उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान को अब तेज़ गति दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि SIR कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह अभियान न केवल मतदाताओं को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें की गई एक गंभीर चूक आवेदक को सीधे जेल भी पहुंचा सकती है, जिसके लिए एक वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है।
🛑 SIR कार्यों में ज़ीरो टॉलरेंस: अधिकारियों पर पैनी नज़र
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने हाल ही में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से अभियान की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और CEO कार्यालय, लखनऊ द्वारा SIR में लगे प्रत्येक कार्मिक की सतत निगरानी की जा रही है।
जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन
सीईओ रिणवा ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ज़िम्मेदारी पूरी निष्ठा और लगन से निभाने की ताकीद की। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब आगामी चुनावों की तैयारियों के मद्देनज़र मतदाता सूची का त्रुटिहीन और अद्यतन होना बेहद आवश्यक है।
- सतत निगरानी: ECI और CEO कार्यालय द्वारा SIR कार्यों में लगे कर्मियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
- शिथिलता पर कार्रवाई: कार्य में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- निष्पक्षता और लगन: हर अधिकारी को अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाने के निर्देश।
⚖️ SIR फॉर्म भरने में ‘यह’ गलती पहुंचा सकती है जेल: कानूनी प्रावधान
SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक योग्य नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करना और डुप्लीकेट/अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि, सीईओ नवदीप रिणवा ने एक अत्यंत गंभीर कानूनी चेतावनी जारी की है, जिसका उल्लंघन करने पर सीधे जेल हो सकती है। यह चेतावनी मतदाता पंजीकरण नियमों की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए दी गई है।
📌 दोहरा पंजीकरण: ‘एक वोटर, एक फॉर्म’ सिद्धांत का उल्लंघन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि:
“अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक ही व्यक्ति के नाम से दो बार (या अधिक) SIR फॉर्म भरता है, तो ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी और उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।”
यह कार्य लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के तहत एक दंडात्मक अपराध है।
1️⃣ एक वर्ष तक की कारावास
श्री रिणवा ने बताया कि दोहरा पंजीकरण करने वाले व्यक्ति को जाँच के बाद दोषी पाए जाने पर:
- एक वर्ष तक की सज़ा (कारावास) हो सकती है।
- इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
यह प्रावधान मतदाता सूची की पवित्रता और एक नागरिक, एक वोट के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए बेहद कठोरता से लागू किया जा रहा है। इसका तात्पर्य यह है कि SIR फॉर्म भरते समय अत्यधिक सावधानी बरतना अनिवार्य है, ताकि अनजाने में भी कोई गलती न हो जाए जो कानूनी पचड़े में डाल दे।
📝 SIR प्रक्रिया को समझना: फॉर्म भरने के सही तरीके
SIR अभियान की सफलता सीधे तौर पर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) और मतदाताओं द्वारा सही फॉर्म भरने पर निर्भर करती है। सीईओ ने फॉर्म भरने के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देश भी साझा किए हैं।
👨👩👧👦 घर-घर सर्वे और BLAs की भूमिका
इस अभियान को गति देने के लिए, राजनीतिक दलों ने प्रदेश भर में 3.99 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLAs) नियुक्त किए हैं, जबकि राज्य में लगभग 3 लाख मतदान केंद्र (बूथ) हैं।
- BLOs का कार्य: BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र (Forms) वितरित कर रहे हैं और उन्हें सही तरीके से भरने का मार्गदर्शन भी दे रहे हैं।
- BLA सहयोग: BLAs को BLOs के साथ समन्वय स्थापित कर शत-प्रतिशत मतदाता कवरेज सुनिश्चित करने को कहा गया है।
फॉर्म भरने के लिए विशिष्ट निर्देश
मतदाताओं को अपनी स्थिति के अनुसार फॉर्म के विभिन्न कॉलम को सही तरीके से भरना होगा:
➡️ नए मतदाता (जिनका नाम 2003 की सूची में नहीं है):
- वे मतदाता जो पहली बार या जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें फॉर्म के ऊपरी कॉलम में विवरण भरना होगा।
- इसमें अपनी फोटो, नाम, माता-पिता/पति का नाम, और यदि उपलब्ध हो तो EPIC (Elector’s Photo Identity Card) नंबर भरना होगा।
➡️ पुराने मतदाता (जिनका नाम 2003 की सूची में है):
- जिन मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में पहले से है, उन्हें नीचे वाले कॉलम में वही विवरण भरना होगा जो 2003 की सूची में दर्ज है (कोई बदलाव न करें)।
- यदि परिवार के किसी अन्य सदस्य का नाम 2003 की सूची में नहीं है, तो उन्हें भी निर्धारित कॉलम भरने के बाद हस्ताक्षर करना अनिवार्य है।
➡️ नए वोटरों का पंजीकरण (फॉर्म-6):
- जो युवा पहली बार 2027 के चुनावों के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण करना चाहते हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
☎️ मतदाता सुविधा और शिकायत निवारण तंत्र
अभियान के दौरान मतदाताओं को होने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया गया है। सीईओ नवदीप रिणवा ने राजनीतिक दलों से प्राप्त शिकायतों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतों पर तत्परता
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, चुनाव आयोग ने दो-स्तरीय सुविधा केंद्र स्थापित किए हैं:
- जिला स्तर: प्रत्येक जिले में एक कॉल सेंटर स्थापित किया गया है।
- राज्य स्तर: लखनऊ मुख्यालय में एक केंद्रीय सुविधा केंद्र स्थापित किया गया है।
टोल फ्री हेल्पलाइन (1950)
मतदाता किसी भी समस्या या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1950 पर अपने जिले का कोड डालकर संपर्क कर सकते हैं। यह केंद्र SIR से संबंधित प्रश्न, शिकायतें और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय है।
💯 शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करना
सीईओ ने SIR प्रपत्रों के वितरण और संग्रहण की स्थिति की भी समीक्षा की और महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी, लेकिन कवरेज को 100% तक ले जाने के निर्देश दिए।
प्रपत्र वितरण की स्थिति
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अब तक 99.57% मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं।
- तत्काल उपलब्धता: जिन अति-संवेदनशील या दुर्गम क्षेत्रों में BLOs प्रपत्र नहीं पहुंचा पाए हैं, वहाँ तत्काल प्रपत्र उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
- जिलाधिकारी की भूमिका: सभी जिलाधिकारियों (DMs) को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी योग्य मतदाता तक फॉर्म पहुंचने में किसी भी प्रकार की देरी न हो।
सहायता डेस्क और जागरूकता
मतदाताओं को आसानी से फॉर्म भरने में मदद करने के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- हेल्प डेस्क स्थान:
- जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय
- नगर निगम/नगर पालिका कार्यालय
- विकासखंड कार्यालय
- उपलब्ध सुविधाएँ: इन केंद्रों पर मतदाताओं को सहायता, फॉर्म भरने की जानकारी, और अन्य समस्याओं का समाधान उपलब्ध होगा।
- जागरूकता अभियान: सभी जिलों को गणना प्रपत्र भरने से संबंधित वीडियो बनाकर मीडिया और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर जारी करने का भी निर्देश दिया गया है।
💻 तकनीकी प्रगति: BLO App और ऑनलाइन सुविधा
SIR अभियान को डिजिटल बनाने और रियल-टाइम डेटा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी समाधान पर भी जोर दिया गया है।
BLOs के लिए एडवांस ऐप
सभी BLOs को BLO App का एडवांस वर्जन 8.78 तत्काल डाउनलोड करने का निर्देश दिया गया है।
- रियल-टाइम डिजिटाइजेशन: इस ऐप का उपयोग करके फॉर्म की रियल-टाइम डिजिटाइजेशन (डिजिटल रिकॉर्डिंग) सुनिश्चित की जानी है, जिससे डेटा एंट्री की त्रुटियां कम होंगी और कार्य की गति बढ़ेगी।
- डेटा शुद्धता: यह सुनिश्चित करना है कि एकत्रित डेटा शुद्ध, सटीक और अप-टू-डेट हो।
ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा
मतदाताओं को सुविधा प्रदान करने के लिए, उन्हें ऑनलाइन माध्यम से भी फॉर्म भरने का विकल्प दिया गया है:
- वेबसाइट: मतदाता स्वयं voters.eci.gov.in पर जाकर अपना गणना प्रपत्र ऑनलाइन भी भर सकते हैं।
- डिजिटल पहुँच: यह सुविधा उन मतदाताओं के लिए विशेष रूप से सहायक है जो डिजिटल रूप से साक्षर हैं और स्वयं ही प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं।
⚠️ सोशल मीडिया और भ्रामक पोस्ट पर सख्ती
SIR अभियान के दौरान सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भ्रामक जानकारियों को लेकर भी सीईओ ने कड़ी चेतावनी जारी की है।
तथ्य आधारित स्पष्टीकरण की अनिवार्यता
सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि:
- तत्काल संज्ञान: SIR से जुड़ी किसी भी भ्रामक, नकारात्मक या गलत सोशल मीडिया पोस्ट का तत्काल संज्ञान लिया जाए।
- तथ्यात्मक उत्तर: ऐसी पोस्ट का तुरंत और सार्वजनिक रूप से तथ्य आधारित स्पष्टीकरण जारी किया जाए, ताकि मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
- चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता: यह कदम चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलों को निर्धारित समयसीमा के भीतर हर हाल में SIR कार्य को पूर्ण करने की अंतिम चेतावनी दी है।
📊 एक विस्तृत विश्लेषण: मतदाता सूची का महत्व और कानूनी निहितार्थ
मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आधार स्तंभ होती है। SIR अभियान सिर्फ नाम जोड़ने या हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला रखता है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का संदर्भ
वह प्रावधान जिसके तहत दोहरा पंजीकरण करने पर सज़ा का प्रावधान है, वह भारतीय कानूनी ढांचे के तहत आता है।
- धारा 31 (Section 31): “झूठे घोषणा पत्र (False declarations)” से संबंधित है। यह धारा जानबूझकर या दुर्भावना से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए गलत बयान या झूठी जानकारी देने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करती है।
- धारा 17 (Section 17): “किसी भी व्यक्ति का एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत नहीं होना” सुनिश्चित करती है।
कानूनी रूप से यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक नागरिक को केवल एक वोट का अधिकार मिले, और वह अधिकार किसी भी तरह से भ्रष्ट न हो। SIR फॉर्म भरते समय डुप्लीकेट एंट्री करना या जानबूझकर गलत जानकारी देना, इस कानून का सीधा उल्लंघन है, जिसके परिणामस्वरूप एक वर्ष तक की जेल और/या जुर्माना हो सकता है।
जनसांख्यिकीय और चुनावी प्रभाव
उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। यहाँ की मतदाता सूची में छोटी सी त्रुटि भी चुनाव परिणामों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है।
- उच्च घनत्व: इतनी बड़ी आबादी के कारण, डुप्लीकेट एंट्री (दोहरा पंजीकरण) की संभावना अधिक होती है, जिससे बचने के लिए तकनीकी और मानवीय निगरानी दोनों महत्वपूर्ण हैं।
- ब्लैक मनी का खतरा: अतीत में, नकली या दोहराई गई वोटर आईडी का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जाता रहा है। सीईओ की यह सख्ती स्वच्छ चुनावी प्रक्रिया की दिशा में एक कड़ा कदम है।
ई-गवर्नेंस की ओर कदम
BLOs को एडवांस वर्जन 8.78 ऐप डाउनलोड करने का निर्देश, चुनाव आयोग के ई-गवर्नेंस की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
- दक्षता: ऐप के माध्यम से डेटा का रियल-टाइम डिजिटाइजेशन होता है, जिससे मैनुअल एरर कम होते हैं और प्रसंस्करण समय बचता है।
- पारदर्शिता: ऑनलाइन ट्रैकिंग और मतदाता सुविधा पोर्टल पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
- प्रशिक्षण का महत्व: BLOs के लिए इस नई तकनीक का उपयोग करने हेतु व्यापक प्रशिक्षण आवश्यक है, ताकि जमीनी स्तर पर कोई तकनीकी बाधा न आए।
🤝 निष्कर्ष: त्रुटिरहित सूची और निष्पक्ष चुनाव की तैयारी
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा दिए गए कड़े निर्देश, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान की गंभीरता और महत्व को रेखांकित करते हैं। यह अभियान केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। दोहरा पंजीकरण करने पर एक साल की सज़ा की चेतावनी यह दर्शाती है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। अधिकारियों को निष्क्रियता पर कार्रवाई और समय सीमा में काम पूरा करने का आदेश देना, आगामी चुनावों के लिए त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने की तत्परता को साबित करता है। सभी मतदाताओं और अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि हर फॉर्म सही भरा जाए और प्रत्येक नागरिक का एक ही और सही वोट सूची में दर्ज हो।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.
Q1. SIR फॉर्म भरने में कौन सी गलती करने पर जेल हो सकती है?
A1. यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक ही वोटर के नाम से दो बार (या एक से अधिक बार) SIR फॉर्म भरता है, तो इसे दोहरा पंजीकरण माना जाएगा। यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन है और इसके लिए एक वर्ष तक की सज़ा (कारावास) हो सकती है।
Q2. नए मतदाता अपना पंजीकरण किस फॉर्म से कर सकते हैं?
A2. नए मतदाता, विशेषकर वे युवा जो आगामी चुनावों के लिए पहली बार पंजीकरण कराना चाहते हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
Q3. SIR अभियान से जुड़ी समस्याओं के लिए किस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है?
A3. मतदाता SIR अभियान से जुड़ी किसी भी समस्या, जानकारी या शिकायत के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950 पर अपने जिले का कोड डालकर संपर्क कर सकते हैं। लखनऊ मुख्यालय में भी एक केंद्रीय सुविधा केंद्र स्थापित किया गया है।
Q4. क्या मतदाता SIR फॉर्म ऑनलाइन भी भर सकते हैं?
A4. हाँ, मतदाता चाहें तो भारतीय निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर भी अपना गणना प्रपत्र ऑनलाइन भर सकते हैं।
Q5. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में क्या निर्देश दिए हैं?
A5. सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि SIR से जुड़ी किसी भी भ्रामक या नकारात्मक सोशल मीडिया पोस्ट का तत्काल संज्ञान लें और तथ्य आधारित स्पष्टीकरण जारी करें ताकि मतदाताओं में भ्रम न फैले।
External Source: etvbharat.com
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