दिल्ली की हवा में ज़हर! AQI 300 पार, कैंसर और लंग्स डिजीज का खतरा बढ़ा

📰 परिचय:

दिल्ली-NCR की हवा ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। AQI 300 के पार पहुंचने के साथ ही विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह प्रदूषण अब सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन रहा है।

🌫️ दिल्ली की हवा में ज़हर! | AQI 300+ का मतलब क्या है?

दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 300 के ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। शुक्रवार को अक्षरधाम में AQI 322 और आनंद विहार में 329 दर्ज किया गया। यह स्तर सांस लेने के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।

📌 AQI के स्तर और उनका प्रभाव:

AQI स्तरश्रेणीस्वास्थ्य प्रभाव
0–50अच्छाकोई असर नहीं
51–100संतोषजनकहल्की परेशानी
101–200मध्यमसंवेदनशील लोगों को असर
201–300खराबसांस की समस्या
301–400बहुत खराबगंभीर स्वास्थ्य खतरा
401–500गंभीरआपातकालीन स्थिति

🧬 प्रदूषण से कैसे बढ़ रहा है कैंसर का खतरा?

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार, अब नॉन-स्मोकर्स में भी फेफड़ों का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण है हवा में मौजूद सूक्ष्म कण जैसे:

  • PM2.5 और PM10: डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर कोशिकाएं सक्रिय करते हैं।
  • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂): फेफड़ों में सूजन और जलन पैदा करता है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित करता है।
  • सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂): श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।

👉 WHO ने PM2.5 को Group 1 Carcinogen घोषित किया है।

🫁 लंग्स पर कार्बन का कहर | 🚨 नॉन-स्मोकर्स भी खतरे में

दिल्ली की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड और डाइऑक्साइड का स्तर लगातार बढ़ रहा है। यह गैसें फेफड़ों में जाकर ऑक्सीजन लेवल को कम कर देती हैं, जिससे:

  • सांस लेने में तकलीफ
  • थकान और कमजोरी
  • फेफड़ों की कोशिकाओं का क्षय

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इस हवा में रहने से लंग्स की कार्यक्षमता घटती है और कैंसर का खतरा बढ़ता है।

👁️ आंखों पर प्रदूषण का सीधा असर | जलन से धुंधलापन तक

दिल्ली की जहरीली हवा सबसे पहले आंखों को प्रभावित करती है। आम लक्षणों में शामिल हैं:

  1. आंखों में जलन और खुजली
  2. धूल या रेत जैसा अहसास
  3. धुंधलापन और थकान
  4. आंखों का लाल होना और पानी गिरना
  5. सुबह आंखों में सूखापन

विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर आंखों की रोशनी पर असर डाल सकते हैं।

🧠 लिवर और स्किन पर भी असर | शरीर में घुस रहा ‘साइलेंट पॉइजन’

प्रदूषण के सूक्ष्म कण सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं हैं। ये शरीर के अन्य अंगों जैसे लिवर और स्किन तक पहुंचकर:

  • लिवर एंजाइम को प्रभावित करते हैं
  • स्किन एलर्जी और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं
  • हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं

🏥 डॉक्टरों की चेतावनी | बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर

Apollo Hospital के डॉ. राजेश चावला के अनुसार, अक्टूबर-नवंबर में AQI बढ़ने से बच्चों, बुजुर्गों और हार्ट/लंग्स के मरीजों में 15% तक केस बढ़ जाते हैं।

🚨 प्रमुख लक्षण:

  • गले में खराश
  • सिरदर्द और थकान
  • सांस लेने में दिक्कत
  • छाती में जकड़न

🛡️ प्रदूषण से बचाव के उपाय | कैसे करें खुद की सुरक्षा?

✅ बाहर निकलते समय:

  • N-95 मास्क पहनें
  • धूल और ट्रैफिक वाले इलाकों से बचें

✅ घर के अंदर:

  • एयर प्यूरीफायर लगाएं
  • मनीप्लांट, स्पाइडर प्लांट जैसे पौधे रखें
  • अगरबत्ती और कॉइल का उपयोग न करें

✅ डाइट में शामिल करें:

  • नींबू, आंवला, ग्रीन टी
  • एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल और सब्जियां
  • खूब पानी पिएं

📊 दिल्ली में प्रदूषण क्यों बढ़ रहा है? | कारणों की पड़ताल

  1. वाहनों की संख्या में वृद्धि
  2. निर्माण कार्यों से उड़ती धूल
  3. पराली जलाने की घटनाएं
  4. ठंड में हवा की गति धीमी होना
  5. उद्योगों से निकलता धुआं

❓अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: दिल्ली में AQI 300 से ऊपर क्यों खतरनाक है?

AQI 300+ का मतलब है ‘बहुत खराब’ हवा, जो फेफड़ों, आंखों और दिल पर गंभीर असर डाल सकती है।

Q2: क्या नॉन-स्मोकर्स को भी लंग्स कैंसर हो सकता है?

हां, विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण के कारण नॉन-स्मोकर्स में भी लंग्स कैंसर के केस बढ़ रहे हैं।

Q3: बच्चों को प्रदूषण से कैसे बचाएं?

बाहर कम निकालें, मास्क पहनाएं, घर में एयर प्यूरीफायर लगाएं और पौष्टिक आहार दें।

Q4: कौन से पौधे हवा को शुद्ध करते हैं?

मनीप्लांट, स्पाइडर प्लांट, एलोवेरा और स्नेक प्लांट हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं।

🔚 निष्कर्ष | दिल्ली की हवा बनी साइलेंट किलर

दिल्ली-NCR की हवा अब सिर्फ अस्थमा या एलर्जी का कारण नहीं रही। विशेषज्ञों की चेतावनी के अनुसार, यह हवा धीरे-धीरे शरीर के अंदर ज़हर बनकर घुस रही है, जिससे कैंसर, लंग्स डिजीज और आंखों की समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, मास्क पहनें और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाएं।

External Source: Patrika Report

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