📰 अलवर के कलसाडा गांव में हाईवे किनारे खुलेआम देह व्यापार, पुलिस बेबस!
राजस्थान के अलवर जिले के कलसाडा गांव में हाईवे किनारे खुलेआम देह व्यापार का धंधा चल रहा है। रिपोर्टर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि यहां महिलाएं खुद ग्राहकों को इशारों में बुलाती हैं और रेट तय करती हैं। पुलिस की चुप्पी और प्रशासन की निष्क्रियता ने इस अवैध कारोबार को वर्षों से फलने-फूलने दिया है।
📍 कहां है कलसाडा गांव और क्यों है चर्चा में?
- कलसाडा गांव अलवर-राजगढ़ रोड पर स्थित है।
- यह गांव शहर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है।
- यहां की हवेलियां और कोठियां इस गंदे खेल की गवाह बन चुकी हैं।
- यह इलाका अब ‘रेड लाइट एरिया’ के रूप में बदनाम हो चुका है।
👩🦰 “एक घंटे के 1000 रुपए लगेंगे…” — रिपोर्टर से युवती की बातचीत
रिपोर्टिंग के दौरान संवाददाता का सामना एक 25-30 वर्षीय युवती से हुआ। उसने बिना झिझक कहा:
“एक घंटे के 1000 रुपए लगेंगे। पुलिस की चिंता मत करो, सब सेट है।”
उसका पहनावा सामान्य था—सूट-सलवार में, लेकिन आत्मविश्वास से भरी हुई। यह दर्शाता है कि यह धंधा यहां कितना सामान्य हो चुका है।
💰 रेट कार्ड: 500 से 2000 रुपए तक, होटल जाने से परहेज़
एक स्थानीय ऑटो चालक ने बताया:
- “यहां सब पैसों का खेल है।”
- “500 से 2000 रुपए तक का रेट चलता है।”
- “लड़कियां होटल जाने से कतराती हैं, वहीं सड़क किनारे ही सौदा तय होता है।”
🕵️♂️ वर्षों से चल रहा है यह गंदा खेल
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- यह धंधा कई वर्षों से चल रहा है।
- पुलिस आती है तो कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाता है।
- लेकिन कुछ ही देर में फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।
👀 कैसे होता है सौदा? लड़की दिखाकर तय होता है रेट
- महिलाएं सड़क किनारे खड़ी होकर इशारों में ग्राहकों को बुलाती हैं।
- ग्राहक को पहले लड़की दिखाई जाती है।
- फिर रेट तय होता है।
- कुछ महिलाएं झोपड़ियों में बैठी भी दिखती हैं।
😔 “पहले से बदनाम हैं, अब शर्म नहीं बची” — 45 वर्षीय महिला का बयान
एक स्थानीय महिला ने बताया:
- “यह अब मजबूरी बन चुका है।”
- “लड़कियां बार डांसर बनने के लिए पैसे इकट्ठा कर रही हैं।”
- “अनजान पुरुषों से मिलना और पैसे लेना आम बात है।”
🏛️ सरकार और संस्थाओं के प्रयास
- कई सामाजिक संस्थाएं इन महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही हैं।
- कुछ मामलों में सफलता भी मिली है।
- लेकिन समस्या की जड़ें गहरी हैं।
📈 देशभर में बढ़ रहा देह व्यापार, बदल रहा तरीका
- अब ऑनलाइन माध्यमों से भी यह धंधा फैल रहा है।
- होटल संचालक और दलाल इसमें शामिल रहते हैं।
- कई बार लूटपाट की घटनाएं भी सामने आती हैं।
📌 अलवर में हालिया घटनाएं और पुलिस की कार्रवाई
- हाल ही में अलवर में एक मां द्वारा अपनी 11 वर्षीय बेटी को देह व्यापार में धकेलने का मामला सामने आया।
- कोर्ट ने दोषी मां को 10 साल की सजा और 5.5 लाख का जुर्माना लगाया।
- यह मामला समाज में गहरी चिंता का विषय बना।
📉 पुलिस की भूमिका पर सवाल
- स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना यह धंधा संभव नहीं।
- कई बार पुलिस आती है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
- प्रशासन की निष्क्रियता ने इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया है।
📲 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से भी फैल रहा है नेटवर्क
- सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भी सौदे तय किए जा रहे हैं।
- ग्राहक और दलाल अब डिजिटल माध्यमों से संपर्क में रहते हैं।
- इससे पुलिस की निगरानी और भी मुश्किल हो गई है।
🧩 सामाजिक और आर्थिक कारण
- गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा की कमी इस समस्या की जड़ हैं।
- कई महिलाएं मजबूरी में इस धंधे में उतरती हैं।
- समाज की उपेक्षा और कलंक ने इन्हें मुख्यधारा से दूर कर दिया है।
✅ समाधान क्या हो सकता है?
- सख्त कानूनों का पालन
- पुलिस की जवाबदेही तय करना
- सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाना
- महिलाओं को रोजगार और शिक्षा के अवसर देना
- स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाना
❓अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. क्या कलसाडा गांव में देह व्यापार कानूनी है?
नहीं, भारत में वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता नहीं है, और यह अवैध गतिविधि मानी जाती है।
Q2. पुलिस इस पर कार्रवाई क्यों नहीं करती?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण यह धंधा वर्षों से चल रहा है।
Q3. क्या सरकार इस समस्या को खत्म करने के लिए प्रयास कर रही है?
हां, कई सामाजिक संस्थाएं और सरकारी योजनाएं महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही हैं।
Q4. क्या ऑनलाइन माध्यमों से भी यह धंधा फैल रहा है?
जी हां, अब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भी सौदे तय किए जा रहे हैं।
🔚 निष्कर्ष: कब जागेगा सिस्टम?
कलसाडा गांव की यह रिपोर्ट न सिर्फ अलवर बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। जब तक प्रशासन, समाज और सरकार मिलकर ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक यह गंदा खेल यूं ही चलता रहेगा। जरूरत है सख्ती की, संवेदनशीलता की और सामाजिक बदलाव की।
External Source: Patrika Report
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