नागौर में मौसम परिवर्तन के साथ ही वायरल बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर चिकनगुनिया और वायरल बुखार के मामलों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। जिला अस्पतालों की ओपीडी में रोज़ाना हजारों मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण इलाज में बाधाएं आ रही हैं।
🌡️ मौसमी बदलाव से बढ़ी बीमारियों की मार
हर साल अक्टूबर-नवंबर के महीने में नागौर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप देखा जाता है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर हैं। बारिश के बाद मच्छरों की संख्या में वृद्धि ने चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों को फैलने का मौका दिया है।
🔍 प्रमुख बीमारियाँ जो फैल रही हैं:
- वायरल बुखार
- सर्दी-जुकाम
- चिकनगुनिया
- डेंगू (संदिग्ध मामले)
- मलेरिया (संदिग्ध मामले)
🏥 अस्पतालों में हालात चिंताजनक
नागौर के जेएलएन चिकित्सालय और मदर एंड चाइल्ड विंग में मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि एक बेड पर दो से तीन मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। कई मरीज स्ट्रेचर या फर्श पर लेटे हुए इलाज का इंतजार कर रहे हैं।
📊 अस्पतालों की स्थिति:
- ओपीडी में रोज़ाना 1500–2000 मरीज
- 60% मरीज मौसमी बीमारियों से ग्रस्त
- बेड की भारी कमी
- जांच रिपोर्ट में देरी
- तीमारदारों की भीड़ से वार्डों में अव्यवस्था
😷 चिकनगुनिया का वैश्विक खतरा भी बढ़ा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 40 से अधिक देशों में चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं। भारत में हर साल औसतन 51 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं।
🦟 चिकनगुनिया कैसे फैलता है?
- एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से
- संक्रमित व्यक्ति के यात्रा करने से नए क्षेत्रों में फैलाव
- बारिश के बाद मच्छरों की संख्या में वृद्धि
🧪 जांच और रिपोर्टिंग में देरी से बढ़ रही परेशानी
मरीजों ने बताया कि अस्पतालों में जांच कराने में काफी समय लग रहा है और रिपोर्ट अगले दिन मिलती है। इस देरी के कारण बुखार और अन्य लक्षण गंभीर हो जाते हैं।
⏳ मरीजों की शिकायतें:
- रिपोर्ट मिलने में देरी
- डॉक्टरों से मिलने के लिए लंबी कतारें
- दवाओं की उपलब्धता में कमी
- वार्डों में भीड़ और अव्यवस्था
🛑 चिकित्सा विभाग की तैयारी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही स्थिति रहती है, लेकिन चिकित्सा विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठाता। बैठकों तक सीमित रहकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।
🗣️ शहरवासियों की मांगें:
- अतिरिक्त बेड की व्यवस्था
- जांच प्रक्रिया में तेजी
- मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव
- जनजागरूकता अभियान
👨⚕️ प्रशासन का पक्ष
जेएलएन चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. आर. के. अग्रवाल ने बताया कि मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है, लेकिन सभी को उचित उपचार दिया जा रहा है। मदर एंड चाइल्ड विंग में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जा रही है।
🧼 बचाव के उपाय और सुझाव
चिकनगुनिया और वायरल से बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। मच्छरों से बचाव और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा हथियार है।
✅ बचाव के लिए करें ये उपाय:
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें
- मच्छरदानी का प्रयोग करें
- पूरी बांह के कपड़े पहनें
- बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- सरकारी अस्पतालों में नियमित जांच कराएं
📚 FAQs
❓ चिकनगुनिया के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, थकान, और त्वचा पर चकत्ते इसके सामान्य लक्षण हैं।
❓ क्या चिकनगुनिया जानलेवा है?
यह आमतौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन बुजुर्गों और बच्चों में गंभीर रूप ले सकता है।
❓ चिकनगुनिया से बचाव कैसे करें?
मच्छरों से बचाव करें, साफ-सफाई रखें और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं।
❓ क्या नागौर में चिकनगुनिया के मामले पहले भी बढ़े हैं?
हां, हर साल अक्टूबर-नवंबर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप देखा जाता है।
🔚 निष्कर्ष
नागौर में वायरल और चिकनगुनिया का प्रकोप इस बार बेहद गंभीर रूप ले चुका है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और संसाधनों की कमी से इलाज प्रभावित हो रहा है। प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि स्थिति नियंत्रण में लाई जा सके।
External Source: Patrika Report
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