छठ पूजा 2025: सुकमा में श्रद्धा और तैयारी का संगम
छठ महापर्व, सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पर्व, इस वर्ष 25 अक्टूबर 2025 से आरंभ होगा। सुकमा जिले में इस पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। शबरी नदी और उसके आसपास के घाटों पर श्रद्धालु सफाई और सजावट में जुटे हुए हैं ताकि पर्व के दौरान पूजा-अर्चना में कोई बाधा न आए।
🗓️ छठ पूजा 2025 की तिथियां और पूजा विधि
छठ पूजा चार दिवसीय पर्व है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन उषा अर्घ्य के साथ होता है। इस वर्ष छठ पूजा की प्रमुख तिथियां निम्नलिखित हैं:
- 25 अक्टूबर (शनिवार) – नहाय-खाय
- 26 अक्टूबर (रविवार) – खरना
- 27 अक्टूबर (सोमवार) – संध्या अर्घ्य (शाम 5:10 से 5:58 बजे तक)
- 28 अक्टूबर (मंगलवार) – प्रातः अर्घ्य (सुबह 5:33 से 6:30 बजे तक)
इस दौरान व्रती महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। मान्यता है कि छठी मैया, सूर्य देव की बहन हैं और उनकी पूजा से संतान की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि प्राप्त होती है।
🧹 घाटों पर सफाई और सजावट का कार्य जारी
सुकमा जिला मुख्यालय स्थित शबरी नदी घाट समेत तोंगपाल, पुसपाल, दोरनापाल, जगरगुंडा, चिंतलनार, कोंटा और गादीरास में श्रद्धालु घाटों की सफाई और सजावट में जुटे हैं। नगर पालिका और छठ पूजा समिति मिलकर घाटों को आकर्षक रूप देने में सक्रिय हैं।
- घाटों पर रंगीन टेंट लगाए जा रहे हैं
- लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है
- सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती की योजना
- श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और शौचालय की व्यवस्था
🔍 नगर पालिका अध्यक्ष का निरीक्षण दौरा
नगर पालिका अध्यक्ष हूंगाराम मरकाम ने गुरुवार को शबरी नदी घाट का दौरा किया और सफाई व लाइटिंग व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां समय पर पूरी हों ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
निरीक्षण के दौरान पार्षद शोभन गंदामी, राजेंद्र गुप्ता, उर्मिला मंडावी, रमेश कर्मा, माड़वी हुर्रा, अनिल सोड़ी, बुधराम मंडावी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
💡 लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान
छठ पूजा समिति के अनुसार, इस वर्ष भी घाटों पर विशेष लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। शाम के अर्घ्य के समय घाटों पर रोशनी की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे और पुलिस बल की तैनाती की जा रही है।
- घाटों पर LED लाइट्स की सजावट
- CCTV कैमरे की निगरानी
- महिला सुरक्षा के लिए विशेष दल
- मेडिकल टीम की तैनाती
🌞 छठ पूजा का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
छठ पूजा मुख्यतः बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन अब यह पर्व देशभर में लोकप्रिय हो चुका है। यह पर्व सूर्य देव की उपासना और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है।
- सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा
- छठी मैया की पूजा से संतान सुख की प्राप्ति
- जलाशयों में सामूहिक पूजा का आयोजन
- लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा का महत्व
🧭 सुकमा में छठ पूजा की बढ़ती लोकप्रियता
हाल के वर्षों में सुकमा जिले में छठ पूजा का आयोजन बड़े स्तर पर होने लगा है। स्थानीय प्रशासन और श्रद्धालु मिलकर पर्व को सफल बनाने में जुटे रहते हैं। घाटों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से यह पर्व अब सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है।
❓ FAQs
Q1. छठ पूजा 2025 कब से शुरू हो रही है?
25 अक्टूबर 2025 से नहाय-खाय के साथ छठ पूजा शुरू होगी।
Q2. सुकमा जिले में छठ पूजा कहां मनाई जाती है?
शबरी नदी घाट, तोंगपाल, पुसपाल, दोरनापाल, जगरगुंडा, चिंतलनार, कोंटा और गादीरास में।
Q3. छठ पूजा में कौन-कौन सी पूजा विधियां होती हैं?
नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य।
Q4. छठ पूजा में व्रत कितने घंटे का होता है?
व्रती महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।
🔚 निष्कर्ष
छठ महापर्व 2025 की तैयारी सुकमा जिले में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ की जा रही है। शबरी नदी घाटों पर सफाई, सजावट और सुरक्षा की व्यवस्था से यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए सुखद अनुभव बनने जा रहा है। सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का संदेश देता है।
External Source: Patrika Report
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