भारत लौटना चाहते थे, पर पासपोर्ट ने रोक दिया – 5 शवों की दर्दनाक कहानी

✈️ पासपोर्ट नियमों ने रोका अंतिम सफर: विदेश में फंसे पांच भारतीय शव

अमेरिका समेत अन्य देशों में पांच भारतीय नागरिकों की मौत के बाद उनके शव भारत नहीं लौट पाए हैं। कारण है – पासपोर्ट नियमों की सख्ती। भारतीय दूतावासों द्वारा जारी एनओसी के बावजूद एयरलाइंस शवों को लाने से इनकार कर रही हैं, जिससे परिवारों की पीड़ा बढ़ती जा रही है।

📋 मामला क्या है? – एक मानवीय संकट की शुरुआत

एनजीओ ‘टीम एड’ और इंडो-अमेरिकन कम्युनिटी लीडर प्रेम भंडारी ने इस गंभीर मुद्दे को उठाया है। उन्होंने बताया कि पांच भारतीय नागरिकों के शव अमेरिका में फंसे हैं, क्योंकि एयरलाइंस मूल पासपोर्ट की मांग कर रही हैं। जबकि भारतीय दूतावासों ने सभी मामलों में No Objection Certificate (NOC) जारी कर दिया है।

🧾 शवों की सूची और विवरण

  1. प्रदीप कुमार (अमेरिका)
    • मौत: गोली लगने से
    • समय: जुलाई 2025
    • समस्या: पासपोर्ट खो गया, एयरलाइंस ने शव ले जाने से इनकार किया।
  2. सचिन कुमार (अमेरिका)
    • मौत: ब्रेन स्ट्रोक
    • समय: जुलाई 2025
    • समस्या: पासपोर्ट विदेशी अधिकारियों के पास, हरियाणा का परिवार अंतिम दर्शन से वंचित।
  3. हरदीप सिंह (टेक्सास बॉर्डर)
    • मौत: डिहाइड्रेशन
    • समय: जुलाई 2025
    • समस्या: बॉर्डर क्रॉसिंग के दौरान पासपोर्ट खो गया।
  4. अभी सलारिया (अमेरिका)
    • मौत: आत्महत्या
    • समय: अक्टूबर 2025
    • समस्या: पासपोर्ट फटा या गायब, एयरलाइंस ने एनओसी को मान्यता नहीं दी।
  5. प्रवीण यादव (अमेरिका)
    • मौत: कारण अस्पष्ट
    • समय: जुलाई 2025
    • समस्या: पासपोर्ट न होने के कारण शव अटका, उत्तर प्रदेश का परिवार आर्थिक संकट में।

🛑 नियमों की दीवार: एनओसी के बावजूद शवों की वापसी क्यों रुकी?

भारतीय दूतावासों ने सभी मामलों में एनओसी जारी कर दी है, जो सामान्यतः शवों की वापसी के लिए पर्याप्त होती है। लेकिन एयरलाइंस का कहना है कि भारतीय इमिग्रेशन नियमों के तहत उन्हें मूल पासपोर्ट दिखाना जरूरी है, वरना उन्हें जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

✍️ विशेषज्ञों की राय

  • प्रेम भंडारी (इंडो-अमेरिकन कम्युनिटी लीडर): “एनओसी को मानवीय आधार पर पासपोर्ट का विकल्प माना जाना चाहिए।”
  • मोहन नन्नापानेनी (टीम एड अध्यक्ष): “विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।”
  • कर्नल संतोष सिंह (परिवार प्रतिनिधि): “बिना पासपोर्ट शव भारत लाने की अनुमति दी जाए।”

⚖️ मानवाधिकार और संवैधानिक पहलू

यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवाधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा है, जो जीवन और गरिमा की रक्षा करता है। यदि सरकार समाधान नहीं देती, तो सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला है।

🌍 प्रवासी भारतीयों के लिए चेतावनी

यह संकट सिर्फ पांच परिवारों का नहीं, बल्कि हर प्रवासी भारतीय के लिए चेतावनी है। लाखों भारतीय विदेशों में रहते हैं, और मृत्यु एक स्वाभाविक घटना है। ऐसे में शवों की वापसी के लिए स्पष्ट और मानवीय गाइडलाइंस जरूरी हैं।

📌 सुझाव

  • इमिग्रेशन विभाग को स्पष्ट निर्देश देने चाहिए कि एनओसी पासपोर्ट का विकल्प हो सकता है।
  • एयरलाइंस को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
  • विदेश मंत्रालय को तेजी से हस्तक्षेप करना चाहिए।

📨 सरकार को भेजे गए पत्र और रिमाइंडर

टीम एड ने गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को कई बार पत्र और रिमाइंडर भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। नवंबर 2, 2025 तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

🧭 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर असर

यदि यह मामला जल्द नहीं सुलझा, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। प्रवासी संगठन अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

❓ FAQs

Q1. क्या एनओसी शवों की वापसी के लिए पर्याप्त है?

हाँ, भारतीय दूतावास द्वारा जारी एनओसी सामान्यतः पर्याप्त होता है, लेकिन एयरलाइंस मूल पासपोर्ट की मांग कर रही हैं।

Q2. शवों की वापसी में सबसे बड़ी बाधा क्या है?

मूल पासपोर्ट की अनुपलब्धता और एयरलाइंस की सख्त नीति।

Q3. क्या सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर रही है?

एनजीओ ने कई बार अपील की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

Q4. क्या सुप्रीम कोर्ट में मामला जा सकता है?

हाँ, प्रवासी संगठन अनुच्छेद 21 के तहत सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

Q5. क्या यह संकट अन्य प्रवासी भारतीयों को भी प्रभावित कर सकता है?

बिलकुल, यह हर प्रवासी भारतीय के लिए चेतावनी है।

🔚 निष्कर्ष: संवेदनशीलता और समाधान की जरूरत

विदेश में फंसे भारतीय शवों की वापसी एक मानवीय और संवैधानिक मुद्दा है। एनओसी के बावजूद शवों को भारत लाने में अड़चनें आ रही हैं। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर इस संकट का समाधान करना चाहिए, ताकि परिवारों को न्याय और मृतकों को सम्मान मिल सके।

External Source: Patrika Report

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