राम मंदिर ध्वजारोहण: अयोध्या और लखनऊ हाईवे पर सुरक्षा का अभेद्य घेरा, 23 नवंबर से बड़े वाहनों की एंट्री बंद
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर 25 नवंबर को होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम की ऐतिहासिक महत्ता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित उपस्थिति के मद्देनज़र, प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व तरीके से चाक-चौबंद कर दिया है। इसी कड़ी में, लखनऊ-बाराबंकी-अयोध्या हाईवे पर 23 नवंबर से भारी और मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसने यात्रा के मार्गों में बड़े बदलावों को जन्म दिया है।
🛣️ हाईवे पर तीन दिन की ‘नो एंट्री’: यातायात डायवर्जन की व्यापक रूपरेखा
राम मंदिर ध्वजारोहण को लेकर अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए, लखनऊ-अयोध्या हाईवे को विशेष रूप से फोकस में रखा गया है। यह प्रतिबंध, जो 23 नवंबर को प्रभावी होगा, 26 नवंबर की रात 10 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान अयोध्या की ओर जाने वाले सभी भारी और मालवाहक वाहनों के लिए एंट्री पूरी तरह से बंद रहेगी, जिससे लखनऊ से गोरखपुर, अंबेडकर नगर और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाले हाईवे प्रभावित होंगे।
📅 प्रतिबंध की समयरेखा और दायरा
- प्रारंभ तिथि: 23 नवंबर
- समाप्ति तिथि: 26 नवंबर, रात 10:00 बजे
- प्रतिबंधित वाहन: सभी भारी (Heavy) और मालवाहक (Goods/Commercial) वाहन।
- प्रभावित मार्ग: लखनऊ-बाराबंकी-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-27) तथा लखनऊ से गोरखपुर, अंबेडकर नगर और प्रयागराज को जोड़ने वाले अन्य प्रमुख मार्ग।
यह प्रतिबंध केवल यातायात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा और लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए एक सुरक्षात्मक उपाय भी है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि छोटे वाहनों (Light Motor Vehicles) के मार्ग में भी आवश्यकतानुसार बदलाव (डायवर्जन) किया जा सकता है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
🚨 सुरक्षा एजेंसियाँ और खुफिया तंत्र: चौबीसों घंटे की गहन निगरानी
अयोध्या में आयोजित हो रहे इस भव्य कार्यक्रम के मद्देनज़र, सुरक्षा व्यवस्था को एक नया आयाम दिया गया है। विभिन्न खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस बल लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर चौबीसों घंटे (24×7) गहन निगरानी रख रहे हैं।
यह निगरानी केवल यातायात नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि या सुरक्षा चूक को रोकने के लिए एक व्यापक सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है। जगह-जगह पर बैरियर, चेक-पॉइंट्स और निगरानी टॉवर स्थापित किए गए हैं। इस अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राम मंदिर ध्वजारोहण का यह पवित्र अवसर शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
🙏 26 नवंबर को भक्तों के लिए विशेष दर्शन: पट खुलने का समय बदला
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 25 नवंबर को राम मंदिर ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद 26 नवंबर को अत्यधिक भीड़ जुटने की आशंका व्यक्त की है। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए, ट्रस्ट ने 26 नवंबर को मंदिर के दर्शन के समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
- सामान्यतः खुलने का समय: (आमतौर पर)
- 26 नवंबर का नया समय: सुबह 6:00 बजे
यह बदलाव श्रद्धालुओं को एक घंटा पहले मंदिर में प्रवेश की अनुमति देगा, जिससे अधिक से अधिक भक्त रामलला के दर्शन कर सकेंगे और भीड़ का प्रबंधन भी आसान होगा। ट्रस्ट द्वारा दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में नए रूट और बैरियर स्थापित किए जा रहे हैं, जो दर्शन के दौरान एक सुव्यवस्थित कतार प्रणाली सुनिश्चित करेंगे।
👥 दर्शन के लिए नई व्यवस्था
ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के अनुसार, श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए एक विशाल व्यवस्था तैयार की गई है। मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:
- प्रवेश पंक्तियाँ: भक्त एक साथ छह पंक्तियों से मंदिर में प्रवेश करेंगे।
- सुव्यवस्थित मार्ग: मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए स्पष्ट और नए रूट बनाए जा रहे हैं।
- भीड़ नियंत्रण: आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है।
📍 प्रधानमंत्री का प्रस्तावित कार्यक्रम: सप्त ऋषियों के मंदिर में दर्शन
राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम की तिथि, 25 नवंबर को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी तैयारियां ज़ोरों पर हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री सबसे पहले सप्त ऋषियों के मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे।
ध्वजारोहण का मुख्य कार्यक्रम संपन्न होने के बाद, उपस्थित अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों को भी रामलला के दर्शन की व्यवस्थापूर्वक अनुमति दी जाएगी। यह दौरा न केवल एक धार्मिक आयोजन होगा, बल्कि राम मंदिर निर्माण की प्रगति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी रेखांकित करेगा।
🗺️ डायवर्जन योजना: प्रमुख मार्गों पर यातायात का परिवर्तन
राम मंदिर ध्वजारोहण के कारण लागू की गई ‘नो एंट्री’ और सुरक्षा प्रतिबंधों के मद्देनज़र, उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों से अयोध्या को जोड़ने वाले मार्गों पर यातायात को डायवर्ट करने की एक विस्तृत योजना तैयार की गई है। यह योजना 23 नवंबर से प्रभावी होकर भारी वाहनों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी।
| आगमन का स्थान | मूल गंतव्य | डायवर्टेड मार्ग |
| अंबेडकरनगर | अयोध्या | कूदा केशवपुर $\rightarrow$ अवारी का सगरा $\rightarrow$ इटौरा, जलालपुर $\rightarrow$ गंतव्य |
| सुलतानपुर | अयोध्या/अन्य | कुठैभार $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ गंतव्य |
| रायबरेली | अयोध्या/अन्य | हलियापुर $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ गंतव्य |
| आजमगढ़, अंबेडकरनगर | अयोध्या/अन्य | मोहन्ना मोड़ $\rightarrow$ दोस्तपुर $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ गंतव्य |
| बाराबंकी | अयोध्या/अन्य | मिटरिया रामसनेही घाट $\rightarrow$ हैदरगढ़ $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ गंतव्य |
| बस्ती | अयोध्या/अन्य | लोलपुर $\rightarrow$ नवाबगंज $\rightarrow$ गोंडा की ओर |
| गोंडा (नवाबगंज से) | अयोध्या/अन्य | लकड़मंडी $\rightarrow$ लोलपुर $\rightarrow$ बस्ती की ओर |
| गोरखपुर | अयोध्या/अन्य | लिंक एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर |
| कानपुर | गोरखपुर की ओर | उन्नाव $\rightarrow$ मौरावा $\rightarrow$ मोहनलालगंज $\rightarrow$ गोसाईगंज $\rightarrow$ चंद सराय $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ गोरखपुर |
| लखनऊ (आगरा एक्सप्रेस-वे) | गोरखपुर की ओर | मोहान $\rightarrow$ जुनावगंज $\rightarrow$ मोहनलालगंज $\rightarrow$ गोसाईगंज $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे $\rightarrow$ गोरखपुर |
| सीतापुर, शाहजहांपुर | गोरखपुर की ओर | आईआईएम रोड दुबग्गा $\rightarrow$ आलमबाग $\rightarrow$ नहरिया $\rightarrow$ शहीदनगर $\rightarrow$ अहीमामऊ $\rightarrow$ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे |
अन्य महत्वपूर्ण डायवर्जन बिंदु:
- पूर्वी क्षेत्रों से: गोरखपुर, संतकबीरनगर और बस्ती से आने वाले भारी वाहनों को फुटहिया चौकी (थाना कोतवाली नगर) से कलयारों, टांडा, अकबरपुर, दोस्तपुर होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर भेजा जाएगा।
- उत्तरी क्षेत्रों से (बलरामपुर, बहराइच): इन क्षेत्रों से अयोध्या होकर लखनऊ जाने वाले वाहनों को टिकोरा मोड़ से चहलरी घाट रोड होते हुए सिधौली-सीतापुर-लखनऊ मार्ग पर डायवर्ट किया जाएगा।
यह विस्तृत डायवर्जन योजना सुनिश्चित करती है कि भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहे, लेकिन वे सीधे अयोध्या शहर के मुख्य मार्गों में प्रवेश न करें, जिससे सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन दोनों में सहायता मिलेगी।
🔱 राम मंदिर ध्वजारोहण अनुष्ठान: वैदिक आचार्यों का विधिवत पूजन
राम मंदिर के शिखर पर होने वाले ध्वजारोहण के ऐतिहासिक क्षण से पूर्व, मंदिर परिसर में अनुष्ठान और वैदिक पूजन की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो गई है। यह अनुष्ठान इस भव्य धार्मिक आयोजन का एक अभिन्न अंग है।
✨ अनुष्ठान की मुख्य गतिविधियाँ
राम जन्मभूमि परिसर में वैदिक आचार्यों ने इस अनुष्ठान का प्रारंभ भगवान रामलला के दर्शन और स्तुति से किया। इस धार्मिक प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
- शुद्धिकरण और मंडप पूजन: वैदिक आचार्य चंद्रभान शर्मा, उपाचार्य रविंद्र पैठणे और यज्ञ के ब्रह्मा व आचार्य पंकज शर्मा के नेतृत्व में 108 वैदिक आचार्यों ने सरयू जल से शुद्धिकरण किया और यज्ञ मंडप की पूजा आराधना की।
- यजमानों की परिक्रमा: अनुष्ठान में शामिल 27 यजमानों ने मंडप की परिक्रमा पूरी की, जो एक पवित्र परंपरा का हिस्सा है।
- देवता आह्वान और पूजन: यज्ञशाला में प्रवेश कर उत्सव प्रतिमा और रामार्चा पूजन किया गया, जिसके बाद विधि-विधान से देवताओं का आह्वान किया गया। इसमें गणपति पूजन, पंचांग पूजन और षोडष मातृका पूजन शामिल था।
- हवन और आहुति: मुख्य यजमान और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने परिसर में बने यज्ञ मंडप में विधि-विधान से पूजन के बाद प्रवेश किया। वैदिक आचार्यों ने देवता आह्वान और अनुष्ठान पूजन के बाद हवन कुंड में आहुति डाली।
⏳ अनुष्ठान की अवधि और पाठ
डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि यह महत्वपूर्ण अनुष्ठान 24 नवंबर तक चलेगा और प्रतिदिन लगभग 6 घंटे तक जारी रहेगा। इस दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का पाठ किया जा रहा है:
- दैनिक पाठ:
- रामचरितमानस का पाठ।
- बाल्मीकि रामायण का पाठ।
- श्री राम रक्षा स्त्रोत का पाठ।
इसके अतिरिक्त, शेषावतार मंदिर और परकोटा के सभी मंदिरों में भी वैदिक आचार्यों द्वारा यजमानों के साथ यह अनुष्ठान किया जा रहा है, जिससे पूरे परिसर में एक पवित्र और धार्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राम मंदिर का महत्व
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, और यह ध्वजारोहण समारोह उस मील के पत्थर को चिह्नित करता है जो मंदिर के शिखर को एक धार्मिक पहचान प्रदान करता है। यह केवल एक संरचना का निर्माण नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही एक धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था की परिणति है।
मंदिर का महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्व हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर निर्माण के विभिन्न चरणों को देखने और इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। राम मंदिर ध्वजारोहण एक धार्मिक प्रतीक से कहीं अधिक है; यह राष्ट्रीय एकता और धार्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।
🔍 यातायात डायवर्जन का प्रभाव और आम जनता के लिए सुझाव
लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और विस्तृत डायवर्जन योजना का सीधा असर अंतर-राज्यीय और अंतर-ज़िला यातायात पर पड़ेगा।
- लॉजिस्टिक और माल ढुलाई: लॉजिस्टिक कंपनियों और माल ढुलाई करने वाले व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे 23 से 26 नवंबर के बीच अपनी यात्रा की योजना में इन डायवर्जन मार्गों को शामिल करें या वैकल्पिक रूप से यात्रा की तारीखों को पुनर्निर्धारित करें।
- यात्रियों के लिए सुझाव: सामान्य यात्रियों (छोटे वाहनों से) को भी सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी की जाँच कर लें, क्योंकि छोटे वाहनों के मार्गों में भी स्थानीय स्तर पर बदलाव संभव है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे इस दौरान एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरेगा, जिसका उपयोग लंबी दूरी की यात्रा के लिए किया जा सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था और राम मंदिर ध्वजारोहण की महत्ता को देखते हुए, यात्रियों से प्रशासन का सहयोग करने और धैर्य बनाए रखने की अपील की गई है।
🎯 निष्कर्ष: एक ऐतिहासिक पल की ओर बढ़ती अयोध्या
श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर 25 नवंबर को होने वाला ध्वजारोहण एक ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है। प्रधानमंत्री की संभावित यात्रा और लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए, लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर लागू किया गया ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा प्रतिबंध एक आवश्यक कदम है।
प्रशासन और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि यह भव्य आयोजन न केवल सुरक्षित और शांतिपूर्ण हो, बल्कि देश-विदेश से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भगवान रामलला के दर्शन का अवसर प्राप्त हो सके। वैदिक अनुष्ठानों की शुरुआत इस बात का संकेत है कि अयोध्या अब एक ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव के लिए पूरी तरह से तैयार है।
❓ Suggested FAQs.
Q1: राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम किस तारीख को होने जा रहा है?
A: राम मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम 25 नवंबर को आयोजित होने जा रहा है।
Q2: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर भारी वाहनों की एंट्री कब से कब तक बंद रहेगी?
A: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर सभी भारी और मालवाहक वाहनों की एंट्री 23 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर की रात 10 बजे तक बंद रहेगी।
Q3: 26 नवंबर को राम मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए कितने बजे खुलेंगे?
A: 26 नवंबर को मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए सामान्य समय से एक घंटा पहले, यानी सुबह 6:00 बजे खोल दिए जाएंगे।
Q4: ट्रैफिक डायवर्जन किस तरह के वाहनों पर लागू होगा?
A: मुख्य रूप से ट्रैफिक डायवर्जन भारी और मालवाहक वाहनों पर लागू होगा, लेकिन आवश्यकतानुसार छोटे वाहनों के मार्गों में भी बदलाव किया जा सकता है।
Q5: राम मंदिर ध्वजारोहण से पहले चल रहे अनुष्ठान का नेतृत्व कौन कर रहा है?
A: अनुष्ठान का नेतृत्व वैदिक आचार्य चंद्रभान शर्मा, उपाचार्य रविंद्र पैठणे और यज्ञ के ब्रह्मा व आचार्य पंकज शर्मा कर रहे हैं, जिसमें कुल 108 वैदिक आचार्य शामिल हैं।
External Source: etvbharat.com
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