🌿 छत्तीसगढ़ सरकार की ऐतिहासिक पहल: जनजातीय ज्ञान को मिलेगा सम्मान
छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सकों को सम्मानित करने के उद्देश्य से एक नई योजना की शुरुआत की है। ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025’ के तहत चिन्हित व्यक्तियों को प्रतिवर्ष ₹5000 की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
📜 योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
🌱 पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण
इस योजना का मूल उद्देश्य जनजातीय समुदायों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होने वाले वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करना है। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ जैसे पारंपरिक चिकित्सक वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में वन आधारित चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
- इन समुदायों के पास दुर्लभ वनस्पतियों की पहचान और उपयोग का पारंपरिक अनुभव है।
- यह ज्ञान मौखिक परंपरा के माध्यम से अगली पीढ़ियों तक पहुंचता रहा है।
- सरकार अब इस ज्ञान को अभिलेखित कर संरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
🧾 अधिसूचना जारी
आदिम जाति विकास विभाग ने 6 नवंबर 2025 को इस योजना के लिए विस्तृत अधिसूचना जारी की। यह घोषणा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर 2024) के अवसर पर की गई थी।
👥 पात्रता की शर्तें
✅ कौन होंगे लाभार्थी?
इस योजना के तहत निम्नलिखित व्यक्तियों को पात्र माना जाएगा:
- अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्त्री, पुरुष एवं तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति।
- जो बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में कम से कम 30 वर्षों से सेवा दे रहे हों।
- जिनके परिवार में कम से कम दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान स्थानांतरित हुआ हो।
📌 अतिरिक्त मानदंड
- व्यक्ति को विगत तीन वर्षों से सक्रिय रूप से वनौषधीय चिकित्सा सेवा में संलग्न होना चाहिए।
- पादप औषधि बोर्ड, आयुष विभाग, वन विभाग या लघु वनोपज संघ जैसी पंजीकृत संस्थाओं से जुड़ाव होना चाहिए।
🏛️ चयन प्रक्रिया: कैसे होगा नामांकन?
🧩 ग्राम स्तर पर चयन
- ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत द्वारा नामों की अनुशंसा की जाएगी।
- ग्राम सचिव, सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और शाला के प्रधानपाठक की भूमिका अहम होगी।
🗂️ जिला समिति का गठन
- जिला स्तर पर एक समिति नामों का परीक्षण और सत्यापन करेगी।
- सत्यापित सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को भेजी जाएगी।
- मान्यता प्राप्त संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्तियों का विशेष उल्लेख किया जाएगा।
💰 राशि का वितरण
- जिला कलेक्टर द्वारा सहायता राशि का वितरण किया जाएगा।
- लाभार्थियों की सूची संबंधित ग्राम सभा में सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाएगी।
📚 जनजातीय चिकित्सा की ऐतिहासिक भूमिका
🌿 बैगा, गुनिया और हड़जोड़ की परंपरा
छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाजों में बैगा, गुनिया और हड़जोड़ का विशेष स्थान है। ये पारंपरिक चिकित्सक:
- वनस्पतियों से औषधि तैयार करते हैं।
- स्थानीय बीमारियों का उपचार करते हैं।
- समाज में सम्मानित और विश्वसनीय माने जाते हैं।
🧠 ज्ञान का हस्तांतरण
- यह ज्ञान पुस्तकों में नहीं, बल्कि अनुभव और परंपरा में निहित होता है।
- परिवारों में यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होता है।
🗣️ मुख्यमंत्री का बयान
“छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैभव और प्राचीन ज्ञान का जीवंत प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ हमारे समाज के वे सम्मानित जन हैं, जिन्होंने सदियों से वनौषधीय चिकित्सा की लोकपरंपरा को जीवित रखा है। उनकी इस अनमोल सेवा और ज्ञान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने यह योजना प्रारंभ की है।” — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
📊 योजना का सामाजिक प्रभाव
🔍 विश्लेषण
- यह योजना जनजातीय समुदायों को सम्मान देने के साथ-साथ उनकी आजीविका को भी सुदृढ़ करेगी।
- पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
- युवाओं को अपने पारंपरिक ज्ञान से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
📈 संभावित लाभ
- जनजातीय पहचान को मजबूती मिलेगी।
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
- वन आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।
❓ FAQs
Q1. मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना क्या है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक योजना है जिसके तहत पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सकों को प्रतिवर्ष ₹5000 की सम्मान राशि दी जाएगी।
Q2. कौन-कौन लोग इस योजना के लिए पात्र हैं?
बैगा, गुनिया और हड़जोड़ के रूप में 30 वर्षों से सेवा दे रहे अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति पात्र हैं।
Q3. योजना का उद्देश्य क्या है?
जनजातीय वनौषधीय ज्ञान का संरक्षण, अभिलेखीकरण और अगली पीढ़ियों तक हस्तांतरण।
Q4. चयन प्रक्रिया कैसे होगी?
ग्राम सभा की अनुशंसा, जिला समिति का सत्यापन और जिला कलेक्टर द्वारा राशि का वितरण।
Q5. योजना कब से लागू होगी?
वर्ष 2025 से योजना को लागू किया गया है।
🔚 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार की ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना’ न केवल जनजातीय समुदायों को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को संरक्षित करने का भी एक सशक्त प्रयास है। यह योजना जनजातीय समाज के ज्ञान, सेवा और संस्कृति को नई पहचान देने में सहायक सिद्ध होगी।
External Source: Patrika Report
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