बिहार की सत्ता का समीकरण: डिप्टी सीएम पद की अटकलों पर चिराग पासवान का दो टूक जवाब
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की प्रचंड जीत के बाद मंत्रिमंडल के गठन और उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर लगाई जा रही सभी अटकलों पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। नवगठित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद मीडिया से मुखातिब हुए युवा नेता चिराग पासवान ने न सिर्फ डिप्टी सीएम पद की संभावनाओं को सिरे से खारिज किया, बल्कि अपने हालिया राजनीतिक संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अटूट भरोसे को भी बड़ी विनम्रता के साथ स्वीकार किया। उनका यह बयान गठबंधन की राजनीति में त्याग और विश्वास के नए अध्याय को दर्शाता है, जिसने बिहार की राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
🗳️ बिहार विधानसभा चुनाव 2025: NDA की ऐतिहासिक जीत और जनादेश
हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में NDA ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। कुल 243 विधानसभा सीटों में से NDA गठबंधन ने 202 सीटों पर विजय का परचम लहराया, जो कि राज्य के चुनावी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इसके विपरीत, विपक्षी महागठबंधन केवल 35 सीटें ही जीतने में सफल रहा।
NDA की विजय गाथा: 200 सीटों का आंकड़ा
यह दूसरी बार है जब NDA ने बिहार के राज्य चुनावों में 200 सीटों के आंकड़े को पार किया है। इससे पहले, वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 206 सीटें जीती थीं। इस बार की जीत ने न सिर्फ NDA के पारंपरिक वोट बैंक की मजबूती को सिद्ध किया है, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर जनता के विश्वास को भी reaffirmed किया है।
- 2025 विधानसभा चुनाव परिणाम के मुख्य बिंदु:
- कुल सीटें: 243
- NDA द्वारा जीती गई सीटें: 202
- महागठबंधन द्वारा जीती गई सीटें: 35
- ऐतिहासिक संदर्भ: 2010 के बाद दूसरी बार 200+ सीटों पर कब्जा।
📜 शपथ ग्रहण समारोह: नीतीश कुमार का दसवाँ कार्यकाल और नए उप-मुख्यमंत्री
बिहार में NDA की शानदार विजय के बाद, जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। यह दसवीं बार है जब नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, जो भारतीय राजनीति में उनके दीर्घकालिक और प्रभावशाली करियर को दर्शाता है।
उप-मुख्यमंत्री पद पर नए चेहरे
मुख्यमंत्री के अलावा, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो प्रमुख नेताओं ने भी बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है:
- सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary): भाजपा के फायरब्रांड नेता और ओबीसी वर्ग से आने वाले सम्राट चौधरी को उप-मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
- विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha): विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रहे विजय कुमार सिन्हा को भी यह महत्वपूर्ण पद दिया गया है, जिससे भाजपा ने अपने कोर वोट बैंक और अनुभवी नेतृत्व को मजबूत किया है।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA गठबंधन के कई अन्य शीर्ष नेतागण मौजूद रहे, जिन्होंने नई सरकार के गठन पर अपना समर्थन और आशीर्वाद दिया।
🎙️ चिराग पासवान की ‘लालच’ पर टिप्पणी: एक युवा नेता का त्याग
शपथ ग्रहण समारोह से पहले, मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान की पार्टी को भी उप-मुख्यमंत्री का पद मिल सकता है, खासकर गठबंधन की जीत में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए। इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए चिराग पासवान ने एक बड़ा ही भावुक और सीधा जवाब दिया है।
“मुझसे बड़ा लालची कोई नहीं होगा”
जब पत्रकारों ने उनसे डिप्टी सीएम पद के बारे में पूछा, तो चिराग पासवान ने एक सवालिया लहजे में अपनी बात रखी:
“चिराग पासवान और कितना लालची हो सकता है? अगर डिप्टी सीएम पोस्ट की मांग मैं करता तो यह लालच की बात होती। आप सोचकर देखिए, मैं कहां से आया हूँ। 2021 में सभी ने मेरे संघर्ष को देखा है। तब एक आदमी भी आपको मेरे आसपास नहीं दिखता होगा। उस समय ऐसा लगता था कि एक कार्यक्रम करना है तो 10 लोग कहाँ से आएँगे। उस समय मुट्ठी भर लोग हमारे साथ थे।”
उनका यह बयान उनके पिछले कुछ वर्षों के अकेले संघर्ष और राजनीतिक वनवास को दर्शाता है, जब पार्टी में विभाजन और पारिवारिक मतभेदों के चलते उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
💔 2021 का संघर्ष और PM मोदी का अटूट विश्वास
चिराग पासवान ने अपने वर्तमान राजनीतिक सफर की तुलना अपने कठिन दौर से की, जब उनकी पार्टी को न केवल तोड़ा गया बल्कि उन्हें पारिवारिक स्तर पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
‘अकेले सांसद’ की पार्टी से मजबूत ताकत तक
चिराग पासवान ने अपनी पार्टी की तत्कालीन स्थिति का वर्णन करते हुए कहा:
“2024 चुनाव के दौरान अकेले सांसद की पार्टी थी मेरी, जिसे 2021 में तोड़ दिया गया था। मुझे घर-परिवार से भी निकाल दिया गया था। उस अकेले सांसद पर पीएम मोदी ने भरोसा जताया और बिहार में 5 सीटें लड़ने को दीं। यह विश्वास मेरे लिए बड़ी बात है।”
चिराग का यह बयान इस बात पर जोर देता है कि उनके लिए पद से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्वास और समर्थन मायने रखता है। उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें कमजोर करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन पीएम मोदी ने उन पर भरोसा जताया, जो उनकी राजनीतिक वापसी का आधार बना।
🎯 लोकसभा और विधानसभा में प्रदर्शन: भरोसे पर खरा उतरना
चिराग पासवान ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के भरोसे को सिर्फ माना ही नहीं, बल्कि अपने चुनावी प्रदर्शन से उस पर खरा उतरकर भी दिखाया।
5 सीटें बनाम 19 सीटों का सफर
- लोकसभा चुनाव 2024:
- पीएम मोदी के भरोसे पर, लोजपा (रामविलास) ने 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा।
- पार्टी ने इन सभी 5 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की, जिससे लोकसभा में उनकी स्थिति मजबूत हुई।
- विधानसभा चुनाव 2025:
- लोकसभा में सफल प्रदर्शन के बाद, उनकी “जीरो विधायक वाली पार्टी” (जैसा कि चिराग ने खुद कहा) को विधानसभा चुनाव में 29 सीटें लड़ने को मिलीं।
- पार्टी ने इन 29 सीटों में से 19 सीटों पर शानदार जीत हासिल की।
इस प्रदर्शन के बाद, चिराग पासवान की पार्टी को गठबंधन में महत्वपूर्ण जगह मिली। उनके 2 विधायकों को मंत्री पद की शपथ भी दिलवाई गई है।
🙏 मंत्री पद और पिता का आशीर्वाद: संतुष्टि का भाव
पार्टी के दो विधायकों को मंत्री पद मिलने के बाद चिराग पासवान ने अपने लिए किसी भी अतिरिक्त पद की मांग को लालच बताया। उनका मानना है कि उन्हें जो कुछ भी मिला है, वह उनके दिवंगत पिता और दिग्गज नेता रामविलास पासवान का आशीर्वाद है।
- चिराग पासवान का तर्क:
- अकेले सांसद से शुरू होकर पार्टी ने 19 विधानसभा सीटें जीतीं।
- गठबंधन ने पहले ही दो विधायकों को मंत्री पद देकर सम्मान दिया है।
- इन सबके बाद भी किसी बड़े पद की मांग करना “अत्यधिक लालच” होगा।
यह दर्शाता है कि चिराग पासवान न केवल गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं, बल्कि अपनी सीमित ताकत के बावजूद मिली बड़ी सफलता से संतुष्ट और आभार व्यक्त कर रहे हैं। उनका यह रुख उन्हें अन्य गठबंधन सहयोगियों से अलग और एक परिपक्व नेता के रूप में स्थापित करता है।
🔍 राजनीतिक निहितार्थ: चिराग का ‘त्याग’ एक रणनीति?
चिराग पासवान द्वारा डिप्टी सीएम पद को नकारना सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
भविष्य की राजनीति पर ध्यान केंद्रित
विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान अपने राजनीतिक करियर में अभी लंबा सफर तय करना चाहते हैं।
- पीएम मोदी से निकटता: डिप्टी सीएम पद को ठुकरा कर उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी अटूट वफादारी और विश्वास को दर्शाया है। यह भविष्य में उन्हें केंद्र की राजनीति में और बड़ा स्थान दिला सकता है।
- ‘संघर्षशील’ नेता की छवि: इस बयान से उनकी ‘संघर्षशील’, ‘लालच-मुक्त’ और ‘आत्मनिर्भर’ नेता की छवि और मजबूत होगी, जो बिहार के युवाओं और उनके समर्थक वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाएगा।
- पार्टी विस्तार पर फोकस: बड़े पद की ज़िम्मेदारी से मुक्त होकर वह अपनी पार्टी लोजपा (रामविलास) के संगठन को बिहार के कोने-कोने तक मजबूत करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
यह निर्णय तात्कालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर लिया गया प्रतीत होता है।
🛣️ बिहार की राजनीतिक विरासत और रामविलास पासवान का प्रभाव
चिराग पासवान की राजनीति को उनके पिता, दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की विरासत से अलग करके नहीं देखा जा सकता। रामविलास पासवान भारतीय राजनीति के सबसे बड़े ‘मौसम वैज्ञानिकों’ में से एक माने जाते थे, जिन्होंने हमेशा समय पर सही गठबंधन का चुनाव किया।
चिराग ने अपने बयान में अपने पिता के आशीर्वाद का जिक्र करके यह संदेश दिया है कि वह अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा और जनता की सेवा के प्रति समर्पण को आगे बढ़ा रहे हैं। रामविलास पासवान ने भी कभी व्यक्तिगत पद की बजाय दलितों और पिछड़ों के उत्थान को प्राथमिकता दी थी। चिराग का यह कदम उनकी उसी विरासत को मजबूती प्रदान करता है।
🚀 बिहार की नई सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियां
NDA की नई सरकार, जिसके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, के सामने अब कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
- रोजगार सृजन: बिहार में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना सबसे बड़ी चुनौती है, जिसके लिए नई औद्योगिक नीतियों और निवेश को आकर्षित करने की आवश्यकता होगी।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार: राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना एक आवश्यक कदम है।
- कानून और व्यवस्था (Law and Order): राज्य में सुशासन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को और बेहतर बनाना नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
- ढाँचागत विकास (Infrastructure Development): ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़कों, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार करना।
- कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण: किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए नई योजनाओं को लागू करना।
गठबंधन के भीतर चिराग पासवान जैसे युवा और ऊर्जावान नेता का मजबूत समर्थन इन चुनौतियों का सामना करने में सरकार के लिए एक बड़ा बल साबित होगा।
🤝 निष्कर्ष: विश्वास की जीत, लालच का त्याग
बिहार में NDA की ऐतिहासिक जीत के बाद, उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर चिराग पासवान का बयान न केवल राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों पर एक पूर्णविराम लगाता है, बल्कि यह एक परिपक्व और दूरदर्शी राजनीति का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है। 2021 के कठिन संघर्ष से उबरकर, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास और अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण को सबसे बड़ी जीत माना है।
डिप्टी सीएम पद को ‘लालच’ कहकर ठुकराना और दो विधायकों को मंत्री पद मिलने पर संतोष व्यक्त करना, चिराग पासवान की विनम्रता और गठबंधन धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। उनका यह कदम भारतीय राजनीति में पद की दौड़ से हटकर, जनता के विश्वास और संगठन की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की एक नई मिसाल पेश करता है। आने वाले समय में, यह स्पष्ट हो जाएगा कि चिराग पासवान का यह त्याग उनकी पार्टी और बिहार की राजनीति के लिए क्या नए आयाम स्थापित करता है।
❓ सुझाए गए अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न.
1. चिराग पासवान ने डिप्टी सीएम पद को लेकर क्या बयान दिया है?
चिराग पासवान ने डिप्टी सीएम पद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि, “मुझसे बड़ा लालची कोई नहीं होगा” अगर वे इस पद की मांग करते, जबकि उन्हें और उनकी पार्टी को इतना कुछ मिल चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे और उनकी पार्टी को मिली सीटों की सफलता को सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
2. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA को कितनी सीटें मिली हैं?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने कुल 202 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि बहुमत का आंकड़ा 122 है।
3. नीतीश कुमार ने कितनी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है?
जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के प्रमुख नीतीश कुमार ने 2025 के चुनाव के बाद 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।
4. लोजपा (रामविलास) के कितने विधायकों को मंत्री पद मिला है?
गठबंधन की जीत के बाद, चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के दो विधायकों को बिहार मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ दिलवाई गई है।
5. चिराग पासवान ने अपने संघर्ष के किस दौर का उल्लेख किया?
चिराग पासवान ने 2021 के दौर का उल्लेख किया जब उनकी पार्टी को तोड़ दिया गया था, और वह राजनीतिक रूप से अकेले पड़ गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय एक कार्यक्रम करने के लिए भी 10 लोग जुटाना मुश्किल था, और इस संघर्ष के बाद पीएम मोदी ने उन पर भरोसा जताया।
External Source: Patrika Report
अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे शेयर करें और दूसरों को भी जागरूक करें। NEWSWELL24.COM पर हम ऐसे ही जरूरी और भरोसेमंद जानकारी लाते रहते हैं