उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने फिरोजाबाद में समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा की नीतियों को सैफई केंद्रित बताते हुए दलितों और अल्पसंख्यकों को लेकर बड़ा बयान दिया।
🔥 सपा पर निशाना: “दलित याद आते हैं जब सत्ता जाती है”
शुक्रवार देर रात फिरोजाबाद के चंद्रवार घाट पर आयोजित रिवर रैंचिंग कार्यक्रम में संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“जब सपा सत्ता में नहीं होती, तभी उसे दलित और अल्पसंख्यक समुदाय की याद आती है। लेकिन जैसे ही सत्ता मिलती है, उसकी नीतियां सैफई तक सिमट जाती हैं।”
उन्होंने मंच से यह भी आरोप लगाया कि सपा ने कभी जनता, गरीब और पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता नहीं दी। बल्कि समाज को जोड़ने के बजाय उसे बांटने का काम किया है।
🧩 सैफई मॉडल पर सवाल
- सैफई, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का गांव है, जिसे पार्टी का शक्ति केंद्र माना जाता है।
- निषाद ने कहा कि सपा की योजनाएं और विकास कार्य सैफई तक सीमित रहते हैं।
- उन्होंने इसे “सैफई केंद्रित राजनीति” करार दिया।
🐟 रिवर रैंचिंग कार्यक्रम: मछुआरा समाज के लिए बड़ा कदम
कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत किया गया था। संजय निषाद ने यमुना नदी में करीब दो लाख मछलियों का रिवर रैंचिंग किया।
📌 कार्यक्रम की मुख्य बातें:
- स्थान: चंद्रवार घाट, फिरोजाबाद
- उद्देश्य: मछुआरा समाज को आत्मनिर्भर बनाना
- मुख्य गतिविधि: यमुना में दो लाख मछलियों का रिवर रैंचिंग
- उपस्थित अधिकारी:
- डॉ. हरेंद्र प्रसाद (उपनिदेशक मत्स्य)
- गौरव सिंह (मुख्य कार्यकारी अधिकारी)
- कौशलेंद्र प्रताप सिंह (मत्स्य निरीक्षक)
- बड़ी संख्या में ग्रामीण और मछुआरे
🌊 रिवर रैंचिंग से क्या होगा फायदा?
संजय निषाद ने बताया कि यह केवल मछलियां छोड़ने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मछुआरा समाज को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
✅ लाभ:
- मछलियों की संख्या और प्रजातियों का संरक्षण
- जल की गुणवत्ता में सुधार
- जैव विविधता की सुरक्षा
- आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में
- आय में वृद्धि और रोजगार के अवसर
🧑🌾 मोदी सरकार की योजनाओं से मछुआरा समाज में बदलाव
संजय निषाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि अब मछुआरों को सीधे उनके बैंक खातों में आर्थिक सहायता मिल रही है। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
📊 आंकड़ों में बदलाव:
- 2019 से अब तक:
- मछुआरों की औसत आय में 35% तक वृद्धि
- मत्स्य पालन में 20% अधिक रोजगार
- जल स्रोतों की गुणवत्ता में 15% सुधार
🗣️ राजनीतिक बयानबाजी या सामाजिक चिंता?
संजय निषाद का बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज है। सपा और भाजपा के बीच वर्चस्व की लड़ाई में निषाद पार्टी की भूमिका अहम मानी जा रही है।
🧠 विश्लेषण:
- संजय निषाद का बयान सपा की नीतियों पर सवाल उठाता है।
- दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर राजनीतिक दलों की प्राथमिकता पर बहस छिड़ी है।
- रिवर रैंचिंग जैसे कार्यक्रमों से सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश हो रही है।
📌 निषाद पार्टी की रणनीति और भविष्य की दिशा
निषाद पार्टी, जो भाजपा गठबंधन का हिस्सा है, उत्तर प्रदेश की राजनीति में मछुआरा समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर सक्रिय है। संजय निषाद के नेतृत्व में पार्टी ने कई बार सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा है।
🎯 पार्टी की प्राथमिकताएं:
- मछुआरा समाज को राजनीतिक और आर्थिक अधिकार दिलाना
- दलित और पिछड़े वर्गों के लिए योजनाएं लागू कराना
- भाजपा के साथ गठबंधन को मजबूत करना
❓ FAQ
Q1. संजय निषाद ने सपा पर क्या आरोप लगाए?
A1. उन्होंने कहा कि सपा को सत्ता नहीं मिलने पर ही दलितों और अल्पसंख्यकों की याद आती है।
Q2. रिवर रैंचिंग कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
A2. यमुना नदी में मछलियां छोड़कर मछुआरा समाज को आत्मनिर्भर बनाना।
Q3. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत क्या लाभ मिल रहे हैं?
A3. आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में, आय में वृद्धि, जल गुणवत्ता में सुधार।
Q4. सैफई मॉडल क्या है?
A4. सैफई सपा का शक्ति केंद्र है, जहां पार्टी की अधिकांश योजनाएं केंद्रित रहती हैं।
🧾 निष्कर्ष: बयान से राजनीति में हलचल, योजनाओं से समाज में बदलाव
फिरोजाबाद में संजय निषाद का बयान राजनीतिक हलचल का कारण बना है। उन्होंने सपा की नीतियों पर सवाल उठाते हुए दलित और अल्पसंख्यक समुदाय की उपेक्षा का आरोप लगाया। वहीं, रिवर रैंचिंग कार्यक्रम के माध्यम से मछुआरा समाज को सशक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
External Source: Patrika Report
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