कर्नाटक: 27 महीने से वेतन नहीं मिला, जलकर्मी ने की आत्महत्या | चामराजनगर मामला

वेतन न मिलने की पीड़ा ने ली जान

कर्नाटक के चामराजनगर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां होंगानूरु ग्राम पंचायत में कार्यरत जलकर्मी ने दो साल से वेतन न मिलने और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर पंचायत कार्यालय के सामने आत्महत्या कर ली।

📌 घटना का पूरा विवरण

🧑‍💼 मृतक की पहचान और पृष्ठभूमि

  • मृतक का नाम: चिक्कोसा नायक
  • पद: जलकर्मी (वाटरमैन)
  • कार्यकाल: 2016 से होंगानूरु ग्राम पंचायत में नियुक्त
  • समस्या: लगातार 27 महीने से वेतन नहीं मिला

नायक ने खराब स्वास्थ्य के चलते इस्तीफा भी दिया था ताकि उनका बकाया वेतन मिल सके, लेकिन इसके बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया।

📄 सुसाइड नोट में क्या लिखा था?

नायक ने आत्महत्या से पहले एक विस्तृत सुसाइड नोट छोड़ा जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और उत्पीड़न की कहानी साझा की:

  • PDO रामे गौड़ा और सरपंच के पति मोहन कुमार पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप
  • बार-बार छुट्टी मांगने पर धमकी दी जाती थी
  • सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में रुकने की मजबूरी
  • जिला पंचायत CEO से भी संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई

🗣️ “मैं पीडीओ और मोहन कुमार की प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जान दे रहा हूं। कृपया इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।” — सुसाइड नोट से उद्धरण

⚖️ प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

🚨 FIR और निलंबन की कार्रवाई

  • SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज
  • PDO रामे गौड़ा को निलंबित किया गया
  • जिला पंचायत CEO ने लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की पुष्टि की

🏛️ राजनीतिक बयानबाज़ी

  • भाजपा ने सिद्धारमैया सरकार को जिम्मेदार ठहराया
  • विपक्ष ने कहा कि राज्य में लगातार ऐसी घटनाएं प्रशासन की विफलता को दर्शाती हैं

📊 सामाजिक और प्रशासनिक विश्लेषण

🤔 क्यों होता है ऐसा?

  • ग्रामीण क्षेत्रों में संविदा कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलना आम समस्या
  • प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी
  • मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने वाले कार्यस्थल के हालात

📌 जरूरी सुधार:

  1. पंचायत स्तर पर वेतन भुगतान की निगरानी प्रणाली
  2. संविदा कर्मचारियों के लिए हेल्पलाइन और शिकायत निवारण तंत्र
  3. मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग सुविधा

❓ FAQs

❓ चामराजनगर आत्महत्या मामला क्या है?

यह मामला कर्नाटक के एक जलकर्मी द्वारा 27 महीने से वेतन न मिलने और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या करने का है।

❓ सुसाइड नोट में किन लोगों पर आरोप लगाए गए?

PDO रामे गौड़ा और ग्राम पंचायत अध्यक्ष के पति मोहन कुमार पर मानसिक उत्पीड़न और वेतन न देने के आरोप लगाए गए।

❓ प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?

PDO को निलंबित किया गया और SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

❓ इस घटना से क्या सीख मिलती है?

सरकारी तंत्र में जवाबदेही और संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

🔚 निष्कर्ष: एक पीड़ित की पुकार और प्रशासन की परीक्षा

चिक्कोसा नायक की आत्महत्या केवल एक व्यक्ति की वेदना नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रशासन की गहरी खामियों की ओर इशारा करती है। यह घटना बताती है कि समय पर वेतन, सम्मानजनक व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल कितनी जरूरी है। अब देखना होगा कि क्या यह मामला सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाने को मजबूर करता है।

External Source: Patrika Report

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