उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण प्रस्ताव को लेकर कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने लखनऊ में आयोजित मंथन शिविर में स्पष्ट किया कि निजीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, दिवाली के मद्देनज़र उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति का भी वादा किया गया है।
⚡ निजीकरण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
राज्य सरकार द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बीच, बिजली कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
🔍 आंदोलन की प्रमुख बातें:
- लखनऊ में आयोजित मंथन शिविर में निजीकरण प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज किया गया।
- 16 अक्टूबर को सभी जिलों में आमसभा आयोजित कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
- आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार निजीकरण प्रस्ताव को वापस नहीं लेती।
🧠 रणनीतिक मंथन शिविर में क्या हुआ?
राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ द्वारा आयोजित मंथन शिविर में अब तक के आंदोलनों की समीक्षा की गई। इसमें पावर कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की गई।
🗣️ प्रमुख आरोप:
- उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी।
- स्मार्ट मीटर और निजीकरण के नाम पर शोषण।
- लखनऊ में फ्रेंचाइजी मॉडल लागू करने की निंदा।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि कर्मचारियों को दिए गए तीन विकल्पों को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया है।
📟 स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर भी विवाद
प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर भी विरोध तेज हो गया है। उपभोक्ताओं और संगठनों ने इसे जबरन थोपे जाने का आरोप लगाया है।
📊 आंकड़े और तथ्य:
- अब तक 43.44 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं।
- इनमें से 20.69 लाख मीटर उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना प्रीपेड में बदले गए।
- विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा
🪔 दिवाली पर बिजली आपूर्ति का भरोसा
हालांकि आंदोलन तेज किया जाएगा, लेकिन कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि दिवाली के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
✅ उपभोक्ताओं के हित में संकल्प:
- दिवाली पर निर्बाध और भरपूर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
- उपभोक्ताओं के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
- किसी भी तरह की बिजली कटौती की संभावना नहीं।
🏛️ शासन और निगम पर उठते सवाल
संघ और उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
❗ मुख्य आरोप:
- उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी।
- स्मार्ट मीटर और निजीकरण के नाम पर मनमानी।
- कर्मचारियों के विकल्पों को सीमित करना।
लखनऊ में व्यवस्था को फ्रेंचाइजी मॉडल से चलाने की योजना की भी आलोचना की गई।
⚖️ कानूनी और सामाजिक दबाव में सरकार
बिजली कर्मचारियों के आंदोलन ने राज्य सरकार और विद्युत निगम पर कानूनी और सामाजिक दबाव बढ़ा दिया है।
📌 मांगें:
- निजीकरण प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए।
- विद्युत अधिनियम 2003 के तहत उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए।
- विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों की निगरानी करे।
- चेक मीटर घोटाले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
🧾 आंदोलन की आगामी रणनीति
16 अक्टूबर को सभी जिलों में आमसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रदर्शन, ज्ञापन और जनजागरूकता अभियान इसके प्रमुख हिस्से होंगे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: यूपी में बिजली निजीकरण का विरोध क्यों हो रहा है?
उत्तर: कर्मचारी निजीकरण को अपनी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं।
Q2: क्या दिवाली पर बिजली आपूर्ति बाधित होगी?
उत्तर: नहीं, कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति का भरोसा दिलाया है।
Q3: स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विवाद क्या है?
उत्तर: उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना अनुमति के प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
Q4: आंदोलन कब तक चलेगा?
उत्तर: जब तक निजीकरण प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
🔚 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर गहराता विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे। हालांकि, उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए दिवाली पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी संकल्प लिया गया है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन के दबाव में क्या रुख अपनाती है।
External Source: Patrika Report
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