जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताज़ा घटनाओं में किश्तवाड़ और उधमपुर जिलों में चल रही मुठभेड़ों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इसके साथ ही पुंछ जिले में सेना और पुलिस के संयुक्त अभियान में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है।
भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने जानकारी दी कि किश्तवाड़ में 19 सितंबर 2025 की रात 8 बजे के करीब आतंकियों से मुठभेड़ हुई। यह कार्रवाई खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू की गई थी। सेना ने बताया कि आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलते ही इलाके को घेर लिया गया और इसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। ऑपरेशन अब भी जारी है।
🔴 पुंछ में हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद 💣
किश्तवाड़ और उधमपुर के ऑपरेशन के साथ ही पुंछ जिले में संयुक्त सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सेना और पुलिस को युद्ध जैसे सामान बरामद हुए।
बरामद हथियारों में शामिल हैं:
- एक एके सीरीज राइफल
- चार एके मैगजीन
- 20 हैंड ग्रेनेड
- बड़ी संख्या में गोलियां और युद्ध सामग्री
सेना ने बताया कि यह अभियान आतंकियों की सप्लाई लाइन को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है।
🟡 आतंकवाद के इकोसिस्टम पर वार 🔍
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को केवल हथियारों के जरिए ही नहीं, बल्कि ड्रग्स तस्करी और हवाला नेटवर्क से भी फंडिंग मिलती है।
🔑 सुरक्षाबलों की नई रणनीति
- आतंकियों और उनके सहयोगियों पर सीधा हमला।
- ड्रग्स माफिया और हवाला कारोबारियों की गिरफ्तारी।
- आतंकवाद की फंडिंग के स्रोतों को पूरी तरह खत्म करना।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ड्रग्स स्मगलिंग और हवाला नेटवर्क से जुटा पैसा सीधे आतंकवादी गतिविधियों में लगाया जाता है। यही वजह है कि अब सुरक्षाबलों ने आतंकवाद और ड्रग्स माफिया दोनों पर एक साथ शिकंजा कसना शुरू किया है।
🟠 एलओसी और सीमा सुरक्षा की स्थिति 🛡️
जम्मू-कश्मीर का भौगोलिक महत्व भी इस पूरी कार्रवाई को और संवेदनशील बनाता है।
- जम्मू, कठुआ और सांबा जिलों में 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) है।
- बारामूला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, पुंछ और राजौरी जिलों में 740 किलोमीटर लंबी एलओसी (LOC) है।
- अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा BSF करती है।
- एलओसी पर सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय सेना के पास है।
एलओसी के पार से अक्सर घुसपैठ की कोशिशें की जाती हैं, जिनमें आतंकियों को हथियार और ड्रग्स की सप्लाई भेजी जाती है। यही कारण है कि एलओसी पर सेना लगातार सर्च और डॉमिनेशन पेट्रोलिंग करती रहती है।
🟢 पिछले ऑपरेशनों का रिकॉर्ड 📜
पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर में कई बड़ी आतंकी साजिशों को नाकाम किया गया है।
- जुलाई 2025: राजौरी जिले में सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों को ढेर किया।
- अगस्त 2025: कुपवाड़ा में ड्रोन से आए हथियार और नकदी बरामद हुई।
- सितंबर 2025: पुलवामा में हाइब्रिड आतंकियों का मॉड्यूल ध्वस्त किया गया।
ये घटनाएं साफ करती हैं कि सुरक्षाबल केवल सक्रिय आतंकियों पर ही नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर फोकस कर रहे हैं।
🟣 अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण 🌍
जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही कार्रवाई पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी निगाहें हैं। कई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद-मुक्त होना बेहद ज़रूरी है।
External Source: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और सेना के बीच मुठभेड़ जारी, बड़ी तादाद में हथियार और गोला बारूद बरामद
📝 विश्लेषण: बदलती सुरक्षा रणनीति
भारत सरकार और सुरक्षाबलों ने अब “केवल प्रतिक्रिया” वाली नीति से आगे बढ़ते हुए “प्रो-एक्टिव स्ट्राइक” की रणनीति अपनाई है।
- आतंकियों की सप्लाई चेन को काटना।
- ड्रग्स और हवाला नेटवर्क पर कड़ा प्रहार।
- सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर तत्काल जवाब।
यह रणनीति न केवल मौजूदा खतरों को कम करती है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करती है।
❓अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: जम्मू-कश्मीर मुठभेड़
Q1. जम्मू-कश्मीर के किस इलाके में मुठभेड़ चल रही है?
👉 किश्तवाड़ और उधमपुर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है।
Q2. पुंछ जिले में क्या बरामद हुआ?
👉 सेना ने एके-47 राइफल, चार मैगजीन, 20 हैंड ग्रेनेड और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की।
Q3. सुरक्षाबलों की नई रणनीति क्या है?
👉 आतंकवादियों के साथ-साथ ड्रग्स माफिया और हवाला नेटवर्क पर भी कार्रवाई करना।
Q4. जम्मू-कश्मीर में एलओसी और IB की लंबाई कितनी है?
👉 IB लगभग 240 किमी और एलओसी करीब 740 किमी लंबी है।
Q5. आतंकवाद के खिलाफ ये अभियान कब तक चलेगा?
👉 सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, तब तक जब तक आतंकवाद का पूरा नेटवर्क समाप्त नहीं हो जाता।
📌 निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ और उधमपुर में जारी मुठभेड़ और पुंछ में हथियारों की बरामदगी यह साबित करती है कि सुरक्षाबल आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं। ड्रग्स और हवाला नेटवर्क को भी निशाने पर लिया जाना इस बात का संकेत है कि अब आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को तोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। आने वाले समय में यह रणनीति घाटी में शांति और स्थिरता बहाल करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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