🔥 परिचय: परिहार सीट पर महिला शक्ति की परीक्षा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस बार यहां तीन महिला उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जिनमें से दो RJD से जुड़ी रही हैं और एक भाजपा की मौजूदा विधायक हैं।
🗳️ परिहार सीट: मां सीता की धरती पर सियासी संग्राम
सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा सीट ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह क्षेत्र माता सीता के जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है, और Punaruadham स्थित जानकी मंदिर के पास होने के कारण धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा है।
- यह सीट फिलहाल भाजपा विधायक गायत्री देवी के पास है।
- 2020 में उन्होंने RJD की रितु जायसवाल को लगभग 2000 वोटों से हराया था।
- इस बार वह हैट्रिक बनाने के इरादे से मैदान में हैं।
👩⚖️ तीन महिला उम्मीदवारों की टक्कर: कौन किस पर भारी?
1️⃣ गायत्री देवी (भाजपा)
- मौजूदा विधायक, दो बार जीत चुकी हैं।
- यादव समुदाय से आती हैं।
- दावा: “मेरे समर्थक यादव वोटर मुझे ही वोट देंगे।”
2️⃣ स्मिता गुप्ता (RJD)
- RJD के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे की बहू।
- वैश्य समुदाय से हैं।
- मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिलने की संभावना।
3️⃣ रितु जायसवाल (निर्दलीय)
- पूर्व RJD नेता, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकीं।
- टिकट न मिलने पर बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं।
- पिछली बार भाजपा से मामूली अंतर से हारी थीं।
🧠 पृष्ठभूमि और राजनीतिक समीकरण
📌 रितु जायसवाल की बगावत ने बदला समीकरण
रितु जायसवाल को RJD ने इस बार टिकट नहीं दिया, जिससे उन्होंने निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा—
“मेरे समर्थकों की मांग पर चुनाव लड़ रही हूं। पिछली बार उन्होंने मेरे लिए संघर्ष किया था, उसे मैं नहीं भूल सकती।”
📌 स्मिता गुप्ता की विरासत की लड़ाई
स्मिता अपने ससुर रामचंद्र पूर्वे की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। पूर्वे कई बार सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।
🧮 जातीय समीकरण और वोट बैंक
🧬 वैश्य बनाम यादव बनाम मुस्लिम वोटर
- स्मिता और रितु दोनों वैश्य समुदाय से हैं, जिनकी इस क्षेत्र में अच्छी खासी आबादी है।
- गायत्री देवी यादव समुदाय से हैं, जो परिहार में प्रभावशाली माने जाते हैं।
- मुस्लिम वोटर इस बार RJD की स्मिता के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं।
🗣️ स्थानीय मतदाता क्या सोचते हैं?
इंदरबा गांव के मोहम्मद जावेद ने कहा—
“अगर RJD ने रितु को टिकट दिया होता, तो वह आसानी से जीत जातीं।”
📉 प्रमुख मुद्दे: जनता क्या चाहती है?
परिहार क्षेत्र में चुनावी मुद्दे बेहद गंभीर हैं:
- 🚨 पलायन
- 💼 बेरोजगारी
- 🌊 बाढ़ से तबाही
- 🏥 स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- 🛣️ सड़क और आधारभूत ढांचे की जरूरत
🧾 नामांकन विवाद: गायत्री देवी पर आरोप
रितु जायसवाल ने भाजपा प्रत्याशी गायत्री देवी पर नामांकन एफिडेविट में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि—
- गायत्री देवी ने संपत्ति का गलत ब्यौरा दिया है।
- एक जगह 83 लाख और दूसरी जगह 59 लाख की संपत्ति दिखाई गई।
इस विवाद ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।
🧭 चुनावी रणनीति और प्रचार
- भाजपा और RJD दोनों ने हाई-प्रोफाइल प्रचार अभियान चलाए हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सीतामढ़ी में रैलियां कीं।
- RJD की ओर से तेजस्वी यादव ने स्मिता के समर्थन में प्रचार किया।
📊 संभावित परिणाम: किसकी जीत तय?
📌 विश्लेषण:
- रितु की बगावत ने RJD के वोट बैंक को दो हिस्सों में बांट दिया है।
- गायत्री देवी को यादव वोटरों का समर्थन मिल सकता है।
- मुस्लिम वोटर स्मिता के पक्ष में जा सकते हैं।
📌 संभावित परिदृश्य:
- गायत्री देवी को फायदा अगर विपक्ष बंटा रहा।
- स्मिता गुप्ता को जीत मिल सकती है अगर मुस्लिम और वैश्य वोट एकजुट हों।
- रितु जायसवाल को जीत तभी संभव है जब वैश्य वोट पूरी तरह उनके पक्ष में जाएं।
❓ FAQs
Q1. परिहार विधानसभा सीट पर मुख्य उम्मीदवार कौन हैं?
A1. भाजपा की गायत्री देवी, RJD की स्मिता गुप्ता और निर्दलीय रितु जायसवाल।
Q2. रितु जायसवाल ने निर्दलीय चुनाव क्यों लड़ रही हैं?
A2. RJD से टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
Q3. परिहार सीट पर प्रमुख चुनावी मुद्दे क्या हैं?
A3. पलायन, बेरोजगारी, बाढ़, स्वास्थ्य सेवाएं और आधारभूत ढांचा।
Q4. गायत्री देवी पर क्या आरोप लगे हैं?
A4. रितु जायसवाल ने उनके नामांकन एफिडेविट में संपत्ति विवरण को लेकर गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
Q5. मुस्लिम वोटर किसके पक्ष में हैं?
A5. ज्यादातर मुस्लिम वोटर RJD की स्मिता गुप्ता के पक्ष में हैं।
🧾 निष्कर्ष: परिहार में महिला शक्ति की असली परीक्षा
परिहार विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव महिला नेतृत्व, जातीय समीकरण और बगावत की राजनीति का अनोखा मिश्रण है। तीन प्रभावशाली महिला उम्मीदवारों के बीच यह मुकाबला न सिर्फ स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य स्तर पर भी महिला सशक्तिकरण की दिशा तय कर सकता है।
External Source: Patrika Report
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