उत्तर प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों—अलीगढ़, बलिया और हमीरपुर—में पुलिस ने ताबड़तोड़ एनकाउंटर की शृंखला चलाकर कुल चार वांछित अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. इन सफल कार्रवाइयों ने राज्य में संगठित अपराध पर लगाम कसने के पुलिस के संकल्प को और मजबूत किया है.
अलीगढ़ पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब देर रात टप्पल थाना क्षेत्र में एक कुख्यात अपराधी ओमप्रकाश उर्फ शाका को एक संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया. शाका पर ₹50,000 का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था.
🌃 देर रात की संयुक्त कार्रवाई
बुधवार की देर रात टप्पल पुलिस, स्वॉट टीम, और सर्विलांस टीम ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. पुलिस को सूचना मिली थी कि शाका टप्पल क्षेत्र में आने वाला है. सूचना मिलते ही टीमों ने इलाके की गहन चेकिंग और घेराबंदी शुरू कर दी.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही शाका ने खुद को घिरा हुआ महसूस किया, उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस दल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की. इस मुठभेड़ में शाका के पैर में गोली लगी और वह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा, जिसके बाद उसे तुरंत दबोच लिया गया. गिरफ्तार अपराधी के पास से अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए हैं. घायल शाका को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया गया है.
🚨 कांस्टेबल पर पूर्व में हुए हमले का आरोपी
पुलिस के रिकॉर्ड्स बताते हैं कि शाका केवल एक वांछित अपराधी नहीं था, बल्कि वह 9 नवंबर, 2025 को टप्पल पुलिस टीम पर हुए हमले का मुख्य आरोपी भी था. उस दिन, जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी, तो शाका ने पुलिस टीम पर गोलीबारी कर दी थी, जिससे कॉन्स्टेबल देव दीक्षित गंभीर रूप से घायल हो गए थे. वारदात को अंजाम देने के बाद शाका अपने साथी निशांत के साथ फरार हो गया था.
क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह ने इस सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शाका की गिरफ्तारी से क्षेत्र के आपराधिक माहौल पर लगाम कसने में बड़ी मदद मिलेगी.
⛓️ शाका का लंबा आपराधिक इतिहास
ओमप्रकाश उर्फ शाका का आपराधिक इतिहास काफी लंबा और संगीन है. उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें कई गंभीर मामले शामिल हैं:
- लूट और चोरी: कई वारदातों में शामिल.
- धमकी: लोगों को धमकाने और आतंकित करने के मामले.
- गैंगस्टर एक्ट: संगठित अपराध चलाने के आरोप.
- आर्म्स एक्ट: अवैध हथियार रखने और इस्तेमाल करने के मामले.
ये मुकदमे टप्पल, चडौस, पिसावा, क्वार्सी, हाईवे मथुरा और आगरा के इरादतनगर जैसे थानों में दर्ज हैं. पुलिस ने बताया कि शाका के दो साथी, निशांत और सचिन कुमार, पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और न्यायिक हिरासत में हैं. पुलिस अब शाका के अन्य फरार साथियों की तलाश में जुटी है.
🐂 बलिया में गो-तस्कर से मुठभेड़, घायल बदमाश गिरफ्तार
बलिया जिले के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने एक और सफल एनकाउंटर को अंजाम दिया. यहां गो-तस्कर बृजेश पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में घायल हो गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
🌉 खरीद नदी पुल पर पुलिस चेकिंग
अपर पुलिस अधीक्षक दिनेश शुक्ला ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार की देर रात पुलिस टीम खरीद नदी पुल पर नियमित चेकिंग कर रही थी. इस दौरान एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार आते हुए दिखाई दिया.
जब पुलिस टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, तो बदमाश ने खुद को घिरता देख पुलिस पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जवाबी फायरिंग की, जिसमें गो-तस्कर बृजेश के पैर में गोली लगी और वह घायल होकर वहीं गिर पड़ा.
पुलिस ने मौके से बृजेश को दबोच लिया. उसके पास से एक तमंचा, कारतूस, और वह मोटरसाइकिल बरामद हुई है जिसका इस्तेमाल वह अपराध के लिए कर रहा था. बृजेश से पूछताछ की जा रही है ताकि उसके गिरोह और तस्करी के नेटवर्क का खुलासा हो सके.
🚨 हमीरपुर में पुलिस टीम पर हमले के दो वांछित आरोपी गिरफ्तार
हमीरपुर जिले के कुरारा थाना क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी, जहां पुलिस ने दो वांछित आरोपियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया. ये दोनों आरोपी हाल ही में पुलिस टीम पर हुए जानलेवा हमले और सरकारी हथियार लूटने की वारदात में शामिल थे.
🔨 पुलिस पर बर्बर हमला और लूट
यह मामला मंगलवार देर शाम का है, जब चौकी हरौलीपुर से उपनिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद और सिपाही आशीष मौर्य उमराहट गांव में एक विवाद की शिकायत पर पहुंचे थे. शिकायत की जांच के दौरान, एक उग्र भीड़ ने अचानक पुलिस टीम पर कुल्हाड़ी, धारदार हथियारों और लाठी-डंडों से बर्बर हमला कर दिया.
इस हमले में न केवल पुलिसकर्मी घायल हुए, बल्कि हमलावरों ने सरकारी असलहा भी लूट लिया:
- उपनिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद की सरकारी पिस्तौल, मैगजीन और 10 कारतूस लूटे गए.
- सिपाही आशीष मौर्य का मोबाइल फोन भी लूटा गया.
- हमलावरों ने सिपाही आशीष मौर्य को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा.
🤝 विशेष टीम गठित और घेराबंदी
इस गंभीर वारदात के बाद, पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन किया.
बुधवार शाम को पुलिस को मुखबिरों से सटीक सूचना मिली कि हमले में शामिल दो मुख्य वांछित आरोपी, राजकिशोर निषाद (32) और महेंद्र निषाद (30), मनकी रोड स्थित बभनपुर मोड़ पर देखे गए हैं. पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी की.
गिरफ्तारी से बचने के लिए, दोनों आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में राजकिशोर के दाएं पैर में और महेंद्र के बाएं पैर में गोली लगी, जिससे दोनों घायल हो गए और पकड़े गए. दोनों घायलों को इलाज के लिए सीएचसी कुरारा में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने मौके से तमंचे, जिंदा कारतूस और खोखे बरामद किए हैं.
राजकिशोर और महेंद्र की गिरफ्तारी से सरकारी असलहा लूटने और पुलिस पर हमला करने के इस जघन्य अपराध में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी में मदद मिलने की उम्मीद है.
📈 आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसने का प्रयास
उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में तीन अलग-अलग जिलों में हुई इन मुठभेड़ों और सफल गिरफ्तारियों को राज्य सरकार द्वारा अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के एक मजबूत संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
⚖️ पुलिस मुठभेड़ों की कानूनी पृष्ठभूमि
पुलिस मुठभेड़, या ‘एनकाउंटर’, भारतीय कानूनी ढांचे के तहत पुलिस की आत्मरक्षा का एक हिस्सा है. पुलिस मैनुअल और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, पुलिस को आत्मरक्षा में और गंभीर अपराधों में वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के दौरान यदि अपराधी पुलिस पर हमला करते हैं, तो जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है.
प्रमुख कानूनी पहलू:
- आत्मरक्षा का अधिकार (Right to Private Defence): भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 96 से 106 तक में आत्मरक्षा के अधिकार का प्रावधान है, जो पुलिस पर भी लागू होता है.
- गिरफ्तारी का प्रयास: आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 46 के तहत, यदि अपराधी गिरफ्तारी के प्रयास का विरोध करता है या भागने की कोशिश करता है, तो पुलिस बल का उपयोग कर सकती है.
- सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश: पी.यू.सी.एल. बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों की विस्तृत जांच और रिपोर्टिंग के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोका जा सके.
ये गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश पुलिस की स्वॉट (SWAT) और सर्विलांस टीमों की बढ़ी हुई दक्षता और बेहतर समन्वय को दर्शाती हैं. विशेष रूप से, कुख्यात अपराधियों को पकड़ने के लिए खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी का उपयोग, आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
🌐 संगठित अपराध का नेटवर्क
शाका जैसे कुख्यात अपराधी और बृजेश जैसे गो-तस्कर अक्सर एक व्यापक और संगठित नेटवर्क का हिस्सा होते हैं. इन नेटवर्कों के ध्वस्त होने से:
- स्थानीय अपराधों में कमी: लूट, चोरी, और धमकी जैसी घटनाएं कम होती हैं.
- अवैध कारोबार पर रोक: गो-तस्करी और अवैध हथियारों के व्यापार पर लगाम लगती है.
- कानून का राज मजबूत: आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ता है और कानून का शासन मजबूत होता है.
हमीरपुर की घटना, जिसमें पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला हुआ और उनके सरकारी हथियार लूटे गए, यह दिखाती है कि अपराधियों के मन में अब भी पुलिस का भय कम हो रहा है. ऐसी घटनाओं का त्वरित और कड़ा जवाब देना पुलिस बल के मनोबल और राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक होता है. इन दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से पुलिस ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिसकर्मियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
📚 पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूपी में हाल के वर्षों में संगठित अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए पुलिस द्वारा ऐसी मुठभेड़ों का चलन बढ़ा है. सरकार का मानना है कि इससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है और अपराधियों में भय का माहौल बना है.
🤝 पुलिस और जनता के बीच सहयोग
इन सफलताओं के पीछे पुलिस की खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस) का एक महत्वपूर्ण रोल रहा है. पुलिस अधिकारी अक्सर यह बताते हैं कि ऐसे बड़े अपराधियों को पकड़ने में जनता से मिली गुप्त सूचनाएं (मुखबिरी) बहुत मददगार साबित होती हैं.
पुलिस के लिए चुनौतियाँ:
- तकनीकी रूप से उन्नत अपराधी: आधुनिक अपराधी अब तकनीक का उपयोग करके पुलिस को चकमा देने की कोशिश करते हैं.
- सीमा पार से अपराध: अंतर-राज्यीय या सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाले अपराधों से निपटना.
- कानूनी प्रक्रिया: मुठभेड़ के बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया (FIR, जांच, ट्रायल) का सही ढंग से पालन करना.
इन चुनौतियों के बावजूद, अलीगढ़ के कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी, जिसके खिलाफ कई जिलों में गंभीर मुकदमे दर्ज थे, यह साबित करती है कि पुलिस ने अपनी रणनीति और तकनीकी क्षमता को बढ़ाया है.
गो-तस्करी जैसे अपराध भी न केवल अवैध कारोबार से जुड़े हैं, बल्कि ये सांप्रदायिक तनाव का कारण भी बन सकते हैं. बलिया में गो-तस्कर बृजेश की गिरफ्तारी इस अवैध गतिविधि के नेटवर्क को तोड़ने में मदद करेगी.
हमीरपुर की वारदात, जहां पुलिसकर्मियों को बंधक बनाया गया और पीटा गया, पुलिस बलों की सुरक्षा के मुद्दे को सामने लाती है. पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी, पुलिस के मनोबल के लिए बेहद जरूरी थी.
आगे की कार्रवाई: पुलिस अब गिरफ्तार किए गए सभी अपराधियों से पूछताछ करेगी ताकि उनके नेटवर्क के बाकी सदस्यों, हथियारों के स्रोत, और उनकी भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया जा सके. लूटे गए सरकारी हथियारों की बरामदगी भी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी.
यह पूरी कार्रवाई उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था को प्राथमिकता देने के राज्य सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है.
📝 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक ही दिन में अलीगढ़, बलिया और हमीरपुर में सफल मुठभेड़ों के माध्यम से ₹50,000 के इनामी कुख्यात अपराधी ओमप्रकाश उर्फ शाका, एक गो-तस्कर बृजेश, और पुलिस टीम पर हमले के दो मुख्य वांछित आरोपियों (राजकिशोर निषाद और महेंद्र निषाद) को गिरफ्तार किया है. यह ऑपरेशन पुलिस की तत्परता, खुफिया तंत्र की मजबूती और संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रदर्शित करता है. इन सफलताओं से न केवल संबंधित क्षेत्रों में अपराध पर लगाम लगेगी, बल्कि पुलिस बल का मनोबल भी ऊंचा होगा. पुलिस अब इन गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ के आधार पर उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगी.
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.
Q1. अलीगढ़ से गिरफ्तार कुख्यात अपराधी कौन है और उस पर कितना इनाम था?
A: अलीगढ़ के टप्पल थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कुख्यात अपराधी का नाम ओमप्रकाश उर्फ शाका है. वह कई गंभीर मामलों में वांछित था और उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित था.
Q2. शाका को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम पर उसने पहले कब हमला किया था?
A: शाका ने 9 नवंबर, 2025 को टप्पल में पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसमें कॉन्स्टेबल देव दीक्षित घायल हुए थे, जिसके बाद वह फरार हो गया था.
Q3. बलिया से किस आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है?
A: बलिया के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में गो-तस्कर बृजेश को पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद गिरफ्तार किया गया है. वह खरीद नदी पुल पर पुलिस चेकिंग के दौरान पकड़ा गया.
Q4. हमीरपुर में पुलिस पर हमला करने वाले कौन थे और उन्होंने क्या लूटा था?
A: हमीरपुर के कुरारा थाना क्षेत्र में दो वांछित आरोपी राजकिशोर निषाद और महेंद्र निषाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें उपनिरीक्षक की सरकारी पिस्तौल (मैगजीन और 10 कारतूस सहित) और एक सिपाही का मोबाइल फोन लूटा गया था.
Q5. मुठभेड़ में गिरफ्तार आरोपियों को गोली लगने के बाद क्या किया जाता है?
A: पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए सभी आरोपियों को तुरंत कानूनी प्रक्रिया के तहत इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाता है. इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया जाता है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है.
External Source: www.etvbharat.com
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