महामारी का ख़तरा! नासिक में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का तांडव, क्या देश में फिर लगेगा लॉकडाउन? जानें लक्षण, बचाव और इंसानों पर असर

नासिक में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का प्रकोप: संपूर्ण क्षेत्र सील, अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट 🚨

महाराष्ट्र के नासिक शहर में अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever – ASF) के मामलों की आधिकारिक पुष्टि के बाद प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। यह अत्यंत संक्रामक और जानलेवा वायरल बीमारी सूअर पालन उद्योग के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही है। एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन (NGO) के नौ सूअरों की आकस्मिक मौत के बाद लिए गए नमूनों की जांच में इस खतरनाक वायरस की उपस्थिति की पुष्टि हुई है।

इस पुष्टि के तुरंत बाद, ज़िला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्र को कंटेनमेंट ज़ोन घोषित कर दिया है। यह कदम वायरस के स्थानीय और व्यापक प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है। यह घटना न केवल पशुपालकों के लिए, बल्कि समूचे मांस उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।


🦠 क्या है अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF)? एक घातक परिचय

अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) एक अत्यंत खतरनाक, तेज़ी से फैलने वाली वायरल बीमारी है। यह विशेष रूप से घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है, जबकि यह मनुष्यों और अन्य पशु प्रजातियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित मानी जाती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ASF, जिसे अक्सर ‘पिग प्लेग’ भी कहा जाता है, शास्त्रीय स्वाइन फीवर (Classical Swine Fever – CSF) से पूरी तरह अलग है।

ASF की सबसे भयावह विशेषता यह है कि वर्तमान में इसका कोई स्वीकृत उपचार या वाणिज्यिक टीका उपलब्ध नहीं है। इसकी घातकता दर (Mortality Rate) अत्यंत उच्च है, जो संक्रमित सूअरों में 90 से 100 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। इसका अर्थ है कि एक बार झुंड में संक्रमण फैलने पर, झुंड का लगभग पूरी तरह से सफाया हो सकता है।

🌍 ASF का वैश्विक परिदृश्य और इतिहास

यह वायरस पहली बार 1920 के दशक में अफ्रीका में पाया गया था, जहाँ से इसे इसका नाम मिला। यह बीमारी मूल रूप से उप-सहारा अफ्रीका के जंगली सूअरों और टिक्स (Ticks) में पाई जाती थी। 2007 के बाद से, ASF पूर्वी यूरोप, एशिया और हाल ही में जर्मनी और इटली जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में भी फैल गया है, जिससे वैश्विक सुअर उद्योग में भारी तबाही मची है। भारत में, ASF के मामले पहली बार 2020 में असम में रिपोर्ट किए गए थे, और तब से यह देश के कई हिस्सों में चिंता का विषय बना हुआ है।

ASF का प्रसार मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और परिवहन के माध्यम से होता है, जिसमें संक्रमित मांस उत्पादों का अवैध या अनियंत्रित आवागमन प्रमुख कारक है।


🛡️ नासिक प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया: क्षेत्र सील और कंटेनमेंट रणनीति

जैसे ही ASF वायरस की पुष्टि हुई, नासिक ज़िला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए एक व्यापक कंटेनमेंट और शमन रणनीति लागू की है।

  • कंटेनमेंट ज़ोन (Containment Zone): संक्रमित क्षेत्र के चारों ओर एक किलोमीटर का दायरा ‘संक्रमित क्षेत्र’ या ‘कंटेनमेंट ज़ोन’ घोषित किया गया है।
  • निगरानी ज़ोन (Surveillance Zone): इस कंटेनमेंट ज़ोन के बाहर, तीन किलोमीटर तक का क्षेत्र ‘निगरानी ज़ोन’ के रूप में स्थापित किया गया है, जहाँ गहन जाँच और निगरानी की जाएगी।
  • पशु आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध: अगले तीन महीनों की अवधि के लिए, कंटेनमेंट और निगरानी ज़ोन में किसी भी सूअर को रखने, बेचने, या एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • व्यापक सैनिटाइजेशन: पशुपालन विभाग की टीमें संक्रमित फार्मों और आस-पास के क्षेत्रों में व्यापक सैनिटाइजेशन अभियान चला रही हैं। इसमें कीटाणुनाशकों का उपयोग करके वायरस को सतहों से समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • जन जागरूकता: स्थानीय पशुपालकों और निवासियों को बीमारी के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

प्रशासन का उद्देश्य इस कठोर कार्रवाई के माध्यम से वायरस के भौगोलिक प्रसार को रोकना और स्वस्थ सूअरों को संक्रमण से बचाना है।


📈 ASF वायरस: कैसे और क्यों होता है इतना तेज़ फैलाव?

ASF वायरस की एक विशेषता यह है कि यह पर्यावरण में लंबे समय तक जीवित रह सकता है, जिससे इसका फैलाव बहुत तेज़ और अप्रत्याशित हो जाता है।

सूअरों में संक्रमण के प्रमुख मार्ग pathways:

  • सीधा संपर्क: संक्रमित सूअर से स्वस्थ सूअर का सीधा संपर्क, जिसमें शारीरिक तरल पदार्थ (जैसे, लार, मूत्र, मल, खून) का आदान-प्रदान होता है।
  • दूषित वस्तुएँ (Fomites): वायरस कपड़ों, जूतों, वाहनों, उपकरणों और पशु बाड़ों की दीवारों जैसी निर्जीव सतहों पर जीवित रह सकता है।
  • संक्रमित भोजन (Swill Feeding): सूअरों को संक्रमित मांस या मांस उत्पादों (जैसे, सूअर का गोश्त या हैम के टुकड़े) से बना भोजन खिलाना। यह अक्सर अंतर्राष्ट्रीय प्रसार का कारण बनता है।
  • जैविक वाहक (Vectors): Ornithodoros वंश के मुलायम टिक्स (Soft Ticks) कुछ क्षेत्रों में ASF वायरस को जंगली सूअरों से घरेलू सूअरों तक पहुँचा सकते हैं।
  • जंगली सूअर: जंगली सूअरों का आबादी के बीच अनियंत्रित आवागमन भी वायरस के प्रसार का एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक मार्ग है।

नासिक में प्रतिबंध लगाने का मुख्य कारण यही है कि वायरस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाले वाहकों (जैसे, वाहन या लोग) को रोका जाए।


🧐 अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लक्षण: क्या देखकर पहचानें?

सूअर पालने वाले लोगों के लिए ASF के लक्षणों को जल्दी पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शीघ्र पता लगने से ही अन्य सूअरों को बचाया जा सकता है। ASF के लक्षण गंभीर होते हैं और अचानक प्रकट होते हैं:

  • अचानक उच्च बुखार (High Fever): सूअर का तापमान 40.5°C (105°F) या उससे अधिक हो जाना।
  • भूख में कमी (Anorexia): सूअर का भोजन करना पूरी तरह से बंद कर देना।
  • अत्यधिक सुस्ती और कमजोरी (Lethargy): जानवर का उदास, कमजोर और उठने में असमर्थ होना।
  • त्वचा पर परिवर्तन: शरीर के विभिन्न हिस्सों, खासकर कान, पूंछ, पैरों और पेट पर गहरे लाल या नीले-काले धब्बे (Haemorrhages) दिखाई देना।
  • श्वसन और पाचन संबंधी समस्याएं:
    • साँस लेने में कठिनाई या तेज़ी से साँस लेना।
    • उल्टी और खूनी दस्त।
  • रक्तस्राव (Bleeding): नाक और आँखों से खूनी स्राव (Blood Discharge) होना।
  • गर्भपात: गर्भवती सूअरियों में अचानक गर्भपात हो जाना।
  • अचानक मृत्यु: कई मामलों में, सूअर बिना कोई स्पष्ट लक्षण दिखाए अचानक मर जाते हैं, जो इस बीमारी को और भी खतरनाक बनाता है।

चूंकि यह बीमारी तेज़ी से फैलती है और मृत्यु दर 100% तक पहुँच सकती है, इसलिए एक सूअर में भी इन लक्षणों के दिखने पर पूरे झुंड को तुरंत अलग करना अनिवार्य है।


🧍 इंसानों पर असर: क्या अफ्रीकी स्वाइन फीवर मनुष्यों के लिए ख़तरा है?

यह एक सबसे महत्वपूर्ण सवाल है, जिस पर ज़ोर देना आवश्यक है:

अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) एक जूनोटिक बीमारी नहीं है। यह वायरस मनुष्यों को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुँचाता है और न ही इंसानों में फैलता है। ASF का मनुष्यों के स्वास्थ्य पर कोई सीधा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

इस वायरस से संक्रमित सूअर का मांस यदि ठीक से पकाया जाए तो भी मनुष्यों के लिए सुरक्षित है। हालाँकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) हमेशा किसी भी बीमार जानवर का मांस नहीं खाने की सलाह देते हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव 💸

भले ही ASF मानव स्वास्थ्य को प्रभावित न करता हो, लेकिन इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम विनाशकारी होते हैं:

  1. पशुपालकों का नुकसान: सूअरों की उच्च मृत्यु दर के कारण छोटे और बड़े दोनों तरह के पशुपालकों को अपनी पूरी पूंजी गंवानी पड़ सकती है।
  2. मांस उद्योग पर असर: बड़े प्रकोपों ​​के कारण पूरे क्षेत्रों या देशों में सूअर के मांस का उत्पादन और व्यापार रुक जाता है, जिससे वैश्विक मांस आपूर्ति प्रभावित होती है।
  3. ग्रामीण आजीविका: भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में, सूअर पालन अक्सर गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। ASF का प्रकोप उनकी आजीविका को सीधे छीन लेता है।
  4. खाद्य सुरक्षा: उत्पादन में कमी से खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है और मांस की कीमतें बढ़ सकती हैं।

इन गंभीर आर्थिक परिणामों को देखते हुए, ASF को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सा आपातकाल की तरह कार्रवाई करना आवश्यक हो जाता है।


रोकथाम और बचाव की रणनीति: ASF से सुरक्षा के उपाय

ASF का कोई इलाज या टीका न होने के कारण, रोकथाम ही एकमात्र प्रभावी रणनीति है। सूअर पालकों और प्रशासन को निम्नलिखित जैव सुरक्षा (Biosecurity) उपायों का सख्ती से पालन करना चाहिए:

मुख्य निवारक उपाय 📝

  1. आवागमन नियंत्रण: नए सूअरों को झुंड में शामिल करने से पहले संगरोध (Quarantine) में रखें और उनकी स्वास्थ्य जाँच करवाएँ।
  2. अपशिष्ट प्रबंधन: सूअरों को बाज़ार से लाए गए मांस उत्पाद, बिना पका हुआ बचा हुआ भोजन या ऐसे उत्पाद कभी न खिलाएँ जो ASF-ग्रस्त क्षेत्रों से आए हों।
  3. सफाई और कीटाणुशोधन:
    • बाड़ों, फीडरों और पानी के बर्तनों को नियमित रूप से उच्च गुणवत्ता वाले कीटाणुनाशकों से साफ करें।
    • फार्म में प्रवेश करने वाले वाहनों और उपकरणों को हर बार सैनिटाइज करें।
  4. व्यक्तिगत स्वच्छता:
    • पशुपालक और कर्मचारियों को बाड़े में प्रवेश करने से पहले और बाद में कपड़े और जूते बदलने चाहिए।
    • हाथों को अच्छे से धोना चाहिए।
  5. बाहरी कीट नियंत्रण: टिक्स, मक्खियों और अन्य कीटों का नियंत्रण करें जो वायरस फैला सकते हैं।
  6. मृत सूअरों की रिपोर्टिंग: यदि एक क्षेत्र में कई सूअरों की अचानक मौत होती है, तो तुरंत स्थानीय पशुपालन विभाग या पशु चिकित्सा अधिकारियों को इसकी सूचना दें।
  7. बीमार पशुओं को अलग करना: किसी भी बीमार सूअर को तुरंत स्वस्थ सूअरों से अलग (Isolate) करें।

ASF के प्रकोप की स्थिति में, रोग नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका संक्रमित और संक्रमित माने जाने वाले सभी सूअरों को मानवीय तरीके से मारना (Culling) और उनके शवों का सुरक्षित निपटान करना है। यह कठोर कदम अन्य क्षेत्रों में बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक है।


🔬 ** ASF के टीके की खोज: कब मिलेगी राहत?**

विश्वभर के वैज्ञानिक समुदाय ASF के खिलाफ एक प्रभावी टीका विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ASF वायरस की जटिल प्रकृति (DNA Virus) और इसके प्रोटीन संरचना के कारण टीका विकास एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है।

  • विकास में प्रगति: हाल के वर्षों में, विशेष रूप से अमेरिका और चीन में, कुछ लाइव एटिन्यूएटेड (Live Attenuated) टीकों ने आशा जगाई है।
  • भारत में प्रयास: भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) भी स्वदेशी टीकों के विकास पर काम कर रहा है।
  • चुनौतियाँ: लाइव टीकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता का परीक्षण अभी भी चल रहा है, क्योंकि कुछ प्रायोगिक टीकों ने जानवरों में गंभीर दुष्प्रभाव दिखाए हैं।

जब तक एक सुरक्षित और प्रभावी टीका व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक सख्त जैव सुरक्षा उपाय ही इस बीमारी से बचाव का एकमात्र विश्वसनीय तरीका बने रहेंगे।


🛣️ आगे की राह: पशुधन और अर्थव्यवस्था को बचाना

नासिक में ASF का पता चलना एक वेक-अप कॉल है कि भारत में सूअर पालन क्षेत्र को अपनी जैव सुरक्षा प्रक्रियाओं को मजबूत करने की कितनी आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह पशुपालकों को वित्तीय सहायता प्रदान करे ताकि वे बेहतर बाड़बंदी, सफाई उपकरण और सुरक्षात्मक कपड़े खरीद सकें।

सरकार और पशुपालकों के लिए सिफारिशें 🤝

  • त्वरित मुआवजा: मारे गए (Culled) सूअरों के लिए पशुपालकों को त्वरित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए ताकि वे अधिकारियों के साथ सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित हों।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम: ग्रामीण पशुपालकों को ASF के लक्षण पहचानने और प्रभावी जैव सुरक्षा लागू करने के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।
  • अंतर्राज्यीय समन्वय: राज्यों के बीच सूअर और सूअर उत्पादों के आवागमन पर सख्त अंतर्राज्यीय जाँच और समन्वय की आवश्यकता है।
  • सर्विलांस में सुधार: ASF की प्रारंभिक पहचान के लिए उन्नत प्रयोगशाला निदान क्षमता और सक्रिय सर्विलांस कार्यक्रम लागू किए जाएँ।

निष्कर्ष रूप में, अफ्रीकी स्वाइन फीवर नासिक के लिए एक तात्कालिक खतरा है, लेकिन यह व्यापक रूप से एक राष्ट्रीय पशुधन सुरक्षा चुनौती है। त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया ही इस प्रकोप को नियंत्रित करने और भविष्य के नुकसान को रोकने की कुंजी है।


📝 निष्कर्ष

महाराष्ट्र के नासिक में अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि ने एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी है, जिसके चलते संक्रमित क्षेत्र को सील कर दिया गया है। यह वायरस सूअरों के लिए 100% तक घातक है, हालाँकि यह मनुष्यों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। ASF का मुख्य खतरा इसके विनाशकारी आर्थिक परिणामों में निहित है, जो सूअर पालकों की आजीविका को संकट में डाल सकता है। इस महामारी से निपटने का एकमात्र रास्ता सख्त जैव सुरक्षा, सूअरों के आवागमन पर प्रतिबंध, और त्वरित सैनिटाइजेशन है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और पशुपालकों की सावधानी ही इस संकट को बढ़ने से रोक सकती है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न.❓

Q1: क्या अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है?

A: नहीं। अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) एक जूनोटिक बीमारी नहीं है। यह वायरस केवल घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करता है और मनुष्यों के स्वास्थ्य पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता है।

Q2: ASF वायरस के मुख्य लक्षण क्या हैं?

A: मुख्य लक्षणों में अचानक उच्च बुखार, भूख न लगना, शरीर पर गहरे लाल/काले धब्बे, साँस लेने में कठिनाई, और उच्च मृत्यु दर (90-100%) शामिल हैं। कुछ मामलों में सूअर बिना लक्षण दिखाए अचानक मर जाते हैं।

Q3: नासिक में प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?

A: ASF की पुष्टि के बाद, प्रशासन ने संक्रमित फार्म के चारों ओर 1 किलोमीटर का दायरा सील करके कंटेनमेंट ज़ोन घोषित कर दिया है। सूअरों के आवागमन पर तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया गया है और व्यापक सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जा रहा है।

Q4: क्या ASF का कोई इलाज या टीका उपलब्ध है?

A: वर्तमान में, अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) के लिए कोई अनुमोदित उपचार या वाणिज्यिक टीका उपलब्ध नहीं है। इसलिए, रोकथाम के लिए सख्त जैव सुरक्षा उपायों का पालन करना ही एकमात्र तरीका है।

Q5: ASF का प्रसार कैसे रोका जा सकता है?

A: प्रसार को रोकने के लिए सख्त जैव सुरक्षा अपनाई जाती है, जिसमें दूषित चारे से बचना, बाड़ों और वाहनों का नियमित सैनिटाइजेशन, बीमार सूअरों को तुरंत अलग करना और कर्मचारियों के लिए कपड़े/जूते बदलना शामिल है।

External Source: Patrika Report

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