UP बेसिक शिक्षा में बड़ा फैसला: हर बच्चे को ‘आत्मविश्वास का कवच’ देने स्कूल रेडीनेस मूवमेंट शुरू

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल की शुरुआत की है। UP बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व में, राज्यव्यापी ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ (School Readiness Movement) अभियान ने ज़मीनी स्तर पर शिक्षा की नींव को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा की दौड़ में पीछे न छूटे, बल्कि आत्मविश्वास और मजबूत कौशल के साथ कक्षा 1 में प्रवेश करे।

🚀 अभियान की पृष्ठभूमि और लक्ष्य: UP बेसिक शिक्षा में समानता का प्रयास

उत्तर प्रदेश, देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के नाते, शैक्षिक चुनौतियों के विशाल परिदृश्य का सामना करता है। विशेष रूप से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के क्षेत्र में, बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश करने से पहले आवश्यक सीखने के कौशल से लैस करना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या के समाधान के लिए, बेसिक शिक्षा विभाग ने एक व्यापक और समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इस अभियान को शुरू करने के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का कोई भी बच्चा सीखने की दौड़ में पीछे न रहे। इस अभियान का मूल उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को समान अवसर, मजबूत शुरुआत और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कराने का है।” यह आंदोलन 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग पर केंद्रित है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है।

💡 NEP 2020 का दृष्टिकोण: प्रारंभिक वर्षों का महत्व

यह ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूलभूत सिफारिशों के अनुरूप है। NEP 2020 प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) को सीखने की नींव के रूप में स्थापित करती है। नीति यह मानती है कि यदि बच्चों को 3 से 8 वर्ष की आयु के बीच गुणवत्तापूर्ण, खेल-आधारित शिक्षा मिलती है, तो वे बेहतर शैक्षणिक परिणामों के साथ-साथ जीवन कौशल में भी उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं।

NEP 2020 के प्रमुख लक्ष्य, जो इस आंदोलन से जुड़े हैं:

  • फाउंडेशनल साक्षरता और अंकज्ञान (FLN): 2025 तक यह सुनिश्चित करना कि कक्षा 3 तक के सभी बच्चे पढ़ने, लिखने और बुनियादी अंकगणित को समझ सकें। ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ इस लक्ष्य की ओर पहला कदम है।
  • शिक्षा का सार्वभौमिकीकरण: ECCE को सार्वभौमिक बनाना, जिससे गरीब और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों को भी कक्षा 1 में प्रवेश से पहले एक मजबूत शैक्षणिक आधार मिल सके।
  • खेल-आधारित शिक्षा: सीखने को आनंदमय और अनुभवात्मक बनाना, रटने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना।

😥 पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में UP की चुनौती

पहले, आंगनबाड़ी केंद्रों का मुख्य ध्यान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं पर था, जबकि शैक्षिक पहलू अक्सर उपेक्षित रहता था। इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 में प्रवेश करने वाले बच्चों पर पड़ता था। वे अक्सर आवश्यक पूर्व-गणित, पूर्व-भाषा कौशल और सामाजिक आत्मविश्वास के बिना प्रवेश करते थे, जिससे उन्हें सीखने में संघर्ष करना पड़ता था।

प्रमुख चुनौतियां जिनके कारण इस मूवमेंट की आवश्यकता पड़ी:

  1. कौशल अंतराल (Skill Gap): अधिकांश बच्चे कक्षा 1 में प्रवेश के समय पेंसिल पकड़ने, अक्षर पहचानने या सरल गिनती जैसे बुनियादी मोटर और संज्ञानात्मक कौशल में पीछे रह जाते थे।
  2. नामांकन में उतार-चढ़ाव: आंगनबाड़ी से कक्षा 1 में परिवर्तन सहज न होने के कारण सरकारी स्कूलों में नामांकन दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था।
  3. आत्मविश्वास की कमी: प्रारंभिक कक्षाओं में सीखने में कठिनाई बच्चों में आत्मविश्वास की कमी पैदा करती थी, जो आगे चलकर ड्रॉपआउट का कारण बन सकती थी।

🍎 बालवाटिका में नए शैक्षणिक ढांचे का अनावरण

‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ का मुख्य स्तंभ आंगनबाड़ी (जिन्हें अब कई जगह बालवाटिका के रूप में भी संचालित किया जा रहा है) में अपनाई गई नई शैक्षणिक सामग्री और पद्धति है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सुनिश्चित किया है कि यह ढाँचा पूरी तरह से प्ले-आधारित (खेल-आधारित) और बाल-केंद्रित हो।

इस नए ढांचे के तहत, बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई शिक्षण गतिविधियों की शुरुआत की गई है, जिन्हें एक निश्चित और संरचित दैनिक पाठ योजना के अनुसार लागू किया जाएगा।

🧠 सीखने के पांच प्रमुख आयाम

बालवाटिका में बच्चों के सीखने के अनुभव को समग्र बनाने के लिए निम्नलिखित पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

  1. प्रारंभिक भाषा एवं साक्षरता कौशल:
    • इसमें बच्चों को कहानियाँ सुनाना, कविताएँ याद कराना, चित्रों और वस्तुओं को देखकर उनके नाम पहचानना सिखाया जाता है।
    • उद्देश्य: संवाद क्षमता बढ़ाना, शब्दावली विकसित करना और पढ़ने-लिखने के लिए आवश्यक शुरुआती कौशल प्रदान करना।
  2. संख्यात्मक कौशल (Numeracy):
    • सरल गिनती, आकृतियों की पहचान, वस्तुओं का समूहीकरण (Grouping) और पैटर्न की समझ शामिल है।
    • उद्देश्य: गणितीय सोच की नींव डालना और समस्या-समाधान के लिए तार्किक क्षमता का विकास करना।
  3. मोटर स्किल एवं रचनात्मकता:
    • इसमें ड्राइंग, क्ले मॉडलिंग, पहेलियाँ सुलझाना और शारीरिक खेल जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं, जो बच्चों के हाथ और आँखों के समन्वय (Hand-Eye Coordination) को बेहतर बनाती हैं।
    • उद्देश्य: लेखन और अन्य कार्यों के लिए ठीक मोटर कौशल को मजबूत करना।
  4. सामाजिक व्यवहार एवं आत्मविश्वास:
    • यह सहकर्मी बातचीत, समूह खेल, साझा करना और अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखने पर केंद्रित है।
    • उद्देश्य: बच्चों को सामाजिक रूप से जागरूक और भावनात्मक रूप से स्थिर बनाना, जो कक्षा 1 के वातावरण के लिए महत्वपूर्ण है।
  5. खेल आधारित शिक्षण:
    • बच्चों को खेलने के माध्यम से जटिल अवधारणाओं को समझने में मदद करना, जिससे सीखने की प्रक्रिया स्वाभाविक और आनंददायक बनी रहे।
    • उद्देश्य: जिज्ञासा को बढ़ावा देना और सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।

📚 शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षण सामग्री

इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह सुनिश्चित करता है कि पूरे राज्य में शैक्षिक अभ्यास में एकरूपता और उच्च मानक बनाए रखे जा सकें।

उपलब्ध कराए गए संसाधन:

सामग्री का प्रकारउद्देश्य एवं उपयोगिता
टीचर हैंडबुक (शिक्षक पुस्तिका)शिक्षकों के लिए दैनिक गतिविधियों और शिक्षण पद्धतियों का विस्तृत मार्गदर्शन, खेल-आधारित शिक्षण तकनीकों का परिचय।
स्टूडेंट एक्टिविटी शीट्स (छात्र गतिविधि पत्रक)बच्चों को अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप से सीखने में मदद करने के लिए रंगीन और आकर्षक कार्यपत्रक।
दैनिक पाठ योजना (Daily Lesson Plans)यह सुनिश्चित करना कि पाठ्यक्रम के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रतिदिन कवर किया जाए और सीखने का एक संरचित प्रवाह बना रहे।

डीजी स्कूल एजुकेशन मोनिका रानी ने इस प्रयास पर ज़ोर देते हुए कहा कि, “आंगनबाड़ी केंद्र ही बच्चे के सीखने की वास्तविक शुरुआत हैं। हम शिक्षकों को प्रशिक्षण और उपकरण देकर सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर बच्चा मजबूत आधार के साथ आगे बढ़े।”

🧑‍🏫 गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण: शिक्षकों को भविष्य के लिए तैयार करना

किसी भी शैक्षिक सुधार की सफलता शिक्षकों के कौशल और तैयारी पर निर्भर करती है। इसी सिद्धांत का पालन करते हुए, UP बेसिक शिक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ECCE एजुकेटर्स और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों के लिए एक व्यापक और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इस कदम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “प्रशिक्षित शिक्षक ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नींव होते हैं। इसी सोच के तहत हम कक्षा 1 में प्रवेश से पहले बच्चों के सीखने के स्तर को पूरी तरह मजबूत कर रहे हैं।”

🛠️ प्रशिक्षण के प्रमुख फोकस क्षेत्र

प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से हटकर व्यावहारिक और बाल-केंद्रित तकनीकों पर केंद्रित हैं:

  • कक्षा प्रबंधन (Classroom Management): छोटे बच्चों के बड़े समूहों को खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से कैसे व्यवस्थित किया जाए, इस पर मार्गदर्शन।
  • खेल आधारित शिक्षण की कला: यह समझना कि कैसे सरल खेल जटिल संज्ञानात्मक और सामाजिक कौशल विकसित कर सकते हैं।
  • फाउंडेशनल साक्षरता-अंकज्ञान पद्धतियां: नवीनतम और प्रभावी शिक्षण मॉडल का उपयोग करना ताकि बच्चे अक्षर ज्ञान और संख्या ज्ञान को आसानी से आत्मसात कर सकें।
  • व्यवहारिक सीखने के मॉडल: रटने की बजाय, बच्चों को करके सीखने (Learning by Doing) के लिए प्रोत्साहित करना।
  • कहानी सुनाना (Storytelling): भाषा विकास और कल्पनाशीलता को बढ़ाने के लिए कहानी सुनाने को एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उपयोग करना।

📈 एक पैराडाइम शिफ्ट: आंगनबाड़ी का नया स्वरूप

बेसिक शिक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी की भूमिका को केवल स्वास्थ्य और पोषण तक सीमित न रखते हुए उसे बच्चे के सीखने की पहली पाठशाला के रूप में सशक्त रूप से रेखांकित किया है। यहां का वातावरण ऐसा बनाया जा रहा है जहां आदतें बनती हैं, जिज्ञासा पनपती है, आत्मविश्वास विकसित होता है और सीखने का पहला सकारात्मक अनुभव मिलता है।

स्कूल रेडीनेस मूवमेंट के अंतर्गत आंगनबाड़ी की नई भूमिका:

  1. संज्ञानात्मक विकास का केंद्र: भाषा और संख्यात्मक कौशल को प्राथमिकता देना।
  2. सामाजिक-भावनात्मक विकास: बच्चों को साझा करना, प्रतीक्षा करना और टीमवर्क जैसे आवश्यक सामाजिक कौशल सिखाना।
  3. शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM): रंगीन चार्ट, स्थानीय रूप से उपलब्ध खिलौने और पहेलियों जैसी शिक्षण सामग्री का उपयोग बढ़ाना।

यह सशक्तिकरण आने वाले वर्षों में बच्चों की शैक्षणिक परिणामों और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता में बड़ा बदलाव लाएगा।

🎯 ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ के अपेक्षित परिणाम और दूरगामी प्रभाव

इस अभियान के दो महत्वपूर्ण और व्यापक परिणाम अपेक्षित हैं, जो राज्य के समग्र शैक्षिक परिदृश्य को बदल देंगे।

⬆️ सरकारी स्कूलों में नामांकन में अभूतपूर्व वृद्धि

यह अभियान आंगनबाड़ी से ग्रेड-1 में सुगम और आत्मविश्वास से भरा परिवर्तन सुनिश्चित करता है। जब अभिभावक देखते हैं कि उनके बच्चे पहले से ही स्कूल के माहौल और बुनियादी कौशलों से परिचित हैं, तो सरकारी स्कूलों में प्रवेश दर में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

नामांकन पर प्रभाव:

  • सुगम संक्रमण (Smooth Transition): चूंकि 5-6 वर्ष के बच्चे पहले से ही बालवाटिका के माध्यम से एक औपचारिक शिक्षण वातावरण के अभ्यस्त हो जाते हैं, कक्षा 1 उनके लिए एक अपरिचित स्थान नहीं रह जाता।
  • अभिभावकों का विश्वास: गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा मिलने से अभिभावकों का विश्वास UP बेसिक शिक्षा प्रणाली में बढ़ेगा, जिससे निजी स्कूलों की ओर रुझान कम होगा।

💪 फाउंडेशनल साक्षरता और अंकज्ञान (FLN) की मजबूती

बेहतर प्रारंभिक तैयारी से बच्चे कक्षा 1 में तेज़ी से सीखेंगे। बुनियादी कौशलों में मज़बूती होने के कारण वे न केवल वर्तमान पाठ्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, बल्कि आगे की कक्षाओं में भी उनकी नींव मज़बूत बनी रहेगी।

पूर्व की स्थितिअपेक्षित बदलाव (स्कूल रेडीनेस मूवमेंट के बाद)
कक्षा 1 में शुरुआती सीखने में कठिनाई।तेज गति से सीखना: मजबूत प्रारंभिक आधार के कारण पाठ्यक्रम को जल्दी आत्मसात करना।
आत्मविश्वास की कमी और हिचकिचाहट।उच्च आत्मविश्वास: स्कूल और सीखने की प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण।
प्राथमिक कक्षाओं में सीखने का निम्न स्तर।बेहतर शैक्षणिक परिणाम: उच्च कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन।

यह पहल बच्चों को भविष्य में सीखने की हर चुनौती के लिए सक्षम बनाएगी।

🤝 सामुदायिक भागीदारी: अभिभावकों की सक्रिय भूमिका

यह अभियान केवल शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है। इसकी सफलता के लिए समुदाय और विशेष रूप से अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। UP बेसिक शिक्षा विभाग ने माता-पिता को इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में शामिल करने की योजना बनाई है।

🏡 घर पर सीखने का माहौल

शिक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे अभिभावकों को सरल और प्रभावी तरीके बताएं जिनके माध्यम से वे घर पर बच्चों की शिक्षा का समर्थन कर सकें।

माता-पिता के लिए सरल गतिविधियां:

  • कहानी पढ़ना: बच्चों को रोज़ाना सोने से पहले एक कहानी या किताब पढ़कर सुनाना।
  • गिनती वाले खेल: रसोई या दैनिक कार्यों में गिनती का उपयोग करना (जैसे: कितनी प्लेटें हैं? कितने फल हैं?)।
  • संवाद: बच्चों को उनके स्कूल के दिन के बारे में पूछना, जिससे उनकी शब्दावली और संवाद कौशल में वृद्धि हो।
  • चित्रकला: उन्हें कागज और रंग देकर अपनी कल्पना को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।

📈 क्रियान्वयन में संभावित चुनौतियाँ और आगे की राह

2000+ शब्दों के इस विश्लेषण में, यह आवश्यक है कि हम इस बड़े अभियान के क्रियान्वयन से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर भी विचार करें, ताकि इसकी सफलता सुनिश्चित की जा सके।

🚧 क्रियान्वयन की चुनौतियाँ

  1. मानव संसाधन की चुनौती: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या, उनके मौजूदा कार्यों का बोझ और उन्हें नए शैक्षिक ढांचे के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता।
  2. सामग्री की गुणवत्ता और वितरण: पूरे राज्य में, विशेषकर दूर-दराज के क्षेत्रों में, शिक्षण सामग्री (हैंडबुक, एक्टिविटी शीट्स) का समय पर और समान वितरण सुनिश्चित करना।
  3. निरंतर निगरानी: प्रशिक्षण के बाद भी शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के शिक्षण अभ्यास की निरंतर निगरानी और उन्हें आवश्यक सहायता (mentoring) प्रदान करना।
  4. भौतिक अवसंरचना: कई आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा के लिए उपयुक्त और सुरक्षित जगह का अभाव हो सकता है।

📊 निगरानी और मूल्यांकन की प्रणाली

इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए, UP बेसिक शिक्षा विभाग को एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना होगा।

  • डिजिटल ट्रैकिंग: प्रत्येक बच्चे की प्रगति (जैसे: भाषाई कौशल और संख्यात्मक कौशल में सुधार) को ट्रैक करने के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • पीरियॉडिक असेसमेंट: यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चे ग्रेड-1 के लिए तैयार हैं, त्रैमासिक या अर्ध-वार्षिक आधार पर सरल, गैर-तनावपूर्ण मूल्यांकन आयोजित किए जा सकते हैं।
  • नोडल अधिकारियों की भूमिका: प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को यह सुनिश्चित करने के लिए सशक्त किया जाना चाहिए कि प्रशिक्षित पद्धतियां कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू की जा रही हैं।

🌟 विशेषज्ञ विश्लेषण: शिक्षाविदों की राय

शिक्षाविदों का मानना है कि यह आंदोलन UP बेसिक शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. आलोक वर्मा (काल्पनिक नाम) ने टिप्पणी की, “शिक्षा में अक्सर फोकस उच्च कक्षाओं पर रहता है, लेकिन सीखने की दर का सबसे बड़ा निर्धारण प्रारंभिक वर्षों में होता है। उत्तर प्रदेश का यह ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ न केवल नामांकन बढ़ाएगा, बल्कि कक्षा 1 में प्रवेश करने वाले बच्चों के लिए ‘सीखने के लिए सीखना’ (Learning to Learn) का एक मजबूत आधार स्थापित करेगा। यह एक गेम-चेंजर है।”

मोनिका रानी, डीजी स्कूल एजुकेशन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस पहल का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं है, बल्कि बच्चों को जीवन के लिए तैयार करना है। “हम शिक्षकों को प्रशिक्षण और उपकरण देकर सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर बच्चा मजबूत आधार के साथ आगे बढ़े। यह सिर्फ साक्षरता नहीं है; यह आदतें बनाने, जिज्ञासा जगाने और आत्मविश्वास विकसित करने के बारे में है।”

📝 निष्कर्ष: UP में प्रारंभिक शिक्षा का स्वर्णिम भविष्य

UP बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलने की क्षमता रखता है। यह एक समन्वित प्रयास है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को जमीनी हकीकत में बदलता है। आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त करने, शिक्षकों को उन्नत प्रशिक्षण देने और अभिभावकों को शामिल करने पर ज़ोर देकर, यह अभियान यह सुनिश्चित करता है कि राज्य का प्रत्येक 5-6 वर्ष का बच्चा आत्मविश्वास, कौशल और उत्साह के साथ कक्षा 1 में प्रवेश करे, जिससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा और राज्य के शैक्षणिक परिणामों में एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव आएगा। यह अभियान सिर्फ एक पहल नहीं है, बल्कि UP बेसिक शिक्षा के स्वर्णिम भविष्य की ओर एक मज़बूत कदम है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ क्या है?

उत्तर: ‘स्कूल रेडीनेस मूवमेंट’ उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह द्वारा शुरू किया गया एक राज्यव्यापी अभियान है। इसका उद्देश्य 5 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी (बालवाटिका) केंद्रों में विशेष खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से कक्षा 1 में आत्मविश्वास और आवश्यक कौशल के साथ प्रवेश करने के लिए तैयार करना है।

Q2. इस अभियान का मुख्य फोकस किस आयु वर्ग पर है?

उत्तर: इस अभियान का मुख्य फोकस 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों पर है, जो आंगनबाड़ी या बालवाटिका केंद्रों में नामांकित हैं। यह उम्र फाउंडेशनल भाषा और संख्यात्मक कौशल (FLN) के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

Q3. इस आंदोलन से बच्चों को क्या लाभ होंगे?

उत्तर: बच्चों को निम्नलिखित लाभ होंगे: प्रारंभिक भाषा एवं संख्यात्मक कौशल का विकास, बेहतर मोटर स्किल्स, आत्मविश्वास में वृद्धि, सामाजिक व्यवहार में सुधार, और सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण। इससे कक्षा 1 में सीखने की गति तेज होगी।

Q4. क्या शिक्षकों को इस नई व्यवस्था के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण दिया गया है?

उत्तर: हाँ, ECCE एजुकेटर्स, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को बड़े पैमाने पर उन्नत प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में खेल-आधारित शिक्षण, कहानी सुनाने की कला, कक्षा प्रबंधन और FLN पद्धतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

Q5. यह पहल सरकारी स्कूलों के नामांकन को कैसे प्रभावित करेगी?

उत्तर: यह पहल आंगनबाड़ी से कक्षा 1 में परिवर्तन को सुगम बनाकर सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास बढ़ाएगी। बच्चों के मजबूत आधार के साथ स्कूल में प्रवेश करने से सरकारी स्कूलों में नामांकन दर में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

External Source: nationnowsamachar.com

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