🔥 बिहार चुनाव 2025: मोकामा में फिर गूंजा अनंत सिंह का नाम
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर मोकामा सीट को सुर्खियों में ला दिया। बाहुबली नेता अनंत सिंह ने जेल से तीसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास दोहराया। इस बार उनका मुकाबला एक और बाहुबली परिवार से था, जिसने चुनाव को और भी रोमांचक बना दिया।
26 राउंड की गिनती के बाद परिणाम साफ हुआ—अनंत सिंह ने राजद प्रत्याशी वीणा देवी को 28,206 वोटों से हराया। उन्हें कुल 91,416 वोट मिले, जबकि वीणा देवी 63,210 वोटों पर सिमट गईं। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पियूष प्रियदर्शी 19,365 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
🏛️ मोकामा: बाहुबलियों का गढ़
मोकामा विधानसभा सीट लंबे समय से बिहार की राजनीति में बाहुबलियों के प्रभाव के लिए जानी जाती है। यहां चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और भावनात्मक टकराव का भी प्रतीक रहा है।
- 2005 से अनंत सिंह का दबदबा कायम है।
- उन्हें “छोटे सरकार” के नाम से जाना जाता है।
- जेल में रहते हुए भी चुनाव जीतना उनकी पहचान बन चुका है।
📜 अनंत सिंह का चुनावी सफर: एक राजनीतिक थ्रिलर
अनंत सिंह का राजनीतिक करियर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं।
🗳️ प्रमुख चुनावी पड़ाव
- 2005 – पहली बार जीत, मात्र 1769 वोटों से
- 2015 – निर्दलीय रहते हुए 18,000+ वोटों से जीत
- 2020 – राजद टिकट पर 35,000+ वोटों से जीत
- 2022 उपचुनाव – पत्नी नीलम देवी ने 16,741 वोटों से जीत दर्ज की
- 2025 – जेडीयू प्रत्याशी के रूप में 28,000+ वोटों से ऐतिहासिक जीत
⚡ NOTA का असर: जनता का गुस्सा
इस चुनाव में NOTA (None of the Above) ने भी बड़ा संदेश दिया।
- कुल 4,609 मतदाताओं ने NOTA दबाया।
- यह संख्या पांच प्रत्याशियों के व्यक्तिगत वोट से ज्यादा रही।
- पीछे रह गए उम्मीदवारों में डॉ. राजेश कुमार रत्नाकर, अनिल कुमार, राहुल कुमार, मंजू कुमारी और विकास कुमार शामिल रहे।
👉 यह साफ करता है कि मतदाता विकल्पों से असंतुष्ट थे और उन्होंने सीधे-सीधे “कोई नहीं चाहिए” का संदेश दिया।
🎉 जश्न की तैयारी: तीन दिन पहले से माहौल गरम
अनंत सिंह के समर्थकों में जीत को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया।
- पटना स्थित उनके आवास पर 50,000 लोगों के लिए खाना तैयार किया गया।
- 2 लाख रसगुल्ले बांटने की तैयारी की गई।
- घर के बाहर लगा पोस्टर— “जेल का फाटक टूटेगा, मेरा शेर छूटेगा”— चुनाव का सबसे लोकप्रिय नारा बन गया।
काउंटिंग के दौरान समर्थक बड़ी LED स्क्रीन पर रुझान देखते रहे और हर बढ़त के साथ माहौल और गरमाता गया।
⚔️ बाहुबलियों का सीधा मुकाबला
मोकामा का चुनाव इस बार दो बाहुबली परिवारों के बीच टकराव में बदल गया।
- अनंत सिंह बनाम सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी
- दोनों प्रत्याशी एक ही जाति से होने के कारण मुकाबला और भी दिलचस्प बना
- दुलारचंद यादव हत्याकांड और अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और जटिल कर दिया
दूसरी ओर, जेडीयू कैंप में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की सक्रियता ने ऊर्जा और आत्मविश्वास भर दिया।
📊 वोटों का गणित
- अनंत सिंह (जेडीयू) – 91,416 वोट
- वीणा देवी (राजद) – 63,210 वोट
- पियूष प्रियदर्शी (जन सुराज) – 19,365 वोट
- अन्य प्रत्याशी – 5,000 से भी कम वोट
🕰️ मोकामा का राजनीतिक इतिहास
मोकामा सीट हमेशा से बिहार की राजनीति में हाई-वोल्टेज रही है।
- बाहुबलियों का दबदबा
- जातीय समीकरणों का गहरा असर
- अपराध और राजनीति का मिश्रण
यह सीट सिर्फ चुनावी जीत-हार नहीं बल्कि बिहार की राजनीतिक संस्कृति का आईना भी रही है।
📌 बिहार चुनाव 2025: बड़े संदेश
- बाहुबलियों का दबदबा अब भी कायम है।
- जेल से चुनाव जीतना अब असामान्य नहीं रहा।
- NOTA का बढ़ता इस्तेमाल जनता की नाराजगी दिखाता है।
- जातीय समीकरण अब भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
🧾 FAQs.
Q1. अनंत सिंह ने कितनी बार जेल से चुनाव जीता है?
👉 उन्होंने अब तक तीन बार जेल से चुनाव जीता है—2015, 2020 और 2025।
Q2. मोकामा सीट पर 2025 में किसे हराया गया?
👉 राजद प्रत्याशी वीणा देवी को 28,206 वोटों से हराया गया।
Q3. NOTA का क्या असर रहा?
👉 4,609 वोट NOTA को मिले, जो पांच प्रत्याशियों से ज्यादा थे।
Q4. अनंत सिंह को कुल कितने वोट मिले?
👉 उन्हें 91,416 वोट मिले।
Q5. मोकामा सीट क्यों खास है?
👉 यह सीट बाहुबलियों के प्रभाव और जातीय समीकरणों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहती है।
🏁 निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मोकामा सीट ने एक बार फिर साबित किया कि राजनीति और बाहुबल का रिश्ता अब भी गहरा है। अनंत सिंह की तीसरी जेल से जीत ने उनके राजनीतिक किले को और मजबूत कर दिया। वहीं, NOTA का बढ़ता इस्तेमाल जनता की नाराजगी का स्पष्ट संकेत है।
External Source: Patrika Report
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