काशी विश्वनाथ में ‘स्पर्श दर्शन’ पर बड़ा अपडेट: जानिए कब से फिर मिलेगी ये दिव्य सुविधा!

काशी विश्वनाथ में ‘स्पर्श दर्शन’ पर बड़ा अपडेट: जानिए कब से फिर मिलेगी ये दिव्य सुविधा!

फोकस कीवर्ड: काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पिछले पाँच दिनों से, इस पवित्र स्थल पर भक्तों के लिए बाबा विश्वनाथ के ‘स्पर्श दर्शन’ की सुविधा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस रोक के पीछे का कारण गर्भगृह के भीतर चल रहा एक महत्वपूर्ण जीर्णोद्धार कार्य है। मंदिर प्रशासन ने अब इस सुविधा को बहाल करने की संभावित तिथि की घोषणा की है, जिससे लाखों भक्तों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है।

🛠️ गर्भगृह के जीर्णोद्धार के कारण रुका ‘स्पर्श दर्शन’

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की असाधारण रूप से बढ़ती भीड़ के बीच, पिछले पाँच दिनों से स्पर्श दर्शन की व्यवस्था निलंबित चल रही है। यह सुविधा, जो पहले रविवार तक बहाल होने की उम्मीद थी, अब तक शुरू नहीं हो पाई है। निलंबन का मुख्य कारण मंदिर के मुख्य गर्भगृह के अंदर लगे हुए पुराने मार्बल और पत्थरों को बदलने का कार्य है।

यह नवीनीकरण कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किया जा रहा है, लेकिन निर्धारित समय-सीमा के बावजूद यह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। मंदिर के अधिकारियों ने मौजूदा स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया है कि सोमवार शाम तक काम पूरा होने की संभावना है। काम संपन्न होते ही, भक्तों के लिए काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन की सुविधा फिर से शुरू कर दी जाएगी।

विलंब की वजह और नई संभावित तिथि

मंदिर के सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेट (SDM) शंभू शरण के अनुसार, गर्भगृह के अंदर का पत्थर काफी पुराना और बदरंग हो गया था। इसके साथ ही, निरंतर भक्तों की अत्यधिक संख्या के दबाव के कारण पत्थरों में दरारें भी आ गई थीं।

  • मूल अनुमानित समय-सीमा: कार्य को शुक्रवार तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
  • पहला विस्तार: काम पूरा न होने के कारण इसे रविवार शाम तक के लिए बढ़ाया गया।
  • वर्तमान स्थिति और नई समय-सीमा: नवीनीकरण का काम अभी भी जारी है और इसे सोमवार शाम तक खत्म होने की उम्मीद है।
  • पुनः शुरुआत: अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, काम पूरा होने के बाद, भक्तों को मंगलवार सुबह से काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन का लाभ मिल सकेगा।

फिलहाल, मंदिर के मुख्य गर्भगृह में केवल मंदिर के अर्चक (पुजारी) और अन्य सेवादार ही प्रवेश कर पा रहे हैं, ताकि वे दैनिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ संपन्न कर सकें। आम भक्तों के लिए, गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन की व्यवस्था जारी है।

✨ गर्भगृह के नवीनीकरण का ऐतिहासिक संदर्भ

यह नवीनीकरण कार्य उस समय हो रहा है जब कुछ ही समय पहले मंदिर के मुख्य गर्भगृह को सोने की परतों से सजाने का काम किया गया था, साथ ही पत्थरों को भी विशेष रूप से चमकाया गया था। हालांकि, अत्यधिक भीड़ के कारण मार्बल जल्दी खराब होने लगे और कई स्थानों पर दरारें आ गईं। इस तरह के जीर्णोद्धार कार्य, मंदिर की पवित्रता और संरचनात्मक मजबूती को बनाए रखने के लिए समय-समय पर आवश्यक होते हैं।

इस परियोजना में शामिल मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. मार्बल-पत्थरों का प्रतिस्थापन: पुराने और क्षतिग्रस्त पत्थरों को नए और टिकाऊ मार्बल से बदला जा रहा है।
  2. संरचनात्मक जांच: पत्थरों की दरारों को ठीक कर गर्भगृह की आंतरिक संरचना को मजबूत किया जा रहा है।
  3. सौंदर्यीकरण: भविष्य में भक्तों की भीड़ के दबाव को सहन करने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए सामग्री का चुनाव किया जा रहा है।

यह महत्वपूर्ण है कि मंदिर प्रशासन भक्तों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रयासरत है।

📜 काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन के नियम और प्रक्रिया

काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन वह विशेष सुविधा है जिसके तहत भक्तों को बाबा विश्वनाथ के शिवलिंग को छूने और उनका अभिषेक करने का अवसर मिलता है। यह सुविधा अत्यंत पवित्र मानी जाती है, लेकिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने इसके लिए कुछ नियम और समय-सीमा निर्धारित की है।

स्पर्श दर्शन की समय-सीमा (आम भक्तों के लिए)

काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन का अवसर सामान्य तौर पर दिन में दो बार मिलता है, जब भीड़ का दबाव अपेक्षाकृत कम होता है:

समय-सीमाअवधिविवरण
सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे तक1 घंटामंगला आरती के बाद, आम भक्तों के लिए गर्भगृह में प्रवेश।
शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक1 घंटासांध्यकालीन अनुष्ठानों के बाद, आम भक्तों के लिए गर्भगृह में प्रवेश।

महत्वपूर्ण नोट: यह स्पर्श दर्शन मात्र कुछ सेकंड के लिए ही उपलब्ध होता है। भक्तों को बाबा को स्पर्श करने के तुरंत बाद आगे बढ़ने के लिए कहा जाता है, ताकि कतार में लगे अन्य भक्तों को भी अवसर मिल सके।

प्रोटोकॉल आधारित स्पर्श दर्शन

आम भक्तों के लिए निर्धारित समय के अलावा, काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन के लिए एक प्रोटोकॉल व्यवस्था भी लागू है।

  1. विशेष टिकट/शुल्क: स्पर्श दर्शन के लिए कोई विशिष्ट टिकट या अतिरिक्त शुल्क नहीं है जो हर कोई खरीद सके।
  2. प्रोटोकॉल: यह व्यवस्था विशिष्ट प्रोटोकॉल के माध्यम से लागू होती है, जिसके लिए एक निश्चित धनराशि का भुगतान करना होता है।
  3. अनुमति: यह प्रोटोकॉल सुविधा सिर्फ़ मंदिर प्रशासन के उच्चाधिकारियों की अनुमति पर ही मिलती है। यह व्यवस्था विशिष्ट अतिथियों या विशेष परिस्थितियों के लिए आरक्षित रहती है।

💰 सुगम दर्शन: जल्दी दर्शन की वैकल्पिक सुविधा

जो भक्त जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन स्पर्श दर्शन का लाभ नहीं उठा पाते, उनके लिए ‘सुगम दर्शन’ की व्यवस्था उपलब्ध है।

  • शुल्क: सुगम दर्शन के लिए ₹250 का शुल्क निर्धारित है।
  • प्रक्रिया: इस शुल्क का भुगतान करने पर भक्तों को एक अलग, छोटी कतार के माध्यम से जल्दी दर्शन करवाए जाते हैं।
  • ध्यान दें: सुगम दर्शन की प्रक्रिया में काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन शामिल नहीं है। यह केवल जल्दी और सुव्यवस्थित तरीके से बाबा के दर्शन करने की सुविधा प्रदान करता है।

दर्शन संबंधी व्यवस्थाओं और नवीनतम जानकारी के लिए श्रद्धालु आधिकारिक वेबसाइट shrikashivishwanath.org पर जाकर विस्तृत सूचना प्राप्त कर सकते हैं।

📈 भक्तों की बढ़ती संख्या: एक बड़ा प्रबंधन चुनौती

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के बनने के बाद, यहां आने वाले भक्तों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मंदिर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी लेकर आई है।

दैनिक और सप्ताहांत भीड़ का लेखा-जोखा

दिनऔसत दैनिक भक्त संख्या (अनुमानित)
सामान्य दिन1,00,000 (एक लाख) से अधिक
शनिवार और रविवार2,50,000 से 3,00,000 (ढाई से तीन लाख) तक

सप्ताहांत पर भीड़ में भारी वृद्धि हो जाती है, जो प्रबंधन और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से चुनौतीपूर्ण है। अत्यधिक भीड़ न केवल दर्शन व्यवस्था को धीमा करती है, बल्कि गर्भगृह की संरचना पर भी दबाव डालती है, जैसा कि मार्बल में दरारें आने की घटना से स्पष्ट होता है।

इस विशाल संख्या को संभालने के लिए, मंदिर प्रशासन लगातार नए प्रबंधन और कतार नियंत्रण तकनीकों को लागू करने पर विचार कर रहा है। दर्शन व्यवस्था में किया जा रहा यह नवीनीकरण भी लंबी अवधि में भीड़ प्रबंधन और संरचनात्मक संरक्षण की दिशा में एक कदम है।

🕌 काशी विश्वनाथ धाम: आस्था और विकास का संगम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के पूरा होने के बाद से यह मंदिर विश्व मानचित्र पर और भी अधिक प्रमुखता से उभरा है। इस परियोजना ने मंदिर परिसर को एक विशाल, सुगम और सौंदर्यपूर्ण ‘धाम’ में बदल दिया है, जिससे भक्तों का अनुभव पूरी तरह से बदल गया है।

कॉरिडोर का प्रभाव

  • सुगम पहुंच: गंगा नदी से मंदिर तक सीधी और चौड़ी पहुंच।
  • बुनियादी ढांचा: भक्तों की सुविधाओं के लिए लॉकर रूम, विश्राम स्थल, और चिकित्सा सहायता केंद्रों का निर्माण।
  • अंतर्राष्ट्रीय पहचान: विश्व भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक गंतव्य के रूप में स्थापित।

इस विकास के बावजूद, मंदिर की प्राचीन और धार्मिक गरिमा को बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसीलिए, गर्भगृह की संरचना और पवित्रता से कोई समझौता न करते हुए, समय पर नवीनीकरण कार्य किए जा रहे हैं। भक्तों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ये अस्थायी असुविधाएं मंदिर के दीर्घकालिक स्थायित्व और उनकी बेहतर दर्शन व्यवस्था के लिए आवश्यक हैं।

💡 भीड़ प्रबंधन और भविष्य की चुनौतियाँ

जैसे-जैसे काशी विश्वनाथ धाम की लोकप्रियता बढ़ रही है, भीड़ प्रबंधन एक निरंतर चुनौती बनी रहेगी। भविष्य में, प्रशासन को निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा:

  • डिजिटल कतार प्रबंधन: टोकन प्रणाली या ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित करना।
  • वर्धित सुरक्षा: आपातकालीन स्थितियों के लिए बेहतर निकासी योजना और चिकित्सा दल की तैनाती।
  • टिकाऊ सामग्री का उपयोग: गर्भगृह में ऐसी निर्माण सामग्री का उपयोग, जो अत्यधिक भीड़ के दबाव को लंबे समय तक झेल सके।
  • सूचना का प्रसार: स्पर्श दर्शन या अन्य सेवाओं में बदलाव की जानकारी भक्तों तक तुरंत पहुंचाना।

वर्तमान में काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन की बहाली का इंतजार कर रहे भक्तों को भी मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए और शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।


निष्कर्ष

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य गर्भगृह में चल रहे मार्बल नवीनीकरण कार्य के कारण पिछले पाँच दिनों से स्पर्श दर्शन अस्थायी रूप से निलंबित है। मंदिर प्रशासन ने कार्य में हुई देरी के लिए खेद व्यक्त करते हुए अब सोमवार शाम तक काम पूरा होने और मंगलवार सुबह से इस दिव्य सुविधा को फिर से शुरू करने की संभावित तिथि दी है। यह कार्य मंदिर की संरचनात्मक मजबूती और भक्तों के लिए एक सुरक्षित तथा पवित्र अनुभव सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है। जैसे ही काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन की सुविधा बहाल होगी, लाखों श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ का साक्षात् स्पर्श करने का सौभाग्य पुनः प्राप्त होगा, जिससे उनकी आस्था और भक्ति का यह पवित्र सफ़र जारी रह सकेगा।


सुझाए गए FAQs.

Q1: काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन कब से फिर शुरू होगा?

A1: मंदिर प्रशासन के अनुसार, गर्भगृह का नवीनीकरण कार्य सोमवार शाम तक पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन की सुविधा मंगलवार सुबह से भक्तों के लिए फिर से शुरू हो सकती है।

Q2: काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन क्यों बंद किया गया था?

A2: स्पर्श दर्शन गर्भगृह के अंदर लगे पुराने और क्षतिग्रस्त मार्बल-पत्थरों को बदलने के लिए चल रहे नवीनीकरण कार्य के कारण बंद किया गया था।

Q3: आम भक्तों के लिए स्पर्श दर्शन का सामान्य समय क्या है?

A3: सामान्य दिनों में, आम भक्तों को सुबह 4:00 से 5:00 बजे तक और शाम 5:00 से 6:00 बजे तक, कुल दो घंटे के लिए काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन का अवसर मिलता है।

Q4: क्या स्पर्श दर्शन के लिए कोई शुल्क या टिकट लगता है?

A4: आम भक्तों के लिए निर्धारित समय (सुबह 4-5 और शाम 5-6) में स्पर्श दर्शन के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क या टिकट नहीं है। हालांकि, ‘सुगम दर्शन’ के लिए ₹250 का शुल्क है, लेकिन उसमें स्पर्श दर्शन शामिल नहीं है।

Q5: मैं काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन व्यवस्था की अधिक जानकारी कहाँ से प्राप्त कर सकता हूँ?

A5: आप काशी विश्वनाथ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट shrikashivishwanath.org पर जाकर सुगम दर्शन, स्पर्श दर्शन और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत और नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

External Source: etvbharat.com

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे शेयर करें और दूसरों को भी जागरूक करें। NEWSWELL24.COM पर हम ऐसे ही जरूरी और भरोसेमंद जानकारी लाते रहते हैं

Leave a Comment

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now