फार्मर रजिस्ट्री में गाजियाबाद चमका | सुल्तानपुर की फजीहत | मंत्री बोले- अब होगी सज़ा

उत्तर प्रदेश में किसानों को डिजिटल पहचान देने की महत्वाकांक्षी फार्मर रजिस्ट्री परियोजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। 20 नवंबर 2025 तक, राज्य में लगभग 59.10% कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने धीमी गति वाले जिलों के अधिकारियों को समय पर काम पूरा न करने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।


🚀 किसानों की डिजिटल क्रांति: फार्मर रजिस्ट्री क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?

भारत, जो कृषि पर निर्भर है, वहाँ किसानों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना अक्सर एक जटिल प्रक्रिया रही है। इसी जटिलता को समाप्त करने और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से, उत्तर प्रदेश सरकार ने फार्मर रजिस्ट्री परियोजना की शुरुआत की है।

🆔 फार्मर रजिस्ट्री का मूल उद्देश्य

फार्मर रजिस्ट्री एक ऐसी पहल है जिसके तहत प्रदेश के प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या (Unique Farmer ID) प्रदान की जा रही है। यह आईडी एक तरह से किसानों का आधार कार्ड होगी, जिसके माध्यम से वे कृषि से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और आसानी से उठा सकेंगे। इस डिजिटल पहचान का मुख्य उद्देश्य निम्न है:

  • पात्रता का सत्यापन: यह सुनिश्चित करना कि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही मिले।
  • दक्षता और गति: पीएम किसान योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल बीमा जैसी योजनाओं के तहत लाभ, ऋण और बीमा क्लेम की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना।
  • भ्रष्टाचार पर रोक: बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करके फर्जीवाड़े को रोकना और यह सुनिश्चित करना कि किसानों को उनका पूरा हक मिले।

यह परियोजना डिजिटल इंडिया पहल के तहत कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो किसानों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुँच को सुगम और पारदर्शी बना रही है।


📊 75 जिलों का रिपोर्ट कार्ड: प्रदर्शन में गाजियाबाद सबसे आगे, सुल्तानपुर फिसड्डी

कृषि विभाग द्वारा 20 नवंबर 2025 को जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों की प्रगति का विस्तृत विश्लेषण सामने आया है। राज्य का औसत प्रदर्शन 59.10% है, जो दिखाता है कि एक बड़ी संख्या में किसानों का पंजीकरण अभी भी बाकी है।

🥇 शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिले (Top Performers)

कई जिलों ने इस महत्वपूर्ण कार्य को मिशन मोड में लेते हुए सराहनीय प्रगति दर्ज की है। इन जिलों ने प्रदेश के औसत को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

  • गाजियाबाद (Ghaziabad): 79.76% प्रगति के साथ यह जिला प्रथम स्थान पर है। गाजियाबाद का प्रदर्शन दिखाता है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन से तय समयसीमा में लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • बस्ती (Basti): 79.05% के साथ दूसरे स्थान पर।
  • सीतापुर (Sitapur): 78.22% प्रगति के साथ तीसरे स्थान पर।
  • रामपुर (Rampur): 76.90% के साथ चौथे स्थान पर।
  • फिरोजाबाद (Firozabad): 76.00% के साथ शीर्ष पाँच में शामिल।

इन जिलों की सफलता प्रभावी जमीनी स्तर के प्रचार, किसानों के बीच जागरूकता, और कृषि विभाग के कर्मचारियों के समर्पण का परिणाम है।

📉 चिंताजनक स्थिति: धीमी प्रगति वाले जिले (Bottom Performers)

प्रदेश के एक बड़े हिस्से में काम की गति संतोषजनक नहीं है। ये वे जिले हैं जो न केवल राज्य के औसत से पीछे हैं, बल्कि इनकी धीमी गति पूरी परियोजना की सफलता के लिए खतरा पैदा कर रही है।

  • सुल्तानपुर (Sultanpur): 49% कार्य पूरा होने के साथ सुल्तानपुर अंतिम पायदान पर है। यह प्रदर्शन राज्य के औसत से लगभग 10 प्रतिशत अंक कम है, जो स्थानीय कृषि अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है।
  • बलिया (Ballia): 50.23%
  • संत कबीर नगर (Sant Kabir Nagar): 50.32%
  • गोरखपुर (Gorakhpur): 50.53%
  • बागपत (Baghpat): 51.04%

इन जिलों की धीमी प्रगति का कारण जमीनी स्तर पर जागरूकता की कमी, तकनीकी समस्याओं का देर से समाधान, या प्रशासनिक ढिलाई हो सकती है। इन कारणों की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक उपाय करने की आवश्यकता है।


📢 कृषि मंत्री की सख्त चेतावनी: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी”

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने धीमी गति से काम कर रहे जिलों के प्रदर्शन पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। लखनऊ में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को चेतावनी दी है।

“जब प्रदेश का औसत 59.10% है, तब 50% के आसपास अटके जिलों का प्रदर्शन किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।” – सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री

🚨 मंत्री के प्रमुख निर्देश और चेतावनी

  • मिशन मोड में काम: सुल्तानपुर, बलिया, संत कबीर नगर, गोरखपुर, और बागपत सहित सभी कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों को तत्काल प्रभाव से ‘मिशन मोड’ में काम करने का निर्देश दिया गया है। इसका अर्थ है कि अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य हासिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास और संसाधन लगाने होंगे।
  • कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई: मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ढिलाई बरतने वाले या जानबूझकर काम में देरी करने वाले संबंधित अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह चेतावनी बताती है कि सरकार इस परियोजना की सफलता को कितनी गंभीरता से ले रही है।
  • दैनिक निगरानी: परियोजना की प्रगति की अब दैनिक आधार पर उच्च-स्तरीय निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी तरह की रुकावट को तुरंत दूर किया जा सके।

कृषि मंत्री का यह रुख राज्य सरकार की किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करता है कि डिजिटल पहचान के लाभ हर किसान तक समय पर पहुँचें।


📈 पीएम किसान और फार्मर रजिस्ट्री: डिजिटल प्रोग्रेस

फार्मर रजिस्ट्री का कार्य मुख्य रूप से उन किसानों पर केंद्रित है जो पहले से ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत सत्यापित हैं।

📝 पंजीकरण की वर्तमान स्थिति

  • पीएम किसान के तहत सत्यापित किसान: 2,48,30,499
  • फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किसान: 1,66,49,184
  • कुल प्रगति: 59.10%

20 नवंबर 2025 को, राज्य भर में 55,460 नई फार्मर आईडी जेनरेट की गईं। यह संख्या एक दिन में की गई प्रगति को दर्शाती है और बताती है कि कार्य में तेजी लाई जा रही है, लेकिन वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए यह गति पर्याप्त नहीं है। बचे हुए 40.90% किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है जिसके लिए सभी जिलों को गाजियाबाद, बस्ती और सीतापुर जैसे जिलों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।


🌐 डिजिटल पहचान के फायदे: किसान कैसे होंगे सशक्त?

फार्मर रजिस्ट्री से प्राप्त विशिष्ट डिजिटल आईडी किसानों के लिए कई सरकारी योजनाओं और सेवाओं तक पहुँच का एकल माध्यम बनेगी। यह आईडी कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

1️⃣ ऋण और बीमा क्लेम की सुगमता

डिजिटल रिकॉर्ड होने से किसानों को बैंकों से ऋण लेने और फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। बैंक और बीमा कंपनियाँ तुरंत किसान की पात्रता और जमीन के रिकॉर्ड को सत्यापित कर सकेंगी, जिससे किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिल पाएगी।

2️⃣ बिचौलिया मुक्त लेनदेन (Middlemen-Free Transactions)

फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से, सभी सरकारी लाभ सीधे किसान के खाते में हस्तांतरित (DBT) होंगे।

  • यह फर्जीवाड़े को रोकेगा
  • बिचौलियों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
  • किसानों को उनके हक का 100% लाभ मिलेगा।

3️⃣ लक्षित योजना वितरण (Targeted Scheme Delivery)

सरकार के लिए किसी विशेष क्षेत्र या श्रेणी के किसानों को लक्षित करके योजनाएँ बनाना और लागू करना आसान हो जाएगा। उदाहरण के लिए, सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों या किसी विशेष फसल उगाने वाले किसानों के लिए विशिष्ट सहायता कार्यक्रम चलाना संभव होगा।

4️⃣ डेटा-संचालित कृषि नीति (Data-Driven Policy)

किसानों का डिजिटल डेटा सरकार को वास्तविक समय (Real-Time) में कृषि की स्थिति को समझने में मदद करेगा। इससे बेहतर और प्रभावी कृषि नीतियाँ बनाने में मदद मिलेगी, जैसे कि:

  • किसानों की औसत जोत का आकार
  • किसानों द्वारा उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें
  • किसानों की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन।

यह सब किसानों के लिए अधिक लाभप्रद और टिकाऊ कृषि प्रणाली बनाने में सहायक होगा।


💡 आगे की राह: सफलता के लिए रणनीतियाँ

राज्य सरकार और कृषि विभाग को इस परियोजना को सफल बनाने के लिए धीमी गति वाले जिलों में कुछ विशेष रणनीतियाँ अपनाने की आवश्यकता है:

  • जागरूकता अभियान: गाँव-गाँव में विशेष शिविरों का आयोजन करना जहाँ किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के लाभों और पंजीकरण प्रक्रिया के बारे में सरल भाषा में समझाया जाए।
  • तकनीकी सहायता: स्थानीय कॉमन सर्विस सेंटरों (CSCs) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में किसानों की मदद के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करना।
  • अधिकारियों की जवाबदेही: धीमी गति वाले जिलों के जिला कृषि अधिकारियों को स्पष्ट रूप से लक्ष्यों और समयसीमा के लिए जिम्मेदार ठहराना और उनकी मासिक प्रगति की समीक्षा करना।
  • प्रोत्साहन योजना: अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिलों के अधिकारियों को पुरस्कृत करना, ताकि बाकी जिलों को भी प्रेरित किया जा सके।

निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तर प्रदेश की फार्मर रजिस्ट्री परियोजना किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। गाजियाबाद, बस्ती और सीतापुर जैसे जिलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्शाता है कि इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। हालाँकि, सुल्तानपुर और अन्य धीमी गति वाले जिलों की निराशाजनक प्रगति पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की सख्त चेतावनी स्पष्ट संकेत है कि सरकार किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह समय है जब सभी जिलों को अपनी गति बढ़ाकर, निर्धारित समयसीमा में सभी किसानों को डिजिटल पहचान प्रदान करनी चाहिए, ताकि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता का नया अध्याय शुरू हो सके। इस डिजिटल क्रांति की सफलता ही उत्तर प्रदेश के किसानों के भविष्य को सुरक्षित करेगी।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.

Q1. फार्मर रजिस्ट्री क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?

फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश सरकार की एक पहल है जो राज्य के प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट डिजिटल आईडी प्रदान करती है। यह ID किसानों को PM-KISAN, KCC, और फसल बीमा जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे, पारदर्शी और फर्जीवाड़ा-मुक्त तरीके से पहुँचाने के लिए एक अनिवार्य डिजिटल पहचान पत्र का काम करती है।

Q2. फार्मर रजिस्ट्री में कौन सा जिला पहले स्थान पर है?

कृषि विभाग द्वारा 20 नवंबर 2025 तक जारी रिपोर्ट के अनुसार, गाजियाबाद जिला 79.76% प्रगति के साथ फार्मर रजिस्ट्री के कार्य में पहले स्थान पर है।

Q3. यूपी में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य अब तक कितना पूरा हुआ है?

पूरे उत्तर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य औसतन 59.10% पूरा हो चुका है। हालांकि, सुल्तानपुर जैसे जिले अभी भी 50% के आंकड़े के आसपास हैं, जिस पर कृषि मंत्री ने नाराजगी जताई है।

Q4. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने धीमी गति वाले जिलों को क्या चेतावनी दी है?

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो जिले निर्धारित समयसीमा में फार्मर रजिस्ट्री का काम पूरा नहीं करेंगे, उनके संबंधित अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने धीमी गति वाले जिलों को मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया है।

Q5. फार्मर रजिस्ट्री किसान को क्या लाभ प्रदान करती है?

फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को कई लाभ मिलते हैं, जैसे:

  • योजनाओं का लाभ सीधा बैंक खाते में (DBT)।
  • ऋण और बीमा क्लेम की प्रक्रिया में तेज़ी
  • बिचौलियों की भूमिका समाप्त होना।
  • वास्तविक किसानों को उनके पूरे हक की प्राप्ति।

External Source: nationnowsamachar.com

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