National Epilepsy Day 2025: 44% लोग अनजान! मिर्गी चुपचाप शरीर में छिपी रहती है, जानें खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2025: जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

भारत में हर साल 17 नवंबर को National Epilepsy Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है लोगों को मिर्गी जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बारे में जागरूक करना। हैरानी की बात यह है कि करीब 44% लोग शुरुआती लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते, और बीमारी चुपचाप उनके शरीर में मौजूद रहती है।

⚡ मिर्गी क्या है? (Understanding Epilepsy)

मिर्गी (Epilepsy) एक दीर्घकालिक मस्तिष्क विकार है। इसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि अचानक असामान्य हो जाती है, जिससे व्यक्ति को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं।

  • यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है – बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक।
  • दौरे हल्के झटकों से लेकर बेहोशी तक हो सकते हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मिर्गी दुनिया के सबसे आम न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है।

📊 भारत में मिर्गी के मरीजों की संख्या

आईजीआईएमएस (IGIMS) के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया कि:

  • भारत की लगभग 1% आबादी मिर्गी से प्रभावित है।
  • यह संख्या करीब 12 मिलियन (1.2 करोड़) लोगों के बराबर है।
  • अध्ययन में 310 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे।

👉 इसका मतलब है कि हर सौ में से एक व्यक्ति मिर्गी से जूझ रहा है।

👀 मिर्गी के प्रमुख लक्षण जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं

मिर्गी के शुरुआती संकेत अक्सर मामूली लगते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

🔎 आम लक्षण

  1. अचानक घूरना या रुक जाना – लोग इसे थकान समझ लेते हैं, जबकि यह छोटा दौरा हो सकता है।
  2. शरीर का कांपना या झटके आना – हल्के कंपकंपी भी दौरे का हिस्सा हो सकती है।
  3. कुछ सेकंड के लिए चेतना खो देना – व्यक्ति आसपास की आवाज़ों पर प्रतिक्रिया नहीं देता।
  4. ऑरा (Aura) संकेत – दौरे से पहले पेट में हलचल, अजीब गंध, आवाज़ें साफ न सुनाई देना या अचानक डर लगना।
  5. व्यवहार में बदलाव – होंठ चबाना, हाथ मसलना जैसी दोहराव वाली गतिविधियां।

🧪 मिर्गी का निदान कैसे किया जाता है?

मिर्गी की पहचान के लिए कई मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं:

  • न्यूरोलॉजिकल टेस्ट – मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रिया की जांच।
  • रक्त परीक्षण – संक्रमण या आनुवंशिक कारणों की पहचान।
  • जेनेटिक टेस्ट – बच्चों और कुछ वयस्कों में भी महत्वपूर्ण।
  • EEG (Electroencephalogram) – मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि रिकॉर्ड करने वाला टेस्ट।
  • MRI/CT Scan – मस्तिष्क की संरचना में असामान्यताओं की जांच।

🛡️ मिर्गी से बचाव और सुरक्षा उपाय

मिर्गी को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही जीवनशैली और सावधानियां दौरे की संभावना को कम कर सकती हैं।

✅ बचाव के तरीके

  • संतुलित आहार – प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड फूड का सेवन।
  • नींद पूरी करना – नींद की कमी मिर्गी का सबसे आम ट्रिगर है।
  • शराब, ड्रग्स और धूम्रपान से बचें – ये दौरे को बढ़ा सकते हैं।
  • योग और ध्यान – मानसिक शांति और मस्तिष्क संतुलन बनाए रखते हैं।
  • तेज रोशनी से बचाव – फ्लैशिंग लाइट्स कई बार दौरे को ट्रिगर करती हैं।
  • सुरक्षा उपकरण – घर में सुरक्षा फीचर्स और बाहर हेलमेट का प्रयोग।

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: दुनिया में मिर्गी

  • WHO के अनुसार, दुनिया में लगभग 50 मिलियन लोग मिर्गी से प्रभावित हैं।
  • विकसित देशों में भी जागरूकता की कमी के कारण मरीज देर से इलाज कराते हैं।
  • कई देशों में मिर्गी को अब भी सामाजिक कलंक माना जाता है।

👉 भारत में जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं ताकि लोग समय रहते इलाज कर सकें।

📚 मिर्गी और सामाजिक चुनौतियां

मिर्गी सिर्फ एक मेडिकल समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक चुनौतियों से भी जुड़ी है।

  • शिक्षा में बाधा – बच्चों को स्कूल में भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
  • नौकरी में कठिनाई – कई कंपनियां मिर्गी से पीड़ित लोगों को काम पर रखने से हिचकिचाती हैं।
  • सामाजिक कलंक – लोग इसे मानसिक बीमारी समझ लेते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य पर असर – लगातार दौरे और समाज का दबाव मरीज को अवसाद की ओर धकेल सकता है।

🧘‍♀️ जीवनशैली में बदलाव से राहत

मिर्गी के मरीज अगर कुछ आदतें अपनाएं तो जीवन आसान हो सकता है:

  • नियमित दवा का सेवन।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करना।
  • तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान।
  • पर्याप्त नींद लेना।
  • परिवार और दोस्तों को बीमारी के बारे में जानकारी देना।

📅 राष्ट्रीय मिर्गी दिवस का महत्व

हर साल 17 नवंबर को भारत में National Epilepsy Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है:

  • लोगों को मिर्गी के लक्षणों और बचाव के बारे में जागरूक करना।
  • सामाजिक कलंक को खत्म करना।
  • मरीजों को सही समय पर इलाज दिलाना।
  • समाज में सहानुभूति और सहयोग बढ़ाना।

📝 निष्कर्ष (Conclusion)

मिर्गी एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। भारत में लाखों लोग इससे प्रभावित हैं, लेकिन जागरूकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। National Epilepsy Day हमें याद दिलाता है कि समय रहते पहचान और सही इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

❓ FAQs

Q1. मिर्गी क्या है?

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि असामान्य हो जाती है और दौरे पड़ते हैं।

Q2. भारत में कितने लोग मिर्गी से प्रभावित हैं?

करीब 12 मिलियन लोग, यानी लगभग 1% आबादी मिर्गी से प्रभावित है।

Q3. मिर्गी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

अचानक घूरना, शरीर का कांपना, चेतना खोना, अजीब संवेदनाएं और व्यवहार में बदलाव।

Q4. मिर्गी का इलाज कैसे होता है?

दवाओं, EEG, MRI, और जीवनशैली में बदलाव से मिर्गी को नियंत्रित किया जा सकता है।

Q5. क्या मिर्गी पूरी तरह ठीक हो सकती है?

कई मामलों में दवा और सर्जरी से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह व्यक्ति पर निर्भर करता है।

External Source: Patrika Report

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे शेयर करें और दूसरों को भी जागरूक करें। NEWSWELL24.COM पर हम ऐसे ही जरूरी और भरोसेमंद जानकारी लाते रहते हैं

Leave a Comment

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now