कानपुर के रामा देवी चौराहे के पास शुक्रवार सुबह एक चलती स्लीपर बस में भयानक आग लगने से हड़कंप मच गया। यह बस दिल्ली से वाराणसी जा रही थी और इसमें 43 यात्री सवार थे। भीषण आग के गोले में तब्दील हो चुकी बस में यात्रियों की चीख-पुकार मच गई। हालांकि, मौके पर तैनात दो बहादुर पुलिस कॉन्स्टेबलों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सभी 43 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला और एक बड़े हादसे को टाल दिया।
💥 कैसे हुई बस में भीषण आग की घटना?
🛣️ फ्लाईओवर पर हुई भयावह घटना
यह हृदय-विदारक घटना शुक्रवार को सुबह लगभग 10:45 बजे रामदेवी चौराहा से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक फ्लाईओवर पर हुई। ‘पलक ट्रैवल्स’ की यह स्लीपर बस राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से तीर्थनगरी वाराणसी के लिए रवाना हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस जब फ्लाईओवर से गुजर रही थी, तभी उसके ऊपरी हिस्से (सामान रखने की जगह) से धुआं उठना शुरू हुआ और देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
बस के अंदर फंसे यात्री, खासकर महिलाएं और बच्चे, दहशत में आ गए और बाहर निकलने के लिए चीखने-चिल्लाने लगे। पुरुषों ने तो किसी तरह खिड़कियों या गेट से कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन महिलाएं और छोटे बच्चे आग की बढ़ती लपटों और धुएं के कारण अंदर ही फंस गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि बस का ड्राइवर और कंडक्टर मौके से भाग खड़े हुए, जिससे यात्रियों की जान पर और भी बड़ा खतरा मंडरा गया।
🦸♂️ जान जोखिम में डालकर कॉन्स्टेबलों ने दिखाया साहस
🚨 ड्यूटी पॉइंट से दौड़कर पहुंचे ‘देवदूत’
रामा देवी चौराहे पर यातायात नियंत्रण ड्यूटी में तैनात कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र और कॉन्स्टेबल साहिल खान ने जैसे ही जलती हुई बस और अंदर फंसे यात्रियों की चीखें सुनीं, वे बिना एक पल गंवाए घटना स्थल की ओर भागे। उस समय तक बस की छत से आग की लपटें काफी तेज हो चुकी थीं और गेट तक आ रही थीं।
पुलिसकर्मियों के अनुसार, जब वे बस के पास पहुंचे, तो कुछ महिला यात्री अभी भी अपने सामान को बचाने की कोशिश कर रही थीं। दोनों सिपाहियों ने तुरंत चिल्लाकर उन्हें चेताया: “सामान छोड़ दो, जान बचाओ! आग बहुत तेजी से फैल रही है।”
- कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र और साहिल खान ने तुरंत जलती हुई बस के अंदर प्रवेश किया।
- उन्होंने एक-एक यात्री को बाहर निकालना शुरू किया।
- बस के अंदर तेजी से फैल रहे धुएं और गर्मी के कारण दम घुटने लगा था, लेकिन उन्होंने अपना बचाव कार्य जारी रखा।
👶 बच्चों और गर्भवती महिला को सुरक्षित निकाला
कॉन्स्टेबल साहिल खान ने बाद में बताया कि वे तुरंत बच्चों और बुजुर्गों को निकालने के काम में जुट गए।
“बस में आग लगते ही हम अपना ड्यूटी पॉइंट छोड़कर भागे। छत की तरफ से आग तेजी से बढ़ती जा रही थी। हमने तुरंत दो-दो, तीन-तीन बच्चों को गोदी में उठाकर सुरक्षित बाहर निकाला। बस में एक गर्भवती महिला भी थीं, जिन्हें हमने पूरी सावधानी से बाहर निकाला। धुएं से हमारा दम घुटने लगा था, सांस लेना मुश्किल हो रहा था।” – साहिल खान
एक समय उन्हें बताया गया कि शायद एक बच्चा अंदर रह गया है। साहिल खान ने फिर से जलती बस में प्रवेश किया और हर सीट की जांच की, हालाँकि, बाद में पता चला कि वह बच्चा पहले ही बाहर निकल चुका था। दोनों पुलिसकर्मियों की प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ मानव जीवन थी। उन्होंने बार-बार सामान के लिए परेशान हो रहे यात्रियों को समझाया कि जान बच गई तो सब कुछ है, सामान फिर से खरीदा जा सकता है, लेकिन जान नहीं खरीदी जा सकती है।
⏱️ ‘दो मिनट की देरी से जा सकती थी 4-5 जानें’
कॉन्स्टेबल साहिल खान और पुष्पेंद्र दोनों ने एकमत से कहा कि अगर वे घटनास्थल पर 2-3 मिनट भी देर से पहुंचते, तो शायद 4-5 लोगों की जान जा सकती थी। उन्होंने बताया कि आग ऊपर रखे सामान से फैलकर बस के अंदर तक आ चुकी थी और भीषण गर्माहट व धुएं से अंदर बैठे यात्रियों का दम घुट रहा था।
- बचाव में चुनौतियां:
- बस के अंदर भीषण गर्मी और जहरीला धुआं।
- बस में महिलाओं का साड़ी पहने होना, जिससे उन्हें जल्दी उतरने में मुश्किल हो रही थी।
- यात्रियों का सामान बचाने पर ध्यान देना, जिससे बचाव कार्य धीमा हो सकता था।
- ड्राइवर-कंडक्टर के भाग जाने से यात्रियों की मदद के लिए कोई नहीं था।
इस साहसी बचाव कार्य में, 43 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई, जिसे दोनों कॉन्स्टेबलों ने अपने कर्तव्य की पूर्ति बताया।
❓ आग लगने के कारण और यात्रियों के दावे
📦 ओवरलोडिंग और सामान पर संदेह
आग लगने का स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि, बस में सवार यात्रियों ने आग लगने के लिए बस में अनावश्यक रूप से भरे सामान और ओवरलोडिंग को जिम्मेदार ठहराया है।
यात्रियों के प्रमुख दावे:
- ओवरलोडिंग: कई यात्रियों ने बताया कि बस क्षमता से अधिक भरी हुई थी और बस के ऊपर भी भारी मात्रा में सामान रखा गया था।
- सामान से आग: वाराणसी जा रहे हितेश और गोरखपुर के सुरेंद्र कुमार सहित कई यात्रियों ने दावा किया कि आग सबसे पहले बस के ऊपर रखे सामान में लगी और फिर तेजी से नीचे फैल गई।
- शिकायत की अनदेखी: हितेश ने यह भी दावा किया कि उन्होंने गुरुवार रात से ही बस में अत्यधिक सामान भरे होने की शिकायत की थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
यात्रियों के अनुसार, बस ऑपरेटर ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए अत्यधिक सामान लाद रखा था, जिसने आग की घटना में एक बड़ी भूमिका निभाई।
💰 लाखों का नुकसान और मुआवजे की मांग
💸 राख हुए सपने और सामान
जहां कॉन्स्टेबलों के प्रयास से मानव जीवन तो बच गया, वहीं यात्रियों का लाखों का सामान जलकर राख हो गया। बस में सवार 43 यात्रियों का निजी सामान, जिसमें नकदी, ज्वैलरी, लैपटॉप, घरेलू सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे, पूरी तरह से जल गए।
- मनजीत झा (प्रयागराज जा रहे): ₹20,000 नकद सहित बैग जल गया। उनका कहना था कि सामान बस के ऊपर रखा था, जिसमें सबसे पहले आग लगी।
- पुष्पा देवी (मिर्जापुर जा रहीं): शादी के लिए ले जा रही ₹43,000 का सामान, लैपटॉप और यहां तक कि लड्डू गोपाल की मूर्ति भी जल गई। उन्होंने कहा, “यह कहो जान बच गई, लड्डू गोपाल ने बचा लिया।”
- हितेश (वाराणसी जा रहे): लाखों के सामान का नुकसान हुआ। उन्होंने अपनी गलती न होने पर नुकसान के मुआवजे की मांग की।
यात्रियों ने बस ऑपरेटर से हुए नुकसान के मुआवजे की मांग की है, क्योंकि उनका कहना है कि यह दुर्घटना ऑपरेटर की लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कारण हुई है। नुकसान का सटीक आकलन अभी तक नहीं हो सका है, लेकिन यह निश्चित रूप से लाखों में है।
🚧 हाईवे पर लगा 10 किलोमीटर लंबा भीषण जाम
🚗 यातायात हुआ ठप्प
इस भीषण दुर्घटना के कारण कानपुर-इलाहाबाद हाईवे पर यातायात पूरी तरह से ठप्प हो गया। फ्लाईओवर और सर्विस रोड, दोनों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
- जाम की अवधि: सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे।
- यात्रियों को दिक्कत: नौबस्ता जैसे दूर स्थानों से आ रहे राहगीरों को जाम के कारण 1 घंटे से भी ज्यादा का समय लगा।
- स्थिति नियंत्रण: पुलिस और ट्रैफिक पुलिस को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने यातायात को सुचारु करने और फंसे हुए वाहनों को निकालने में काफी मशक्कत की।
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त नियमों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
🌟 निष्कर्ष: साहस की कहानी और सुरक्षा पर सवाल
कानपुर का यह अग्निकांड उन दो पुलिस कॉन्स्टेबलों – पुष्पेंद्र और साहिल खान – के असाधारण साहस और मानवता की कहानी है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए 43 जिंदगियों को बचाया। उनके समय पर और निडर हस्तक्षेप ने एक भयानक त्रासदी को टाल दिया। समाज को उनके इस कर्तव्यपरायणता और बलिदान के लिए उनका आभारी होना चाहिए।
हालांकि, यह घटना बस ऑपरेटरों की लापरवाही और ओवरलोडिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सवाल उठाती है। यात्रियों के दावों के अनुसार, सुरक्षा नियमों की अनदेखी सीधे तौर पर इस दुर्घटना का कारण बनी। यह आवश्यक है कि परिवहन विभाग ऐसे ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य करे, ताकि भविष्य में इस प्रकार की जनहानि के खतरों को कम किया जा सके।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: कानपुर बस अग्निकांड कहाँ और कब हुआ?
A1: यह घटना शुक्रवार सुबह लगभग 10:45 बजे कानपुर के रामा देवी चौराहे से 200 मीटर दूर फ्लाईओवर पर हुई।
Q2: जलती बस से कितने यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया?
A2: दो बहादुर पुलिस कॉन्स्टेबलों – पुष्पेंद्र और साहिल खान – ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस में सवार सभी 43 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
Q3: आग लगने का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
A3: यात्रियों के अनुसार, आग सबसे पहले बस के ऊपर रखे अत्यधिक सामान (ओवरलोडिंग) में लगी। हालांकि, पुलिस अभी भी आग लगने के सटीक कारण की जांच कर रही है।
Q4: इस हादसे के बाद हाईवे पर क्या प्रभाव पड़ा?
A4: हादसे की वजह से कानपुर-इलाहाबाद हाईवे पर लगभग 10 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया, जिससे सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे।
Q5: यात्रियों के सामान का कितना नुकसान हुआ है?
A5: बस में सवार सभी 43 यात्रियों का लाखों रुपए का सामान, जिसमें नकदी, गहने, लैपटॉप और अन्य घरेलू सामान शामिल थे, जलकर राख हो गया है। नुकसान का आकलन अभी जारी है।
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