राष्ट्रीय TB उन्मूलन: उत्तर प्रदेश बना मिसाल, मृत्यु दर में रिकॉर्ड 28% की कमी
लखनऊ, भारत — स्वास्थ्य और कल्याण के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश (UP) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय क्षय रोग (TB) उन्मूलन कार्यक्रम के तहत राज्य ने पिछले एक दशक में TB के मामलों में 21 प्रतिशत और TB से संबंधित मौतों के आँकड़ों में 28 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। यह आँकड़ा वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए आशा की एक नई किरण लेकर आया है और TB उन्मूलन की दिशा में भारत के प्रयासों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
📉 10 साल में TB के ख़िलाफ़ निर्णायक जीत की ओर UP
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताज़ा ‘ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट’ के निष्कर्षों ने इस बात की पुष्टि की है कि उत्तर प्रदेश में TB उन्मूलन के लिए अपनाई गई आक्रामक और बहुआयामी रणनीति रंग लाई है। जहां कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश TB के मरीज़ों की सबसे बड़ी संख्या को अधिसूचित करने वाले राज्यों में से एक था, वहीं अब यह राज्य इस गंभीर संक्रामक रोग के ख़िलाफ़ लड़ाई में देश का नेतृत्व कर रहा है।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने इस उपलब्धि को प्रदेश सरकार की दूरगामी नीतियों और स्वास्थ्यकर्मियों के अथक परिश्रम का परिणाम बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य नीतियां न केवल मरीजों की पहचान पर केंद्रित रही हैं, बल्कि उनके संपूर्ण उपचार और सामाजिक सहयोग को सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया गया है।
🎯 TBउन्मूलन कार्यक्रम की व्यापकता: आँकड़ों की ज़ुबानी
TB उन्मूलन की लड़ाई में उत्तर प्रदेश की सफलता आकस्मिक नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित अभियान का परिणाम है जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को एक साथ लाया गया है।
📊 निजी क्षेत्र की भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि
TB के ख़िलाफ़ इस जंग में एक सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करना रहा है।
- सबसे अधिक मामले: वर्ष 2024 में, उत्तर प्रदेश में देश में सर्वाधिक 6,81,731 TB मरीज़ों की पहचान की गई थी। इस बड़ी संख्या में मरीज़ों की पहचान होना बताता है कि राज्य की स्क्रीनिंग और अधिसूचना प्रणाली कितनी मजबूत हुई है।
- निजी क्षेत्र का योगदान: इन कुल मरीज़ों में से एक महत्वपूर्ण संख्या यानी 2,52,240 मरीज़ों की अधिसूचना निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से आई।
- नोटिफिकेशन में उछाल: डॉ. भटनागर के अनुसार, निजी क्षेत्र से TB मरीज़ों की अधिसूचना (Notification) दर, जो वर्ष 2021 में 63 प्रतिशत थी, वह वर्ष 2024 तक बढ़कर एक प्रभावशाली 115 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह दर्शाता है कि अब निजी डॉक्टर भी TB के मामलों को ‘निक्षय पोर्टल’ पर पंजीकृत करने के लिए सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं, जिससे रोग की वास्तविक स्थिति का पता चल रहा है।
💊 उपचार कवरेज: विश्व स्तर से बेहतर
TB का सफल उपचार केवल मरीज़ की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि मरीज़ को निर्धारित अवधि के लिए पूरा और निर्बाध उपचार मिले।
- उच्च उपचार दर: राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र के अनुसार, इस समय उत्तर प्रदेश में लगभग 92% टीबी मरीज़ों को उनका निर्धारित उपचार सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
- वैश्विक तुलना: यह उल्लेखनीय आँकड़ा दुनिया के कई अन्य देशों की उपचार दर से कहीं अधिक बेहतर है, जो राज्य के स्वास्थ्य देखभाल वितरण तंत्र की दक्षता को प्रमाणित करता है। उच्च उपचार दर यह सुनिश्चित करती है कि टीबी के प्रसार की शृंखला टूटे और एंटीबायोटिक प्रतिरोधी टीबी (Drug-Resistant TB) के मामले कम हों।
🚀 टीबी मुक्त भारत अभियान: लक्ष्य 2025
भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उत्तर प्रदेश इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।
🗂️ निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण का महाअभियान
टीबी के सभी मामलों को एक केंद्रीकृत प्रणाली, निक्षय पोर्टल (Ni-kshay Portal) पर पंजीकृत करना कार्यक्रम की निगरानी और सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
- लक्ष्य बनाम उपलब्धि: वर्ष 2025 (1 जनवरी से 30 अक्टूबर) के दौरान राज्य ने 6.62 लाख टीबी मरीज़ों को अधिसूचित करने का लक्ष्य रखा था।
- पंजीकरण: इस अवधि के सापेक्ष राज्य में कुल 5,61,145 क्षय रोगियों का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण किया गया। इसमें 3,65,171 रोगी सरकारी क्षेत्र से और 1,95,974 रोगी निजी क्षेत्र से थे। यह लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत प्रगति को दर्शाता है।
🏡 टीबी मुक्त ग्राम पंचायत पहल
टीबी उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए टीबी मुक्त ग्राम पंचायत (TB-Free Gram Panchayat) की पहल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।
- 7,191 पंचायतें: वर्ष 2024 में, राज्य की कुल 7,191 ग्राम पंचायतों को ‘टीबी मुक्त’ घोषित किया गया है। यह पहल समुदाय-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है और स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करती है, जिससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीबी की पहचान और उपचार संभव हो पाता है।
🔍 सक्रिय स्क्रीनिंग और व्यापक जांच
टीबी के मामलों में कमी का एक और प्रमुख कारण उच्च जोखिम वाली आबादी की बड़े पैमाने पर सक्रिय केस फाइंडिंग (Active Case Finding – ACF) और व्यापक डायग्नोस्टिक क्षमता का उपयोग है।
🔬 2.38 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग
रोग के लक्षणों वाले और उच्च जोखिम वाले समूहों, जैसे कि मधुमेह रोगी, कुपोषण के शिकार लोग, और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पहचान करना इस अभियान का केंद्र बिंदु था।
- उच्च जोखिम वाली स्क्रीनिंग: 7 दिसंबर 2024 से 19 अक्टूबर 2025 के बीच, उच्च जोखिम वाले कुल 2.38 करोड़ लोगों की गहन स्क्रीनिंग की गई।
- टीबी की पुष्टि: इस व्यापक स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप 5.14 लाख लोगों में टीबी रोग की पुष्टि हुई। इन लोगों की शीघ्र पहचान और तत्काल उपचार शुरू करने से न केवल उनकी जान बचाई गई, बल्कि समुदाय में संक्रमण के प्रसार को भी रोका गया।
🧪 डायग्नोस्टिक तकनीक का विस्तार
सटीक और शीघ्र निदान के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है:
- एक्स-रे जाँच: इस अवधि के दौरान लगभग 65 लाख लोगों की एक्स-रे जांच की गई, जो फुफ्फुसीय (Pulmonary) टीबी के निदान में एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
- CBNAAT मशीन: लगभग 20.90 लाख लोगों की जांच कार्ट्रिज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (CBNAAT) मशीनों से की गई। ये मशीनें न केवल टीबी का पता लगाने में अत्यधिक सटीक होती हैं, बल्कि मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) का पता भी तेज़ी से लगाती हैं, जिससे सही उपचार जल्द शुरू किया जा सके।
🤝 सफलता के पीछे के मुख्य कारण: सामाजिक सहभागिता और वित्तीय संबल
टीबी के मरीज़ों की संख्या में आई कमी के पीछे सिर्फ चिकित्सा उपचार ही नहीं, बल्कि वित्तीय सहायता और सामाजिक सहभागिता भी प्रमुख कारण हैं।
💰 निक्षय पोषण योजना (NPS) का प्रभाव
टीबी के मरीज़ों को अक्सर उपचार की लंबी अवधि के दौरान पोषण और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को हल करने के लिए निक्षय पोषण योजना (Ni-kshay Poshan Yojana) को एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
- भत्ते में वृद्धि: केंद्र सरकार ने टीबी मरीज़ों को पोषण के लिए दी जाने वाली मासिक सहायता राशि को ₹500 से बढ़ाकर अब ₹1,000 प्रति माह कर दिया है। यह वित्तीय सहायता मरीज़ों को बेहतर पोषण सुनिश्चित करने में मदद करती है, जो सफल उपचार और पूर्ण रिकवरी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- इलाज पूरा करना: बेहतर पोषण भत्ता मरीज़ों को आर्थिक रूप से स्थिर महसूस कराता है, जिससे वे अपना इलाज बीच में छोड़ने के बजाय उसे पूरा करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
🧑🤝🧑 निक्षय मित्र पहल: सामाजिक सहभागिता
‘निक्षय मित्र’ पहल एक अनूठा सामाजिक अभियान है जिसमें नागरिक और संस्थाएं टीबी मरीज़ों को गोद लेते हैं।
- मरीज़ गोद लेना: इस पहल के तहत नागरिकों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, और गैर-सरकारी संगठनों को टीबी मरीज़ों को गोद लेने और उन्हें अतिरिक्त पोषण, भावनात्मक, और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- सामुदायिक समर्थन: यह सामुदायिक स्वामित्व और सहानुभूति की भावना पैदा करता है, जिससे मरीज़ों को अलगाव या सामाजिक कलंक (Stigma) का सामना नहीं करना पड़ता और वे मानसिक रूप से मजबूत महसूस करते हैं।
🗺️ निष्कर्ष: टीबी उन्मूलन की राह पर उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में टीबी मरीज़ों की संख्या और मृत्यु दर में दर्ज की गई महत्वपूर्ण गिरावट राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की एक बड़ी सफलता की कहानी है। यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों का ही नहीं, बल्कि व्यापक स्क्रीनिंग, उच्च उपचार अनुपालन दर, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, और निक्षय पोषण योजना जैसी सामाजिक-आर्थिक पहलों के संयोजन का परिणाम है।
राज्य ने अब टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की घोषणा करके और ‘निक्षय मित्र’ जैसे अभियानों को बढ़ावा देकर टीबी उन्मूलन के लिए एक मजबूत नींव रखी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की बेहतर स्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि भारत अपने 2025 टीबी उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही रास्ते पर है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.
1. टीबी के मामलों में 21% की कमी किस अवधि के दौरान आई है?
टीबी के मरीज़ों की संख्या में 21% की कमी पिछले 10 साल के दौरान दर्ज की गई है, जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है।
2. टीबी से होने वाली मौतों के आँकड़ों में कितनी गिरावट आई है?
उत्तर प्रदेश में टीबी से होने वाली मौतों के आँकड़ों में पिछले एक दशक में 28% की महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है।
3. ‘निक्षय पोषण योजना’ क्या है और इसके तहत कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
‘निक्षय पोषण योजना’ भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत टीबी मरीज़ों को पोषण संबंधी ज़रूरतें पूरी करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत अब ₹1,000 प्रति माह की राशि प्रदान की जाती है, जिसे पहले ₹500 प्रति माह से बढ़ाया गया है।
4. उत्तर प्रदेश में कितने प्रतिशत टीबी मरीज़ों को पूरा उपचार मिला है?
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 92% टीबी मरीज़ों को उनका निर्धारित उपचार सफलतापूर्वक पूरा मिल चुका है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।
5. क्या भारत 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में टीबी के मामलों और मृत्यु दर में आई यह महत्वपूर्ण कमी दर्शाती है कि सुनियोजित और आक्रामक रणनीतियों के साथ, भारत 2025 टीबी उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मज़बूती से आगे बढ़ रहा है।
External Source: etvbharat.com
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