जोधपुर बस हादसा: प्रमोशन के बाद लौटे जितेंद्र की मौत से उजड़ गया परिवार

हादसे की शुरुआत: एक सामान्य यात्रा बनी मौत की सवारी

राजस्थान के जोधपुर में हाल ही में हुए भीषण बस हादसे ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक एसी स्लीपर बस में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से झुलस गए।

इस हादसे में रामगढ़ पावर प्लांट में कार्यरत जितेंद्र चौहान की भी मृत्यु हो गई। वे मूल रूप से जोधपुर के प्रताप नगर के निवासी थे और वर्तमान में अपने परिवार के साथ नेहरू कॉलोनी, डाली बाई सर्कल के पास रह रहे थे।

🎖️ प्रमोशन के बाद नई शुरुआत, जो आखिरी बन गई

करीब तीन महीने पहले ही जितेंद्र को प्रमोशन मिला था और उनकी पोस्टिंग बाड़मेर से जैसलमेर कर दी गई थी। उन्होंने अपने परिवार को भी कुछ दिन पहले जैसलमेर बुलाया था। पत्नी नीतू चौहान और बच्चे—बेटा मानस और बेटी कियारा—भी उनके साथ रहने आए थे।

  • जितेंद्र दो दिन के लिए छुट्टी लेकर परिवार से मिलने आए थे।
  • परिवार के साथ बिताए ये दो दिन उनकी आखिरी मुलाकात साबित हुई।
  • ड्यूटी पर लौटते समय उन्होंने जिस बस में सफर किया, वही उनकी मौत का कारण बनी।

😢 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हादसे की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया। बेटा मानस और बेटी कियारा बार-बार मां से पूछते रहे—”पापा कब आएंगे?” लेकिन अब उनका यह सवाल हमेशा के लिए अधूरा रह गया।

पत्नी नीतू चौहान पति की यादों में डूबी लगातार रोती रहीं। रिश्तेदार और पड़ोसी भी इस दर्दनाक घटना से बेहद दुखी हैं।

🏥 शव घर पहुंचा तो मचा कोहराम

एम्स अस्पताल से जब जितेंद्र का शव उनके घर लाया गया, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया।

  • पत्नी शव देखते ही बार-बार बेहोश हो गईं।
  • छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।
  • अंतिम संस्कार के दौरान घर में चीख-पुकार मच गई और हर किसी की आंखें नम हो गईं।

📌 हादसे की जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बस में अवैध एसी मॉडिफिकेशन किया गया था, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई। राज्य सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है।

🔍 जांच के मुख्य बिंदु:

  1. बस में तकनीकी खामी और शॉर्ट सर्किट की वजह।
  2. एसी मॉडिफिकेशन की वैधता।
  3. बस ऑपरेटर की जिम्मेदारी।
  4. यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था।

🧒 बच्चों की मासूमियत और अधूरी उम्मीदें

“पापा कब आएंगे?”—यह सवाल जितेंद्र के बच्चों की मासूमियत और उनके अधूरे सपनों को दर्शाता है।

  • मानस और कियारा अभी इतने छोटे हैं कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि उनके पिता अब कभी नहीं लौटेंगे।
  • परिवार के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जीवनभर का खालीपन है।

🕯️ अंतिम विदाई: एक भावनात्मक दृश्य

जितेंद्र चौहान का अंतिम संस्कार उनके पैतृक स्थान पर किया गया।

  • सैकड़ों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
  • हर आंख नम थी और हर दिल दुखी।
  • जितेंद्र को उनके सहकर्मी एक मेहनती और ईमानदार कर्मचारी के रूप में याद कर रहे हैं।

📊 राजस्थान में सड़क हादसों की स्थिति

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में सड़क हादसों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।

  • 2024 में राज्य में कुल 10,000 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
  • इनमें से 30% हादसे बसों से जुड़े थे।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध मॉडिफिकेशन इसके प्रमुख कारण हैं।

❓ FAQs

Q1. जोधपुर बस हादसा कब हुआ था?

क्टूबर 2025 में जैसलमेर से जोधपुर जा रही बस में शॉर्ट सर्किट से आग लगने के कारण यह हादसा हुआ।

Q2. हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?

कम से कम 20 लोगों की मौत हुई और कई यात्री गंभीर रूप से झुलस गए।

Q3. जितेंद्र चौहान कौन थे?

जितेंद्र चौहान रामगढ़ पावर प्लांट में कार्यरत थे और हाल ही में प्रमोशन के बाद जैसलमेर में पोस्ट हुए थे।

Q4. हादसे की जांच कौन कर रहा है?

राज्य सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और तकनीकी खामियों की जांच की जा रही है।

🔚 निष्कर्ष

जोधपुर बस हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों की खुशियों का अंत था। जितेंद्र चौहान की मौत ने उनके बच्चों, पत्नी और पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। यह घटना प्रशासन और परिवहन विभाग के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है।

External Source: Patrika Report

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