भैयादूज पर भरतपुर में हुआ भावनात्मक चमत्कार
भैयादूज के शुभ अवसर पर भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ में एक ऐसा भावनात्मक दृश्य सामने आया जिसने हर किसी को भावविभोर कर दिया। तीन साल से लापता और मृत समझी जा चुकी महिला अपने भाई से पुनः मिली, जिससे दीपावली की खुशियां दोगुनी हो गईं।
🏠 ‘अपना घर आश्रम’ बना पुनर्मिलन का साक्षी
भरतपुर स्थित ‘अपना घर आश्रम’ ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। यहां मानसिक रूप से अस्थिर और लापता लोगों को चिकित्सा, देखभाल और पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। इस बार आश्रम ने आंध्र प्रदेश की एक महिला को उसके परिवार से मिलाकर एक चमत्कारी कहानी को जन्म दिया।
- आश्रम की स्थापना मानव सेवा के उद्देश्य से हुई थी।
- यहां देशभर से लापता और असहाय लोगों को लाया जाता है।
- पुनर्वास टीम परिवार से संपर्क कर पुनर्मिलन सुनिश्चित करती है।
🧠 मानसिक अस्थिरता बनी लापता होने की वजह
📍 सीमा उर्फ गुवल्ला सुबम्मा की कहानी
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के महासमुद्रम गांव की रहने वाली सीमा मानसिक रूप से कमजोर थीं। तीन साल पहले वह अचानक घर से गायब हो गईं। परिवार ने मंदिरों, शहरों और आस-पास के इलाकों में खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
- परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
- कई मंदिरों और शहरों में तलाश की गई।
- अंततः उन्हें मृत मान लिया गया।
🕯️ त्योहारों की खुशियां हुईं गायब
सीमा के लापता होने के बाद उनके घर में त्योहारों की रौनक खत्म हो गई थी। दीपावली, होली और रक्षाबंधन जैसे पर्वों पर परिवार की आंखें नम रहती थीं।
🏥 जोधपुर से भरतपुर तक: पुनर्वास की यात्रा
📅 24 मार्च 2024: सीमा को लाया गया ‘अपना घर आश्रम’
सीमा को जोधपुर से भरतपुर स्थित आश्रम में लाया गया। यहां उन्हें चिकित्सा और देखभाल के लिए भर्ती किया गया। महीनों की सेवा, स्नेह और उपचार के बाद उनका मानसिक स्वास्थ्य सुधरने लगा।
- आश्रम में उन्हें भोजन, दवा और मनोवैज्ञानिक सहायता दी गई।
- धीरे-धीरे उन्होंने अपने गांव और परिवार का नाम बताया।
- पुनर्वास टीम ने तुरंत तिरुपति के ग्राम प्रधान से संपर्क किया।
🎉 भैयादूज पर हुआ भावनात्मक पुनर्मिलन
👨👧 भाई पैद्दा पोलईया की आंखें भर आईं
दीपावली के दिन जब पैद्दा पोलईया को पता चला कि उनकी बहन जीवित है, तो उनकी आंखें खुशी से भर आईं। अगले ही दिन, यानी भैयादूज पर वे भरतपुर पहुंचे।
🤗 भाई-बहन की मुलाकात
जैसे ही सीमा ने अपने भाई को देखा, दोनों की आंखों से आंसू बह निकले। वे एक-दूसरे से लिपटकर देर तक रोते रहे। वहां मौजूद हर व्यक्ति उस क्षण में भावविभोर हो उठा।
- बहन ने भाई को रोली से तिलक किया।
- मिठाई खिलाई और कहा, “अब मैं कहीं नहीं जाऊंगी भाई।”
- आश्रम परिसर तालियों और भावनाओं से गूंज उठा।
👨👩👧👦 परिवार की वापसी: अब सीमा रहेंगी अपने बच्चों के साथ
भाई पैद्दा पोलईया ने बताया कि सीमा के तीन बच्चे हैं—दो बेटियां और एक बेटा। अब वह अपने परिवार के साथ रहेंगी और सामान्य जीवन जी सकेंगी।
🛡️ आश्रम ने सौंपा परिवार को
‘अपना घर आश्रम’ के सचिव बसंतलाल गुप्ता ने बताया कि सीमा की पुनर्वास प्रक्रिया पूरी कर उन्हें सुरक्षित उनके परिवार को सौंप दिया गया है।
📌 पुनर्मिलन की कहानियां: भरतपुर आश्रम की मिसालें
🧓 17 साल बाद लौटी मां
एक अन्य मामले में 17 साल पहले लापता हुई रजनी देवी को भी आश्रम ने उनके परिवार से मिलाया था।
👵 24 साल बाद बेटे से मिली मां
भरतपुर आश्रम ने 24 साल पहले बिछड़ी एक महिला को उनके बेटे से मिलवाकर इंसानियत की मिसाल कायम की।
❓FAQs
प्रश्न 1: सीमा कितने वर्षों से लापता थीं?
उत्तर: सीमा तीन वर्षों से लापता थीं और परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था।
प्रश्न 2: सीमा को कहां पाया गया?
उत्तर: उन्हें जोधपुर से भरतपुर स्थित ‘अपना घर आश्रम’ में लाया गया था।
प्रश्न 3: क्या सीमा अब अपने परिवार के साथ रहेंगी?
उत्तर: हां, पुनर्वास प्रक्रिया के बाद उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया गया है।
प्रश्न 4: ‘अपना घर आश्रम’ क्या है?
उत्तर: यह एक पुनर्वास केंद्र है जहां मानसिक रूप से अस्थिर और लापता लोगों को चिकित्सा और देखभाल दी जाती है।
🔚 निष्कर्ष: मानवता की जीत और आशा की कहानी
भैयादूज पर हुआ यह पुनर्मिलन सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि मानवता की जीत है। ‘अपना घर आश्रम’ ने एक बार फिर साबित किया कि सेवा, स्नेह और समर्पण से चमत्कार संभव हैं। सीमा की कहानी उन हजारों परिवारों के लिए आशा की किरण है जो अपने प्रियजनों की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
External Source: Patrika Report
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