बिहार में 64.66% वोटिंग के पीछे बदलाव की लहर! प्रशांत किशोर बोले- जन सुराज की सरकार तय

📌 बिहार चुनाव 2025: पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग पर गरमाई सियासत, प्रशांत किशोर बोले- बदलाव की लहर है तेज

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 64.66% की रिकॉर्ड वोटिंग ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस ऐतिहासिक मतदान को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। वहीं, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इसे बदलाव की लहर करार देते हुए कहा है कि यह वोटिंग सरकार बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि नई व्यवस्था की मांग के लिए हुई है।

🔍 बदलाव की बयार: प्रशांत किशोर का दावा

प्रशांत किशोर ने गयाजी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि 14 नवंबर को बिहार में इतिहास लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान इस बात का संकेत है कि जनता अब पारंपरिक राजनीति से ऊब चुकी है और एक नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में है।

🗣️ पीके के मुख्य दावे:

  • “इतनी वोटिंग सरकार बनाए रखने के लिए नहीं, बदलाव के लिए होती है।”
  • “जनता को जन सुराज के रूप में नया विकल्प मिला है।”
  • “युवाओं और प्रवासी मजदूरों की भागीदारी ने इस बार चुनाव को नया मोड़ दिया है।”

📊 वोटिंग प्रतिशत ने तोड़ा आजादी के बाद का रिकॉर्ड

बिहार में 6 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान में 64.66% वोटिंग दर्ज की गई, जो आजादी के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस आंकड़े ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है और कई सवाल खड़े किए हैं।

🧾 वोटिंग से जुड़े प्रमुख तथ्य:

  1. कुल 121 सीटों पर मतदान हुआ।
  2. बीजेपी ने 100 सीटें जीतने का दावा किया।
  3. महागठबंधन ने भी अपनी जीत की घोषणा की।
  4. जन सुराज ने इसे बदलाव की शुरुआत बताया।

🧳 प्रवासी मजदूर बने चुनावी ‘X फैक्टर’ 💥

प्रशांत किशोर ने दावा किया कि इस बार प्रवासी मजदूरों ने चुनाव में अप्रत्याशित भूमिका निभाई है। छठ पर्व के बाद बड़ी संख्या में मजदूर अपने घरों में रुके और अपने साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों का भी वोट डलवाया।

🔦 क्या कहते हैं पीके?

  • “पहली बार प्रवासी मजदूरों ने वोटिंग में सक्रिय भागीदारी की।”
  • “यह वोटिंग बदलाव के लिए हुई है, न कि किसी पार्टी को बनाए रखने के लिए।”
  • “महिलाएं और प्रवासी मजदूर इस चुनाव के ‘X फैक्टर’ हैं।”

👥 युवाओं की भागीदारी ने बदला समीकरण

इस बार के चुनाव में युवाओं का मतदान प्रतिशत सबसे अधिक रहा। प्रशांत किशोर ने इसे बदलाव की स्पष्ट तस्वीर बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों से राजनीतिक विकल्पों की कमी के कारण युवा वर्ग चुनावों से उदासीन हो गया था, लेकिन अब जन सुराज ने उन्हें एक नया रास्ता दिखाया है।

📌 युवाओं की भूमिका:

  • पहली बार युवा मतदाता बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचे।
  • सोशल मीडिया पर जन सुराज के कैंपेन को मिला जबरदस्त समर्थन।
  • युवाओं ने जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर मतदान किया।

🏛️ एनडीए और महागठबंधन के दावे 🔁

जहां बीजेपी ने 121 में से 100 सीटें जीतने का दावा किया है, वहीं महागठबंधन ने भी बंपर वोटिंग को बदलाव का संकेत बताया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और महागठबंधन को समर्थन दे रही है।

🧮 प्रमुख राजनीतिक दावे:

  • बीजेपी: महिलाओं का समर्थन मिला, 100 सीटें जीतेंगे।
  • महागठबंधन: बंपर वोटिंग बदलाव का संकेत है।
  • जन सुराज: जनता ने नया विकल्प चुना है।

📈 बिहार की राजनीति में नया मोड़? ⚖️

बिहार की राजनीति में एक पुरानी कहावत है—”जब वोटिंग बढ़े, सत्ता बदले!” इस बार के आंकड़े और जनभावना इसी ओर इशारा कर रहे हैं। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पहली बार चुनावी मैदान में है और उन्होंने इसे जनता की उम्मीदों का प्रतीक बताया है।

🔍 विश्लेषण:

  • जन सुराज ने पारंपरिक दलों को चुनौती दी है।
  • जनता जाति और धर्म से ऊपर उठकर विकास की बात कर रही है।
  • बदलाव की मांग अब जन आंदोलन बन चुकी है।

❓ FAQs

Q1. बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण में कितनी वोटिंग हुई?

64.66% वोटिंग हुई, जो आजादी के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

Q2. प्रशांत किशोर ने क्या दावा किया है?

उन्होंने कहा कि यह वोटिंग बदलाव के लिए हुई है और जन सुराज की सरकार बनने जा रही है।

Q3. प्रवासी मजदूरों की क्या भूमिका रही?

छठ के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों ने रुककर वोटिंग की, जिससे चुनावी समीकरण बदले।

Q4. युवाओं की भागीदारी कैसी रही?

इस बार युवाओं का मतदान प्रतिशत सबसे अधिक रहा, जो बदलाव की ओर इशारा करता है।

Q5. क्या जन सुराज पहली बार चुनाव लड़ रही है?

हां, जन सुराज पार्टी पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव में भाग ले रही है।

🧾 निष्कर्ष: बदलाव की दस्तक दे रही है बिहार की जनता

बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण की बंपर वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की जनता अब नई व्यवस्था और राजनीतिक विकल्प की तलाश में है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने इस चुनाव को बदलाव की दिशा में पहला कदम बताया है। 14 नवंबर को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि यह बदलाव कितना गहरा और व्यापक होगा।

External Source: Patrika Report

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