काशी के इन दो घाटों पर अंतिम संस्कार की होगी कड़ी निगरानी, अब शवों का होगा अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और वीडियोग्राफी!

काशी के इन दो घाटों पर अंतिम संस्कार की होगी कड़ी निगरानी, अब शवों का होगा अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और वीडियोग्राफी!

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में अब अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। देश के सबसे पवित्र माने जाने वाले दो प्रमुख घाटों, मणिकर्णिका घाट और हरिश्चन्द्र घाट, पर अब अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जिसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी। यह महत्वपूर्ण कदम वाराणसी नगर निगम उठा रहा है, जिसका उद्देश्य अंत्येष्टि से संबंधित सटीक डेटा जुटाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। यह नई व्यवस्था इसी महीने की 10 दिसंबर से लागू करने की तैयारी है।


🏛️ धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के केंद्र: वाराणसी के घाट

सनातन धर्म में वाराणसी का महत्व सिर्फ एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि मोक्ष की भूमि के रूप में है। यह माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार काशी के पवित्र घाटों पर किया जाता है, तो उसकी आत्मा को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिलती है और वह सीधे ईश्वर के करीब पहुँचती है। यही कारण है कि देश-विदेश से श्रद्धालु अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए यहाँ आते हैं।

मणिकर्णिका और हरिश्चन्द्र घाट: मोक्ष का प्रवेश द्वार 🌊

वाराणसी के घाटों में, मणिकर्णिका घाट और हरिश्चन्द्र घाट का विशेष स्थान है।

  • मणिकर्णिका घाट को महाश्मशान भी कहा जाता है और यह २४ घंटे जलती चिताओं के लिए प्रसिद्ध है। यह मान्यता है कि देवी पार्वती का कान का आभूषण (मणिकर्णिका) यहाँ गिरा था, जिससे इस स्थान का नाम पड़ा।
  • हरिश्चन्द्र घाट का नाम पौराणिक राजा हरिश्चन्द्र के नाम पर पड़ा, जिन्होंने यहाँ डोम राजा के यहाँ काम किया था। यह भी एक प्रमुख अंत्येष्टि स्थल है।

इन घाटों पर आने वाली अंत्येष्टियों की अत्यधिक संख्या और उनकी धार्मिक महत्ता को देखते हुए, अब नगर निगम ने एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।


📝 नगर निगम का नया ‘डेटा’ संग्रह अभियान

वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी, संदीप कुमार ने इस नई पहल की पुष्टि करते हुए बताया कि कार्यकारिणी समिति की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य मणिकर्णिका घाट और हरिश्चन्द्र घाट पर होने वाली अंत्येष्टियों का एक सटीक आंकड़ा दर्ज करना है।

डेटा में शामिल होंगी ये महत्वपूर्ण जानकारियां 📋

नगर निगम द्वारा एकत्र किए जाने वाले डेटा में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे, जो अंत्येष्टि के हर पहलू को कवर करेंगे:

  1. मृतक की पहचान:
    • नाम
    • निवास स्थान (पता)
    • मृत्यु का स्थान (जहाँ मृत्यु हुई)
  2. सूचना देने वाले व्यक्ति की डिटेल:
    • नाम
    • संपर्क जानकारी
    • मृतक से संबंध
  3. अंत्येष्टि संबंधी विवरण:
    • अंत्येष्टि की तिथि
    • अंत्येष्टि का स्थान (मणिकर्णिका या हरिश्चन्द्र घाट)

इस पहल का मकसद यह जानना है कि किस सीजन में और किस क्षेत्र से अधिक संख्या में लोग अंत्येष्टि के लिए वाराणसी आ रहे हैं। इससे घाटों के प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

वैधानिक और प्रमाणपत्र से कोई संबंध नहीं ⚖️

यह स्पष्ट किया गया है कि इस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का किसी भी प्रकार के वैधानिक मामलों से कोई सीधा संबंध नहीं होगा। जनसंपर्क अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि यह डेटा संग्रह सिर्फ रिकॉर्ड रखने के लिए है और इसका उपयोग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने या किसी कानूनी कार्रवाई के लिए नहीं किया जाएगा।


🎥 वीडियोग्राफी की अनिवार्यता: पारदर्शिता और रिकॉर्ड के लिए

वाराणसी नगर निगम ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।

वीडियोग्राफी का उद्देश्य 📹

अधिकारियों का कहना है कि यह वीडियोग्राफी मुख्य रूप से पारदर्शिता और दस्तावेज़ीकरण के उद्देश्य से कराई जा रही है। अगर किसी व्यक्ति को भविष्य में किसी प्रमाण या व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए अंत्येष्टि के फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी फुटेज की आवश्यकता होती है, तो यह रिकॉर्ड उनके लिए उपलब्ध रहेगा।

  • रिकॉर्डिंग का जिम्मा: इस कार्य के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कैमरामैन घाट पर मौजूद रहेंगे।
  • फुटेज प्राप्ति की प्रक्रिया: यदि किसी को ये फुटेज चाहिए, तो उन्हें सात दिनों के भीतर नगर निगम में आवेदन करना होगा।
  • शुल्क: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नगर निगम इस डेटा या वीडियोग्राफी फुटेज को प्रदान करने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लेगा। यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क रहेगी।

यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक होगा जो दूर-दराज से अंतिम संस्कार के लिए आते हैं और उन्हें किसी कानूनी या बीमा संबंधी आवश्यकता के लिए प्रमाण की जरूरत पड़ सकती है।


🪵 लकड़ी के स्टॉक का भी होगा विनियमन

अंत्येष्टि प्रक्रिया को सुचारु बनाने और घाटों पर अतिक्रमण को रोकने के लिए, नगर निगम वाराणसी ने अंत्येष्टि के लिए उपयोग होने वाली लकड़ियों के स्टॉक की मात्रा और समय सीमा को भी निर्धारित कर दिया है।

नए नियम और सीमाएं 🗓️

  • स्टॉक सीमा: घाटों पर लकड़ियों का स्टॉक 10 दिनों से अधिक का नहीं रखा जा सकता है।
  • व्यवस्था: यह आदेश दिया गया है कि अधिकतम 10 दिनों की लकड़ियों को ही व्यवस्थित ढंग से रखा जाए।
  • लक्ष्य: इस नियम को लागू करने का मुख्य लक्ष्य अतिक्रमण को रोकना और घाटों को स्वच्छ तथा व्यवस्थित बनाए रखना है।

यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि लकड़ी की आपूर्ति पर्याप्त हो, लेकिन अनियंत्रित स्टॉक से घाटों की सुंदरता और व्यवस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।


🔍 अंत्येष्टि पंजीकरण की आवश्यकता क्यों? एक गहन विश्लेषण

यह पहल केवल डेटा संग्रह से अधिक है; यह प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में एक बड़ा कदम है।

1. जनसांख्यिकीय और स्वास्थ्य डेटा (Demographic and Health Data) 📊

इस डेटा के माध्यम से, नगर निगम को मृत्यु दर और मौसमी उतार-चढ़ाव की बेहतर समझ मिलेगी। यह जानकारी जनसांख्यिकीय अध्ययन और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए अमूल्य हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विशेष समय या क्षेत्र से अंत्येष्टियों की संख्या में अचानक वृद्धि होती है, तो यह किसी महामारी या स्थानीय स्वास्थ्य संकट का संकेत दे सकता है, जिससे प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

2. पर्यटन और धार्मिक व्यवस्थापन (Tourism and Religious Management) 🙏

वाराणसी एक धार्मिक पर्यटन का केंद्र है। अंत्येष्टि के लिए आने वाले लोगों की संख्या का ज्ञान यातायात प्रबंधन, आवास और पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापन और मरम्मत की योजना बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

3. अतिक्रमण और पर्यावरण संरक्षण (Encroachment and Environmental Protection) 🌳

लकड़ी के स्टॉक पर नियंत्रण और वीडियोग्राफी से घाटों पर होने वाले किसी भी अनधिकृत गतिविधि या अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही, अंत्येष्टि की संख्या का पता होने पर पर्यावरण-अनुकूल दाह संस्कार विधियों (जैसे इलेक्ट्रिक शवदाह गृहों का उपयोग) को बढ़ावा देने की योजना बनाने में सहायता मिलेगी।


🗺️ भारत में अंत्येष्टि स्थल और उनके नियम: एक व्यापक दृष्टिकोण

वाराणसी का यह कदम अंतिम संस्कार स्थलों के प्रबंधन के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है। भारत में कई अन्य प्रमुख अंत्येष्टि स्थल हैं, जहाँ समय-समय पर पारदर्शिता और कुप्रबंधन के मुद्दे उठते रहे हैं।

प्रमुख अंत्येष्टि स्थलों पर डेटा प्रबंधन की आवश्यकता

  • कालीघाट (कोलकाता): एक अन्य महत्वपूर्ण अंत्येष्टि स्थल, जहाँ भीड़ और प्रबंधन एक चुनौती है।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): संगम तट के पास होने वाले अंतिम संस्कार, विशेष रूप से कुंभ और अर्ध-कुंभ के दौरान, सटीक डेटा और प्रबंधन की मांग करते हैं।

वाराणसी नगर निगम की यह पहल डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहरी प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक तकनीक का उपयोग करके, एक अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।


🚀 आगे की राह और चुनौतियां

नगर निगम के लिए इस नई व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करने में कुछ चुनौतियां भी हैं:

  1. जन जागरूकता: दूर-दराज से आने वाले लोगों को नए नियमों के बारे में सूचित करना और उन्हें पंजीकरण के लिए प्रेरित करना।
  2. मानव संसाधन: डेटा एंट्री और वीडियोग्राफी के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  3. तकनीकी बुनियादी ढांचा: घाटों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और डेटा स्टोरेज की मजबूत व्यवस्था बनाए रखना।

इन चुनौतियों के बावजूद, प्रशासनिक अधिकारियों का मानना ​​है कि यह व्यवस्था काशी के अंतिम संस्कार स्थलों की पवित्रता और व्यवस्था को बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगी। 10 दिसंबर से शुरू होने वाली यह योजना, अंत्येष्टि प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करने की क्षमता रखती है।


🔚 निष्कर्ष

वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट और हरिश्चन्द्र घाट पर शवों के रजिस्ट्रेशन और वीडियोग्राफी का नगर निगम का निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता और व्यवस्थित डेटा संग्रह की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। यह पहल न केवल जनसांख्यिकीय और स्वास्थ्य संबंधी डेटा के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी, बल्कि घाटों के कुप्रबंधन और अतिक्रमण जैसी समस्याओं को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित करेगी। 10 दिसंबर से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था मोक्ष की नगरी के अंतिम संस्कार की प्रक्रियाओं को एक आधुनिक और पारदर्शी रूप प्रदान करने की उम्मीद है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.

Q1. वाराणसी में शवों का रजिस्ट्रेशन कहाँ और कब से शुरू होगा? शवों का रजिस्ट्रेशन)

शवों का रजिस्ट्रेशन मणिकर्णिका घाट और हरिश्चन्द्र घाट पर वाराणसी नगर निगम द्वारा किया जाएगा। यह प्रक्रिया 10 दिसंबर से शुरू होने की योजना है।

Q2. इस रजिस्ट्रेशन में कौन-कौन सी जानकारी देना अनिवार्य होगा?

रजिस्ट्रेशन के दौरान मृतक का नाम, निवास स्थान, मृत्यु का स्थान, अंत्येष्टि की तिथि और सूचना देने वाले व्यक्ति का विवरण (नाम और संपर्क डिटेल) देना अनिवार्य होगा।

Q3. अंतिम संस्कार की वीडियोग्राफी क्यों कराई जा रही है? क्या इसका कोई शुल्क लगेगा?

वीडियोग्राफी मुख्य रूप से पारदर्शिता और दस्तावेज़ीकरण के लिए कराई जा रही है। यदि किसी को वीडियोग्राफी फुटेज की आवश्यकता हो, तो वह सात दिनों के भीतर नगर निगम में आवेदन कर सकता है, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

Q4. इस नए रजिस्ट्रेशन का मृत्यु प्रमाण पत्र से क्या संबंध है?

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, यह रजिस्ट्रेशन केवल आंकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए है और इसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने या किसी अन्य वैधानिक कार्य से कोई सीधा संबंध नहीं होगा।

Q5. घाटों पर लकड़ियों के स्टॉक को लेकर क्या नया नियम बनाया गया है?

नए नियम के अनुसार, अंत्येष्टि के लिए रखी गई लकड़ियों का स्टॉक 10 दिनों से अधिक का नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य घाटों पर अतिक्रमण को रोकना और व्यवस्था बनाए रखना है।

External Source: www.etvbharat.com

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