बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम की आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले, सासाराम में बने स्ट्रांग रूम के बाहर देर रात अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह पूरा मामला स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा बंद होने और एक संदिग्ध ट्रक के परिसर में प्रवेश करने के बाद शुरू हुआ, जिसने ईवीएम की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना के बाद स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को आखिरकार प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें एक प्रत्याशी और एक पत्रकार समेत कई लोग घायल हो गए। जिला प्रशासन और चुनाव लड़ रहे दलों के बीच पैदा हुए इस गतिरोध ने न केवल सासाराम, बल्कि पूरे बिहार के चुनावी माहौल को गरमा दिया है।
🏛️ स्ट्रांग रूम में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर बढ़ता आक्रोश
बिहार के सासाराम स्थित तकिया बाजार समिति परिसर, जिसे दिनारा विधानसभा क्षेत्र के ईवीएम रखने के लिए स्ट्रांग रूम बनाया गया है, बुधवार देर रात अचानक राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया। विवाद तब गहराया जब आरजेडी (RJD) समेत अन्य विपक्षी दलों के उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए।
कार्यकर्ताओं का मुख्य आक्रोश दो बिंदुओं पर केंद्रित था:
- सीसीटीवी कैमरा बंद होना: प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि स्ट्रांग रूम के अंदर और प्रवेश द्वार पर लगे सीसीटीवी कैमरे कई घंटों से बंद थे। इस वजह से ईवीएम की 24×7 निगरानी बाधित हो रही थी।
- ट्रक की संदिग्ध एंट्री: इसी बीच, बाजार समिति परिसर के अंदर एक ट्रक ने प्रवेश किया और कथित तौर पर लगभग तीन घंटे तक स्ट्रांग रूम के आस-पास मौजूद रहा। जब ट्रक बाहर निकलने लगा, तो गेट पर खड़े सतर्क कार्यकर्ताओं ने उसे तुरंत रोक लिया।
प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल उठाया कि जब स्ट्रांग रूम की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, तब बिना किसी उचित जाँच या सूचना के एक बड़े ट्रक को अंदर जाने की अनुमति क्यों दी गई? उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इस ट्रक का इस्तेमाल ईवीएम में छेड़छाड़ या किसी अन्य अनुचित गतिविधि के लिए किया गया हो सकता है।
🔴 ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों ने बढ़ाया बवाल
ट्रक की एंट्री और सीसीटीवी बंद होने की घटना ने तुरंत ही प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को एकजुट कर दिया। देर रात तकिया बाजार समिति के गेट पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए और ईवीएम में छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। सातों विधानसभा क्षेत्रों के अधिकांश प्रत्याशी, जिसमें दिनारा समेत कई महत्वपूर्ण सीटें शामिल थीं, अपने-अपने समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तुरंत सीसीटीवी फुटेज जारी करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि ट्रक किस उद्देश्य से अंदर आया था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्थिति अनियंत्रित होती गई और नारेबाजी तेज हो गई।
🚓 देर रात पुलिस का सख्त एक्शन: लाठीचार्ज और घायलों की खबर
विरोध और हंगामा रात करीब 2:30 बजे अपने चरम पर पहुँच गया, जिसके बाद जिला प्रशासन को भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस ने पहले तो प्रदर्शनकारियों को शांति बनाए रखने और तितर-बितर होने की अपील की।
हालाँकि, जब प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करने लगे, तब पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को बलपूर्वक हटाया। इस अचानक हुए लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
🤕 प्रत्याशी और पत्रकार भी हुए जख्मी
पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में न केवल आम समर्थक, बल्कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े लोग भी चोटिल हुए। खबर है कि सासाराम के प्रत्याशी सत्येंद्र शाह और एक स्थानीय पत्रकार भी पुलिस की लाठी से जख्मी हो गए। यह घटना एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मीडिया की उपस्थिति और प्रत्याशियों के अधिकारों पर भी सवाल खड़े करती है।
इस घटना के बाद, हालांकि, पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने लाठीचार्ज की घटना को गलत और बेबुनियाद बताया है, जिससे पुलिस और प्रशासन के बयानों में विरोधाभास दिखाई दे रहा है।
📝 प्रशासनिक स्पष्टीकरण और कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए और जनता के बीच फैले संदेह को दूर करने की कोशिश की।
जिलाधिकारी उदिता सिंह ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चैनारी विधानसभा के निर्वाचित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण (Explanation) माँगा है। उन्होंने यह जानकारी दी है कि विवादित ट्रक चैनारी विधानसभा क्षेत्र से संबंधित था और उसमें खाली बक्से पड़े थे, न कि ईवीएम या अन्य संवेदनशील सामग्री।
जिलाधिकारी का वक्तव्य: “जांच में पता चला है कि वह ट्रक चैनारी विधानसभा क्षेत्र का था और उसमें ईवीएम से जुड़े खाली बक्से थे, जिनका उपयोग चुनाव प्रक्रिया के लिए किया जाना था। सीसीटीवी बंद होने के आरोपों पर हम जांच कर रहे हैं।”
🛡️ तकिया बाजार समिति: पुलिस छावनी में तब्दील
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए, तकिया बाजार समिति के प्रवेश द्वार को पूरी तरह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि मतगणना की प्रक्रिया तक स्ट्रांग रूम की सुरक्षा अभेद्य बनी रहे।
📱 आरजेडी ने मुजफ्फरपुर का वीडियो किया शेयर: सुरक्षा पर राष्ट्रव्यापी बहस
सासाराम की घटना के बीच, मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोशल मीडिया पर एक और वीडियो साझा करके ईवीएम सुरक्षा के मुद्दे को राज्यव्यापी बना दिया।
आरजेडी ने दावा किया कि मुजफ्फरपुर स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा भी बंद है। पार्टी ने आरोप लगाया कि ऐसी ही खबरें बिहार के अन्य जिलों से भी मिल रही हैं, जो चुनाव आयोग की भूमिका और ईवीएम सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आरजेडी का दावा: “यह सिर्फ सासाराम का मामला नहीं है। मुजफ्फरपुर सहित अन्य कई स्थानों पर स्ट्रांग रूम की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है। हम चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हैं और धांधली की आशंका जताते हैं।”
आरजेडी द्वारा यह वीडियो साझा करने के बाद, सोशल मीडिया पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई, जिससे बिहार चुनाव परिणाम से पहले राजनीतिक पारा और ऊपर चढ़ गया।
✅ प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया: फुटेज जारी कर दावों को नकारा
मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने आरजेडी के इन आरोपों पर त्वरित प्रतिक्रिया दी। प्रशासन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से स्ट्रांग रूम के सीसीटीवी फुटेज का एक वीडियो साझा किया और आरजेडी के दावों को झूठा, भ्रामक और अफवाह करार दिया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पुख्ता है और कैमरा एक सेकंड के लिए भी बंद नहीं किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट को खारिज करते हुए जनता से किसी भी भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करने की अपील की।
मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन का खंडन: “सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावे पूरी तरह निराधार हैं। स्ट्रांग रूम की निगरानी लगातार हो रही है। ईवीएम सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है।”
🔍 चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा का महत्व
यह पूरा घटनाक्रम, चाहे वह सासाराम में ट्रक की एंट्री हो या मुजफ्फरपुर में सीसीटीवी बंद होने का आरोप, भारत के चुनावी लोकतंत्र में ईवीएम सुरक्षा और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है।
📊 राजनीतिक दलों की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- जनमत पर भरोसा: चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है ताकि जनता का विश्वास जनमत पर बना रहे।
- हार-जीत से परे: मतगणना से पहले की सुरक्षा में चूक के छोटे से भी संकेत, चुनाव के नतीजों की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा सकते हैं, भले ही नतीजा कुछ भी हो।
- प्रशासन की जिम्मेदारी: यह जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर हर तरह की आशंका को दूर करे और 24 घंटे की निगरानी को सुनिश्चित करे।
📜 सुरक्षा प्रोटोकॉल और नियमों का उल्लंघन?
चुनाव आयोग (EC) द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा की जिम्मेदारी तीन-स्तरीय होती है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सबसे अंदरूनी परत शामिल होती है। इसके अलावा, सीसीटीवी निगरानी, लगातार वीडियोग्राफी, और प्रत्याशियों के एजेंटों को बाहर से निगरानी की अनुमति देना अनिवार्य है। बिहार चुनाव परिणाम से पहले इन नियमों में किसी भी तरह की ढील एक गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
🌐 भारत में ईवीएम विवादों का इतिहास और संदर्भ
सासाराम और मुजफ्फरपुर में उपजा यह विवाद, भारतीय चुनावों में ईवीएम को लेकर समय-समय पर उठे सवालों की एक लंबी शृंखला का हिस्सा है।
- सर्वदलीय बैठकें: पूर्व में भी ईवीएम की विश्वसनीयता और सुरक्षा को लेकर कई राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से शिकायतें की हैं।
- वीवीपीएटी (VVPAT) की मांग: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, वीवीपीएटी (Voter Verifiable Paper Audit Trail) मशीनों का उपयोग शुरू किया गया था, ताकि मतदाता यह सुनिश्चित कर सकें कि उनका वोट सही जगह पर दर्ज हुआ है।
- उच्च न्यायालय का रुख: चुनाव से जुड़े ऐसे विवादों में अक्सर न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा है, जिसने जिला प्रशासन और आयोग को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
यह संदर्भ दर्शाता है कि किसी भी प्रकार की असामान्य गतिविधि को लेकर दलों और समर्थकों की आशंकाएँ निराधार नहीं होती हैं, बल्कि यह पूर्व अनुभवों और लोकतंत्र में सुरक्षा की उच्च अपेक्षाओं का परिणाम है।
🛑 निष्कर्ष: लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा
सासाराम में देर रात का यह हंगामा और पुलिस का लाठीचार्ज न केवल एक स्थानीय घटना है, बल्कि यह बिहार चुनाव परिणाम की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों और सीसीटीवी बंद होने की खबरों ने चुनाव आयोग के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है।
जिला प्रशासन ने भले ही ट्रक में खाली बक्से होने की बात कहकर स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की हो, लेकिन लाठीचार्ज में प्रत्याशी के घायल होने और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब बिहार चुनाव परिणाम स्पष्ट होंगे। यह घटना बताती है कि लोकतंत्र में न केवल परिणाम मायने रखते हैं, बल्कि परिणाम तक पहुँचने की प्रक्रिया की पवित्रता और पारदर्शिता भी सर्वोच्च होनी चाहिए।
❓ Suggested FAQs
Q1: सासाराम में स्ट्रांग रूम के बाहर हंगामा क्यों हुआ?
A: सासाराम के तकिया बाजार समिति स्थित स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा कथित तौर पर बंद होने और एक संदिग्ध ट्रक के परिसर में लगभग तीन घंटे तक मौजूद रहने के कारण ईवीएम में छेड़छाड़ की आशंका को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने हंगामा किया।
Q2: पुलिस लाठीचार्ज में कौन-कौन घायल हुए?
A: पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में सासाराम के प्रत्याशी सत्येंद्र शाह और एक स्थानीय पत्रकार जख्मी हुए।
Q3: ट्रक में क्या था, जिसके प्रवेश को लेकर विवाद हुआ?
A: जिला अधिकारी के स्पष्टीकरण के अनुसार, विवादित ट्रक चैनारी विधानसभा क्षेत्र से संबंधित था और उसमें ईवीएम से जुड़े खाली बक्से (Empty Boxes) पड़े थे।
Q4: आरजेडी ने मुजफ्फरपुर को लेकर क्या आरोप लगाए?
A: आरजेडी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि मुजफ्फरपुर स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा भी बंद है, जो कि ईवीएम सुरक्षा में बड़ी चूक है और धांधली की आशंका को जन्म देता है।
Q5: जिला प्रशासन ने सीसीटीवी बंद होने के आरोपों पर क्या कहा?
A: मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने तुरंत सीसीटीवी फुटेज जारी कर आरजेडी के दावों को झूठा और भ्रामक बताया, और यह स्पष्ट किया कि कैमरा एक सेकंड के लिए भी बंद नहीं हुआ था, तथा सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पुख्ता है।
External Source: Patrika Report
अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे शेयर करें और दूसरों को भी जागरूक करें। NEWSWELL24.COM पर हम ऐसे ही जरूरी और भरोसेमंद जानकारी लाते रहते हैं