जयपुर हरमाड़ा हादसा: 14 की मौत, 17 गाड़ियों को रौंदता चला गया नशे में धुत डंपर

जयपुर के हरमाड़ा इलाके में सोमवार दोपहर हुए भयावह सड़क हादसे ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया। एक बेकाबू डंपर ने 350 मीटर के दायरे में 17 गाड़ियों को कुचलते हुए 14 लोगों की जान ले ली और 13 अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया। हादसे के बाद पूरे शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है।

📍 हादसे की भयावहता: चंद सेकंड में तबाही

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हादसा इतना भीषण था कि कुछ ही पलों में सड़क पर लाशें बिछ गईं। कई शवों के अंग कटकर दूर-दूर तक बिखर गए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि डंपर चालक ने रॉन्ग साइड से आते हुए एक के बाद एक गाड़ियों को टक्कर मारनी शुरू की और तब तक नहीं रुका जब तक वह एक ट्रेलर से नहीं टकराया।

🧑‍⚕️ घायल अभी भी जिंदगी से जूझ रहे हैं

घायलों में सात की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। अन्य घायल कांवटिया अस्पताल और निजी अस्पतालों में इलाजरत हैं।

घायलों की सूची में शामिल हैं:

  • वर्षा कुमारी
  • दानिश
  • अजय पारीक
  • मनोज
  • देशराज
  • कमल
  • ज्ञानरंजन

🚚 चालक की पहचान और नशे की पुष्टि

पुलिस जांच में सामने आया कि डंपर चालक कल्याण मीणा नशे की हालत में था। वह जयपुर जिले के विराटनगर का निवासी है। हादसे से कुछ देर पहले उसकी एक कार चालक से कहासुनी हुई थी, जिसके बाद उसने डंपर को रॉन्ग साइड भगाते हुए ताबड़तोड़ टक्करें मारनी शुरू कर दी।

🧾 मृतकों की पहचान: 12 की पुष्टि, 2 शव अनजान

हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के निवासी शामिल हैं। 14 मृतकों में से 12 की पहचान हो चुकी है, जबकि दो शवों की पहचान अब भी नहीं हो पाई है।

मृतकों की सूची:

  1. गिरजा कंवर (55)
  2. सुरेश मीणा (35)
  3. महेश मीणा (35)
  4. विनोद मालपानी (44)
  5. भीखी बाई (50)
  6. महेंद्र बुनकर (38)
  7. दशरथ (41)
  8. भावना वर्मा उर्फ भानु (7)
  9. रामशंकर (45)
  10. श्रवण सैनी (35)
  11. अनूप (19)
  12. राजेंद्र गोरा (62)

🚑 एंबुलेंस सेवा पर उठे सवाल

हादसे के बाद पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस कर्मियों ने शवों को ले जाने के लिए मनमाना किराया वसूला। निवाई तक शव ले जाने के लिए 2200 रुपये तक लिए गए। मृतक सुरेश और मुरली मीणा के परिजनों ने कहा कि सरकार की ओर से निशुल्क सुविधा नहीं दी गई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया:

  • जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि जिन एंबुलेंस ने पैसे लिए हैं, वह राशि परिजनों को लौटाई जाएगी।
  • जिम्मेदारों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

🕵️‍♂️ प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

इस हादसे ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • नो एंट्री क्षेत्र में इतना बड़ा वाहन कैसे घुसा?
  • नशे में धुत चालक को समय रहते क्यों नहीं रोका गया?
  • ट्रैफिक पुलिस की निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

🧑‍⚖️ सरकार की कार्रवाई: जांच समिति गठित, निलंबन भी

राजस्थान सरकार ने हादसे के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए एक 7 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।

जांच समिति में शामिल अधिकारी:

  • ADM South
  • Additional DCP
  • RTO
  • Project Director NHAI
  • SE, PWD
  • Additional DCP Traffic
  • SDM Rampur Dabri

निलंबित अधिकारी:

  • एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर
  • एक ASI
  • तीन अन्य ट्रैफिक कर्मी

📊 राजस्थान में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या

यह हादसा पिछले एक महीने में राजस्थान में हुआ चौथा बड़ा सड़क हादसा है। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सड़क दुर्घटनाओं में 58 लोगों की जान जा चुकी है।

अन्य प्रमुख हादसे:

  • अजमेर हाईवे पर ट्रक की टक्कर से 15 मौतें
  • कोटा में बस पलटने से 12 घायल
  • उदयपुर में बाइक सवारों की टक्कर से 7 मौतें

❓ FAQs

Q1: जयपुर हरमाड़ा हादसा कब हुआ?

A1: यह हादसा सोमवार, 3 नवंबर 2025 को दोपहर में हुआ।

Q2: कितने लोगों की मौत हुई?

A2: हादसे में 14 लोगों की मौत हुई और 13 घायल हुए।

Q3: डंपर चालक कौन था और उसकी क्या स्थिति है?

A3: चालक का नाम कल्याण मीणा है, जो नशे में था और घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है।

Q4: क्या सरकार ने कोई कार्रवाई की है?

A4: हां, एक जांच समिति गठित की गई है और पांच ट्रैफिक अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

Q5: क्या पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलेगा?

A5: प्रशासन ने एंबुलेंस शुल्क वापस करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

🔚 निष्कर्ष: एक हादसा, कई सवाल

जयपुर हरमाड़ा हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन गया है। पीड़ित परिवारों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई सिर्फ जांच से नहीं हो सकती। अब समय है कि सरकार सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे और ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोके।

External Source: Patrika Report

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