1. उम्र 80 वर्ष से अधिक।
  2. दिल की बीमारी और उच्च रक्तचाप।
  3. जेल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी।
  4. राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसी आधार पर राहत दी थी।

👨‍⚖️ पीड़िता पक्ष की प्रतिक्रिया: उठे सवाल

पीड़िता पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि आसाराम की बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह राहत न्याय प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है और इससे पीड़िता को मानसिक आघात पहुंच सकता है।

📜 कानूनी विश्लेषण: क्या है सजा निलंबन का मतलब?

सजा निलंबन का अर्थ है कि दोषी को कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाती है, लेकिन सजा पूरी तरह से रद्द नहीं होती। यह आमतौर पर स्वास्थ्य, उम्र या अन्य मानवीय कारणों से दिया जाता है।

⚖️ सजा निलंबन के कानूनी आधार:

  • भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के तहत सजा निलंबन संभव।
  • मेडिकल रिपोर्ट और उम्र का विशेष महत्व।
  • अदालत का विवेकाधिकार सर्वोपरि।

🔍 सामाजिक प्रभाव: क्या इससे न्याय व्यवस्था पर असर पड़ेगा?

इस फैसले ने समाज में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बड़े नामों को कानून से विशेष राहत मिलती है? क्या पीड़िता को न्याय मिल पाया? ऐसे सवालों पर बहस तेज हो गई है।

❓ FAQs

❓ आसाराम को कितने समय की राहत मिली है?

उन्हें गुजरात हाईकोर्ट से छह महीने की सजा निलंबन की राहत मिली है।

❓ क्या यह सजा पूरी तरह से रद्द हो गई है?

नहीं, यह केवल अस्थायी राहत है। सजा अभी भी बरकरार है।

❓ क्या इससे पहले भी उन्हें राहत मिली थी?

हाँ, राजस्थान हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में उन्हें अंतरिम जमानत दी थी।

❓ क्या पीड़िता पक्ष ने इस फैसले का विरोध किया?

हाँ, पीड़िता पक्ष ने बीमारी के तर्क पर सवाल उठाए हैं।

🔚 निष्कर्ष: राहत के बीच उठते सवाल

गुजरात हाईकोर्ट का यह फैसला कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे समाज में न्याय और समानता को लेकर बहस तेज हो गई है। आसाराम को मिली यह राहत अस्थायी है, और आने वाले समय में अदालत की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी होंगी।

External Source: Patrika Report

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे शेयर करें और दूसरों को भी जागरूक करें। NEWSWELL24.COM पर हम ऐसे ही जरूरी और भरोसेमंद जानकारी लाते रहते हैं

Leave a Comment

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now