दोस्ती से दूरी तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी एक-दूसरे को “अच्छा दोस्त” कहते थे। दोनों की गले मिलती तस्वीरें, स्टेडियम रैलियों में साथ मंच साझा करना और आपसी तारीफें दुनिया भर में चर्चा का विषय रहीं। लेकिन अब इस दोस्ती में खटास आ चुकी है।
बीते कुछ महीनों में ट्रंप के टैरिफ फैसले, भारत की रूस से तेल खरीद, और अमेरिका का पाकिस्तान की ओर झुकाव — इन सभी ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है।
25% टैरिफ और ‘डेड’ अर्थव्यवस्था वाली टिप्पणी
ताज़ा विवाद तब भड़का जब ट्रंप ने भारत पर 25% आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया। उन्होंने यह कदम भारत के रूस से तेल खरीदने पर उठाया। इसके साथ ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड” तक कह दिया।
व्हाइट हाउस सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की यह नाराज़गी व्यापार वार्ताओं में धीमी प्रगति को लेकर है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह पाकिस्तान के साथ किसी रणनीतिक गठजोड़ का संकेत नहीं, बल्कि वार्ता में दबाव बनाने की कोशिश है
रूस से तेल और यूक्रेन युद्ध का विवाद
ट्रंप का आरोप है कि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है और फिर उसे ओपन मार्केट में मुनाफे पर बेच रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को यूक्रेन में हो रही मौतों की परवाह नहीं है। इसके चलते वह भारत पर टैरिफ बढ़ाएंगे।
अमेरिका पहले भी रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव डालता रहा है, लेकिन भारत का कहना है कि यह खरीद वैश्विक बाजार परिस्थितियों के कारण आवश्यक है। भारत का तर्क है कि यूरोप ने अपने पारंपरिक तेल आपूर्तिकर्ताओं से सप्लाई मोड़ दी, जिसके चलते रूस से खरीद बढ़ानी पड़ी।
पाकिस्तान फैक्टर और कश्मीर विवाद
रिश्तों में तनाव की एक बड़ी वजह ट्रंप का पाकिस्तान के करीब आना भी है। मई में पाकिस्तान से आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य झड़प हुई। इसके बाद ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की और दोनों देशों में “शांति कराई”।
मोदी सरकार के लिए यह दावा असहज करने वाला है क्योंकि भारत हमेशा कहता आया है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी तीसरे पक्ष का दखल स्वीकार्य नहीं।
ट्रंप ने पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी कोशिशों की तारीफ भी की और वहां तेल अन्वेषण समझौते का ऐलान किया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि एक दिन भारत को पाकिस्तान से तेल खरीदना पड़ सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया और सावधानीपूर्ण रुख
ट्रंप के बयानों के बावजूद, भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया शुरुआती दिनों में संयमित रही। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देश “न्यायपूर्ण और संतुलित व्यापार समझौते” की दिशा में काम कर रहे हैं।
हालांकि, बाद में विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के आरोपों को “अनुचित और बेबुनियाद” बताया और कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि आलोचना करने वाले देश खुद भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं
विशेषज्ञों की चेतावनी
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 25 सालों से चली आ रही द्विपक्षीय साझेदारी को ऐसे बयानों और कदमों से खतरा हो सकता है।
पूर्व विदेश मंत्रालय सलाहकार अशोक मलिक का कहना है कि यह “रिश्तों की बड़ी परीक्षा” है। वहीं प्रोफेसर श्रीराम सुंदर चूलिया के अनुसार, पाकिस्तान को लेकर ट्रंप की प्रशंसा ने भारत का मूड “खराब” किया है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि यह केवल ट्रंप की अस्थायी रणनीति है और जल्द ही तस्वीर बदल सकती है।
निष्कर्ष
कभी गर्मजोशी से भरे मोदी-ट्रंप रिश्ते आज तनावपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। टैरिफ, रूस से तेल खरीद, और पाकिस्तान की राजनीति जैसे मुद्दों ने इस दोस्ती में दरार डाल दी है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह रिश्ते फिर से पटरी पर आते हैं या कड़वाहट गहरी होती जाती है