महाडील पर दुनिया की नज़र! पुतिन 28 घंटे भारत में, मोदी के साथ बड़े समझौते से बढ़ेगा भारत-रूस का दबदबा

🇮🇳🤝🇷🇺 भारत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का 28 घंटे का अहम दौरा आज से शुरू

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज, गुरुवार 4 दिसंबर, से अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँच रहे हैं। यह दौरा 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी के इर्द-गिर्द केंद्रित है और इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को गहरा करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुतिन की इस छोटी, लेकिन गहन, यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देगी, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक मंच पर भी इसका गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है।


🕰️ कार्यक्रम की रूपरेखा: 28 घंटों का एजेंडा

सूत्रों के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है, जिसमें रूसी सरकार के प्रमुख मंत्री और शीर्ष व्यापारिक नेता शामिल हैं। यह उनकी यात्रा को व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग पर केंद्रित करता है।

🌃 गुरुवार शाम: निजी रात्रिभोज और रणनीतिक अनौपचारिक बातचीत

गुरुवार शाम करीब 4:30 बजे नई दिल्ली पहुँचने के बाद, रूसी राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके कुछ ही घंटों बाद, प्रधानमंत्री मोदी उनके सम्मान में एक निजी रात्रिभोज का आयोजन करेंगे।

यह अनौपचारिक रात्रिभोज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों नेताओं को औपचारिक शिखर सम्मेलन की बैठकों से पहले, पूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक आरामदेह माहौल में विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका के रिश्तों में पिछले दो दशकों में संभवतः सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ के कारण, जिसमें रूसी कच्चे तेल पर 25% का भारी शुल्क भी शामिल है।

🗓️ शुक्रवार का मुख्य फोकस: शिखर सम्मेलन और समझौते

अगले दिन, शुक्रवार को, 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन का आधिकारिक एजेंडा शुरू होगा। इससे पहले, राष्ट्रपति पुतिन राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद, शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच विस्तृत बातचीत होगी, जिसका मुख्य फोकस निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:

  1. रक्षा संबंधों को और गहरा करना: दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने की योजना।
  2. व्यापार को बाहरी दबाव से बचाना: पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और अमेरिकी टैरिफ से भारत-रूस के व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए तंत्र विकसित करना।
  3. छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) में सहयोग: ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं की तलाश, विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा के छोटे प्रारूपों पर।
  4. यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा: रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका द्वारा इसे समाप्त करने के लिए किए जा रहे नए प्रयासों पर पुतिन द्वारा मोदी को जानकारी देना।

👋🏻 शुक्रवार रात: विदाई और नए चैनल का शुभारंभ

शिखर सम्मेलन के बाद, राष्ट्रपति पुतिन रूस के सरकारी ब्रॉडकास्टर के नए इंडिया चैनल का औपचारिक रूप से उद्घाटन करेंगे। इसके बाद, वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित भोज में शामिल होंगे। रूसी नेता के शुक्रवार रात लगभग 9:30 बजे भारत से रवाना होने की उम्मीद है, जिससे उनका लगभग 28 घंटे का गहन दौरा समाप्त हो जाएगा।


🛡️ रक्षा सहयोग: S-400 पर अमेरिका की चेतावनी और भारत का रुख

भारत-रूस संबंधों का आधार स्तंभ हमेशा से रक्षा सहयोग रहा है। शिखर सम्मेलन से पहले, दोनों देशों के रक्षा मंत्री गुरुवार को बातचीत करेंगे, जिसमें रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद की भारत की योजना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

🚀 S-400 मिसाइल प्रणाली का महत्व

  • डील: भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की पाँच यूनिट खरीदने के लिए 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का समझौता किया था।
  • उपयोगिता: शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान S-400 मिसाइल सिस्टम की ‘अत्यंत प्रभावशीलता’ की प्रशंसा की है।
  • फोकस: वर्तमान बैठकों का मुख्य ध्यान रूस से भारत को रक्षा उपकरणों की तेजी से और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है, ताकि भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

⚠️ CAATSA के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा

यह समझौता तब किया गया था जब अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस अनुबंध पर आगे बढ़ने पर भारत पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। भारत ने, हालांकि, अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए, अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इस खरीद को जारी रखा है।

भारत का यह रुख स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह अपनी रक्षा जरूरतों के लिए किसी भी तीसरे देश के दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। यह यात्रा इस बात पर भी चर्चा करेगी कि दोनों देश भुगतान तंत्र और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को कैसे मजबूत कर सकते हैं ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो।


⛽ ऊर्जा और व्यापार: कच्चे तेल पर अमेरिकी टैरिफ का असर

शिखर सम्मेलन में चर्चा का एक और महत्वपूर्ण विषय कच्चा तेल और व्यापार होगा, खासकर जब भारत रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार है।

📉 अमेरिकी टैरिफ का दबाव

वर्तमान समय में, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% का भारी टैरिफ लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25% टैक्स भी शामिल है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय दबाव डालता है।

शिखर सम्मेलन में इस बात पर चर्चा होने की संभावना है कि कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों का भारत-रूस व्यापार पर क्या असर हो रहा है।

📈 व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने हाल ही में कहा था कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद ‘कुछ समय’ के लिए भले ही कम हो सकती है, लेकिन मॉस्को आपूर्ति बढ़ाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिनमें से एक डिफेंस कोऑपरेशन के बड़े फ्रेमवर्क के तहत लॉजिस्टिक सपोर्ट पर केंद्रित होगा। इसके अलावा, व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए भारत की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से, रूस को भारतीय निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है।

जिन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने की संभावना है, वे हैं:

  • फार्मास्यूटिकल्स (दवाएँ)
  • एग्रीकल्चर (कृषि उत्पाद)
  • फूड प्रोडक्ट्स (खाद्य उत्पाद)
  • कंज्यूमर गुड्स (उपभोक्ता वस्तुएँ)

यह कदम रूस के पक्ष में बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने और भारत के लिए अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार खोलने में सहायक होगा।


🌐 वैश्विक भू-राजनीति और यूक्रेन संघर्ष

यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की नई कूटनीतिक कोशिशों के बीच रूसी नेता की भारत यात्रा हो रही है, इसलिए शिखर सम्मेलन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठने की उम्मीद है।

🕊️ भारत का तटस्थ रुख

यूक्रेन और रूस के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को लेकर भारत ने लगातार यही रुख अपनाया है कि बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। भारत ने हमेशा संघर्ष विराम का आह्वान किया है और मानवीय सहायता प्रदान की है।

उम्मीद है कि पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन विवाद को समाप्त करने के लिए अमेरिका के नवीनतम प्रयासों और रूस की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे। भारत की मध्यस्थता की क्षमता और दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंधों को देखते हुए, भारत एक संभावित शांति दूत की भूमिका निभा सकता है।

🚧 प्रतिबंधों से निपटने की रणनीति

रूस पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में, रूस के लिए भारत जैसे एक बड़े और विश्वसनीय आर्थिक भागीदार के साथ संबंधों को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और रूस इस बात पर सहयोग करेंगे कि वे अपने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को अमेरिकी डॉलर से बाहर के तंत्र, जैसे कि राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया और रूबल) में व्यापार, के माध्यम से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।


📝 अन्य महत्वपूर्ण समझौते और सहयोग के क्षेत्र

द्विपक्षीय वार्ता के बाद, दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों और अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुँचाना है।

1. लोगों के आवागमन को आसान बनाना

एक समझौते का फोकस भारतीय कामगारों के रूस आने-जाने को आसान बनाने पर होगा। यह समझौता भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों के लिए रूस में काम करने और बसने के अवसरों को खोलेगा, जिससे दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।

2. छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) में सहयोग

ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए, दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) में सहयोग की संभावनाएँ तलाशेंगे। SMR पारंपरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की तुलना में छोटे, लागत प्रभावी और सुरक्षित होते हैं, जो दूरदराज के क्षेत्रों को बिजली प्रदान करने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। इस क्षेत्र में रूस की विशेषज्ञता का लाभ भारत उठा सकता है।


🇮🇳🇺🇸 भारत-अमेरिका संबंध: तनाव और रूसी कारक

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-अमेरिका संबंध एक तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और व्यापार युद्ध की धमकी ने नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच विश्वास को कम किया है।

⚖️ संतुलन की कूटनीति

भारत हमेशा से गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता की नीति का पालन करता रहा है। रूस के साथ अपने ऐतिहासिक और मजबूत संबंधों को बनाए रखना, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में, भारत की इस नीति का प्रमाण है।

  • भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भरता जारी रखता है।
  • यह अमेरिका को एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा, भले ही इससे CAATSA प्रतिबंधों का खतरा उत्पन्न हो।

पुतिन की यात्रा इस बात पर ज़ोर देती है कि वैश्विक ध्रुवीकरण के बावजूद, भारत बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में विश्वास रखता है और अपने हितों के लिए विभिन्न शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने में सक्षम है।


💡 निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का 28 घंटे का भारत दौरा केवल एक वार्षिक शिखर सम्मेलन नहीं है, बल्कि यह भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के एक नए और अधिक लचीले युग की शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली यह ‘महाडील’ न केवल दोनों देशों के बीच रक्षा और व्यापार संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगी, बल्कि उन्हें बाहरी दबावों से भी बचाएगी। कच्चे तेल पर अमेरिकी टैरिफ, S-400 पर CAATSA का खतरा, और यूक्रेन संघर्ष—इन सभी वैश्विक चुनौतियों के बीच, यह शिखर सम्मेलन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस के साथ अटूट दोस्ती को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये दो प्रमुख शक्तियाँ मिलकर वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को कैसे नया आकार देती हैं।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.

1. भारत में पुतिन की यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होना है। इस दौरान, दोनों नेता द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को गहरा करने के लिए रक्षा सहयोग, व्यापार, ऊर्जा (SMR), और वैश्विक मुद्दों (जैसे यूक्रेन संघर्ष) पर चर्चा करेंगे और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे।

2. S-400 मिसाइल प्रणाली समझौते पर अमेरिकी प्रतिबंधों (CAATSA) का क्या असर पड़ सकता है?

CAATSA प्रतिबंधों की अमेरिकी चेतावनी के बावजूद, भारत ने S-400 की खरीद जारी रखी है। शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख फोकस रक्षा उपकरणों की तेजी से आपूर्ति सुनिश्चित करने और भुगतान तंत्र को मजबूत करने पर है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध बनी रहे।

3. भारत-रूस व्यापार में किन क्षेत्रों में वृद्धि की उम्मीद है?

भारत रूस के पक्ष में व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए रूस को अपने निर्यात को बढ़ाने की योजना बना रहा है। जिन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है उनमें फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, खाद्य उत्पाद, और उपभोक्ता वस्तुएँ शामिल हैं।

4. पुतिन की यात्रा ऐसे समय में क्यों महत्वपूर्ण है जब भारत-अमेरिका संबंध तनावपूर्ण हैं?

यह दौरा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को प्रदर्शित करता है। अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक तनाव के बीच, रूस के साथ ऐतिहासिक और मजबूत संबंध बनाए रखना भारत के लिए अपने राष्ट्रीय हितों, विशेष रूप से रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

5. पुतिन भारत में कितने घंटे गुजारेंगे?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के गुरुवार शाम नई दिल्ली पहुँचने और शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे रवाना होने की उम्मीद है, जिससे उनका कुल दौरा लगभग 28 घंटे का होगा।

External Source: www.etvbharat.com

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